510-L, Model Town Ludhiana – 141002 (India)

प्रोस्टेट संक्रमण क्या होता है? लक्षण, कारणों और उपचार के विकल्पों के बारे में जानें डॉक्टर से

Categories
Hindi Prostate Diseases

प्रोस्टेट संक्रमण क्या होता है? लक्षण, कारणों और उपचार के विकल्पों के बारे में जानें डॉक्टर से

Loading

दरअसल, प्रोस्टेट ग्लैंड काफी ज्यादा छोटा होता है, पर यह सभी पुरुषों की सेहत में एक महत्वपूर्ण भूमिका को निभाता है। आपको बता दें, कि ब्लैडर के ठीक नीचे की तरफ मौजूद, अखरोट के आकार का यह ग्लैंड, दरअसल वीर्य द्रव की पैदावार में काफी ज्यादा सहायक होता है, जो आम तौर पर शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करने में मदद करता है, और इन को शरीर तक पहुंचाता है। आम तौर पर, प्रोस्टेट में सूजन या फिर संक्रमण जिसे प्रोस्टेटाइटिस भी कहा जाता है, जिसकी वजह से पुरुषों को बहुत ज्यादा दर्द, बेचैनी और पेशाब से जुड़ी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। इसके साथ ही इसके लक्षणों में, व्यक्ति को पेशाब करते समय दर्द या फिर जलन महसूस होना और पीठ के निचले हिस्से, कमर या फिर श्रोणि क्षेत्र में दर्द होना शामिल हो सकता है, जिस के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स और अन्य दवाओं का उपयोग किया जा सकता है और यह जीवाणु संक्रमण, मूत्र मार्ग संक्रमण और श्रोणि में चोट के कारण हो सकता है। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति को नजरअंदाज करने की बजाए, तुरंत डॉक्टर के साथ संपर्क करना महत्वपूर्ण होता है। आइये इस लेख के माध्यम से प्रोस्टेट संक्रमण के प्रमुख लक्षणों, उनके कारणों और उपचार के विकल्पों के बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

प्रोस्टेट संक्रमण (प्रोस्टेटाइटिस) क्या होता है?

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि प्रोस्टेट संक्रमण या फिर प्रोस्टेटाइटिस तब होता है, जब बैक्टीरियल संक्रमण या फिर दूसरे नॉन-बैक्टीरियल कारणों की वजह से प्रोस्टेट ग्लैंड में, सूजन जैसी समस्या का उत्पादन हो जाता है, या फिर सूजन आ जाती है। आम तौर पर, इस तरह की समस्या किसी भी उम्र के व्यक्तिओं को प्रभावित कर सकती है, पर ये समस्या ज़्यदातर 30 से 50 साल की उम्र के लोगों के बीच सबसे ज्यादा आम देखि जा सकती है। 

दरअसल, इस तरह की समस्या के बढ़ने के तरीके और समय के आधार पर, प्रोस्टेटाइटिस को चार मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है, जिस में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  1. एक्यूट बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस
  2. क्रोनिक बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस
  3. लक्षणहीन सूजन संबंधी प्रोस्टेटाइटिस
  4. क्रोनिक प्रोस्टेटाइटिस इस फिर क्रोनिक पेल्विक पेन सिंड्रोम (सीपी/सीपीपीएस)

प्रोस्टेट संक्रमण के लक्षण क्या हैं?

आपको बता दें, कि पुरुषों में प्रोस्टेट संक्रमण के लक्षण अक्सर संक्रमण की गंभीरता और प्रकार के आधार पर अलग -अलग दिखाई दे सकते हैं। दरअसल, कई चेतावनीयों के संकेत आम हो सकते हैं, पर इनको कभी भी नज़रअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। प्रोस्टेट संक्रमण के आम लक्षणों में निम्नलिखत लक्षण शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. व्यक्ति को पेशाब करते समय दर्द या फिर जलन अनुभव होना (डिसुरिया)
  2. किसी व्यक्ति को बार-बार पेशाब करने की इच्छा प्रकट होना। 
  3. पेशाब करने या फिर पेशाब की धारा को बनाकर रखने में काफी ज्यादा परेशानी होना। 
  4. व्यक्ति के पीठ के निचले हिस्से में, कमर में या फिर श्रोणि क्षेत्र में काफी ज्यादा दर्द का एहसास होना। 
  5. स्खलन के दौरान दर्द, कामेच्छा में कमी या फिर इरेक्शन बनाए रखने में काफी ज्यादा दिक्कत होना। 
  6. पेशाब या फिर वीर्य में दिखाई देने वाले परिवर्तन। 
  7. बुखार होना, ठंड लगना और शरीर में काफी ज्यादा दर्द का अनुभव होना। 
  8. लगातार बेचैनी या फिर थकान महसूस होना (मलाइज़) 

दरअसल, अगर आपको इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव होता है, तो इसको बिलकुल भी नज़रअंदाज न करें, इसके लिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। 

प्रोस्टेट संक्रमण के कारण क्या हैं?

प्रोस्टेट संक्रमण कई कारणों से हो सकता है, जिन में सबसे आम कारण निम्नलिखित अनुसार हैं:

  1. जीवाणु संक्रमण होना। 
  2. मूत्र मार्ग में संक्रमण होना। 
  3. मूत्रमार्ग में रुकावट या फिर संकुचन होना। 
  4. श्रोणि में चोट लगना। 

प्रोस्टेट संक्रमण के उपचार के विकल्प

दरअसल, प्रोस्टेट इन्फेक्शन के लक्षणों का उपचार ज्यादातर, इस बात पर निर्भर करता है, कि यह संक्रमण बैक्टीरियल है, या फिर नॉन-बैक्टीरियल है। प्रोस्टेट संक्रमण के आधार पर, इसके उपचार के विकल्पों में ये शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. एंटीबायोटिक थेरेपी
  2. अल्फा-ब्लॉकर्स
  3. एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं
  4. फिजियोथेरेपी और पेल्विक फ्लोर व्यायाम
  5. जीवनशैली में बदलाव करना। 
  6. गर्म पानी से नहाना और ज्यादातर तरल पदार्थों का सेवन करना। 

निष्कर्ष: किसी भी तरह की कोई गंभीर स्थिति उत्पन्न होने से पहले हमारा शरीर हल्के संकेतों को प्रदान करता है। जैसे कि प्रोस्टेट इन्फेक्शन के शुरुआती लक्षणों में दर्द होना, पेशाब में बदलाव या फिर पेल्विक हिस्से में तकलीफ होना आदि शामिल होता है। इन्हें कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, समय पर पहचान और इलाज सेहत के लिए ज़रूरी है। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी या फिर अगर आपको भी प्रोस्टेट इन्फेक्शन जैसी कोई समस्या है और आप इसका समाधान चाहते हैं, तो आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी अस्पताल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Categories
Hindi Kidney Stones

किडनी में पथरी की समस्या से बचाव के लिए, डाइट में शामिल करें ये 4 तरल पदार्थ, आपको मिला फायदा

Loading

आम तौर पर, किडनी में पथरी की समस्या जितनी ज्यादा आम होती है, उतनी ही ज्यादा गंभीर और दर्दनाक भी होती है। दरअसल, किडनी की समस्या में एक व्यक्ति को असहनीय दर्द होता है, जिसमें वह कुछ भी नहीं कर पाता और इस से उसके दिनभर के काम भी काफी ज्यादा प्रभावित होते हैं। आपको बता दें, कि किडनी में पथरी की समस्या खानपान से जुड़ी एक बीमारी है। जिससे, आज के समय में काफी ज्यादा लोग प्रभावित हैं। यह लगभग, सभी जानते हैं, कि जब किडनी में मिनरल और सोडियम का धीरे-धीर जमाव होता है, तो यह काफी ज्यादा ठोस बन जाता है और इसी ठोस जमाव को पथरी के रूप में देखा जाता है। आम तौर पर, एक व्यक्ति की किडनी में पथरी का आकार अलग-अलग हो सकता है और उसी के हिसाब से आपको दर्द या फिर परेशानी हो सकती है। आपको बता दें, कि जब किडनी में पथरी का आकार काफी ज्यादा छोटा होता है, तो यह एक व्यक्ति के मूत्र मार्ग के माध्यम से आसानी से बाहर निकल जाता है और इसमें किसी भी प्रकार का कोई गंभीर दर्द नहीं होता है। पर, इसके उल्ट जब किडनी में पथरी का आकार काफी ज्यादा बड़ा होता है, तो यह दर्दनाक हो सकती है। इस तरह की स्थिति में असहनीय दर्द का अहसास हो सकता है। आम तौर पर, इस तरह की समस्या से बचने के लिए आप अपनी डाइट में कुछ तरल पदार्थ को शामिल कर सकते हैं। इन तरल पदार्थों का रोजाना सेवन करने से किडनी की पथरी से बचा जा सकता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में, इस के डॉक्टर से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

किडनी में पथरी की समस्या से बचने के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 तरल पदार्थ

  1. पानी

आम तौर पर, किडनी में पथरी की समस्या के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसके साथ ही, इस तरह की समस्या से बचने के लिए भी रोजाना पानी पीना काफी ज्यादा जरूरी होता है। आपको बता दें, कि रोजाना पानी का सेवन करने से शरीर में जमा सभी जहरीले पदार्थ पेशाब के जरिये बाहर निकल जाते हैं। अगर रोजाना 8 से 10 गिलास पानी के पिए जाएँ, तो किडनी में होने वाली पथरी की समस्या को भी रोका जा सकता है। 

  1. नींबू का जूस

वैसे तो, नींबू का जूस सभी को पीना चाहिए, क्योंकि यह सेहत के लिए काफी ज्यादा लाभदायक होता है। आपको बता दें, कि नींबू का जूस विटामिन सी से भरपूर होता है और रोजाना इसका सेवन शरीर की इम्यूनिटी को काफी ज्यादा बढ़ाता है। दरअसल, नींबू के रस में सिट्रिक एसिड की मात्रा काफी ज्यादा होती है, जो आम तौर पर, ऑक्सालेट और सोडियम जैसे तत्वों के जमाव को घोल देता है। इससे किडनी में, बने पथरी के छोटे-छोटे कण मूत्र मार्ग के माध्यम से पेशाब के जरिये शरीर से बाहर निकलते रहते हैं और यह शरीर में, मौजूद जहरीले पदार्थों को भी बाहर निकालने में काफी ज्यादा सहायता करता है। किडनी में पथरी की समस्या से बचाव के लिए आप रोजाना एक गिलास नींबू के जूस का सेवन कर सकते हैं। 

  1. अनार का जूस

दरअसल, किडनी में पथरी की समस्या से बचाव के लिए आप रोजाना अनार के जूस का सेवन कर सकते हैं, क्योंकि अनार का जूस पोषक तत्वों से काफी ज्यादा भरपूर होता है। आपको बता दें कि अनार के जूस में ऐसे पोषक तत्वों होते हैं, जो संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होते हैं। इसके साथ ही, अनार का जूस किडनी में मौजूद पथरी को तोड़ने में भी काफी ज्यादा सहायता करता है। 

  1. हर्बल टी

किडनी में पथरी की समस्या से बचने के लिए आप धनिया, तुलसी, कैमोमाइल, अदरक और पुदीने की चाय का सेवन कर सकते हैं। इसके साथ ही, इस तरह की समस्या के लिए हर्बल टी का सेवन एक बहुत ही अच्छा विकल्प हो सकता है। आम तौर पर, इन हर्बल टी के सेवन से हमारी पाचन शक्ति बेहतर रहती है और किडनी में पथरी की समस्या से बचाव होता है। 

निष्कर्ष

आज के समय में पथरी की समस्या होना काफी ज्यादा आम है। दरअसल पथरी का आकार छोटा भी हो सकता है और बड़ा भी हो सकता है। किडनी में पथरी की समस्या खानपान से जुड़ी एक बीमारी है। इस तरह की समस्या से बचने के लिए अपने खानपान में सुधार करना जरूरी होता है। किडनी में पथरी की समस्या से बचने के लिए आप अपनी डाइट में ऊपर बनाए गए तरल पदार्थों को शामिल कर सकते हैं। पथरी की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क जरूरी होता है। अगर आपको भी इस तरह कोई समस्या है और आप इसका इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी अस्पताल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी ले सकते हैं।

Categories
Hindi Kidney Stones

क्या वाकई कैल्शियम की गोली लेने से किडनी में पथरी की समस्या होती है? जानें डॉक्टर से

Loading

सेहतमंद खनिज, हमारे शरीर के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं। इसी तरह हमारे शरीर के लिए कैल्शियम काफी ज्यादा जरूरी होता है। दरअसल, हमारे शरीर में कैल्शियम की कमी होने की वजह से कई तरह की समस्याएं जैसे कि हड्डियां, दांत और नाखून कमजोर होने लग जाते हैं। इस तरह की स्थिति में, ख़ास तौर पर जिन लोगों की हड्डियां काफी ज्यादा कमजोर हो जाती हैं, दरअसल, उनको रोजाना कैल्शियम की गोली का सेवन करने के लिए कहा जाता है। आम तोर पर, इस तरह की स्थिति में, लोगों के मन में कैल्शियम की गोली को लेकर कई तरह के वहम हैं, जैसे कि कैल्शियम की गोली का सेवन करने से किडनी में पथरी की समस्या हो जाती है। अगर आप भी इन वहमों पर विश्वास करते हैं, तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

क्या वाकई, कैल्शियम की गोलियों का सेवन करने से किडनी में पथरी होती है?

दरअसल, लोगों के इस भ्रम पर डॉक्टर का कहना है, कि कैल्शियम की गोली या फिर सप्लीमेंट का सेवन करने से किडनी में पथरी जैसी किसी भी समस्या का उत्पादन नहीं नहीं होता है। डॉक्टर के अनुसार, सोशल मीडिया पर इस तरह के जो भी वीडियो हैं, वह सभी एक तरह से गलत हैं। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि किडनी में पथरी की समस्या बनने का मुख्य कारण ऑक्सालेट होता है। असल में, ऑक्सालेट हमारे भोजन के जरिए शरीर में फैलता है। आम तौर पर, डॉक्टर के अनुसार जिन लोगों के भोजन में लगातार कैल्शियम और विटामिन डी की कमी होती है, दरअसल उन लोगों को किडनी में पथरी बनने का खतरा काफी ज्यादा होता है। इसलिए, आपकी रोजाना की डाइट में विटामिन डी और कैल्शियम की पर्याप्त का होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आपको बता दें, कि अगर कोई व्यक्ति अपनी रोजाना की डाइट में सही मात्रा में कैल्शियम का सेवन करता है, तो ऐसी स्थिति में ऑक्सालेट दांतों से चिपकता नहीं है और आसानी से यूरिन के जरिए शरीर से बाहर निकल जाता है और जब ऑक्सालेट हमारे शरीर से आसानी से बाहर निकल जाता है, तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को किडनी में पथरी बनने की समस्या कभी भी नहीं होती है। 

कैल्शियम के लिए सबसे अच्छा सप्लीमेंट कौन सा है?

दरअसल, इस तरह की स्थिति में डॉक्टर का कहना है, कि किडनी में पथरी या फिर कोई अन्य समस्या न हो और शरीर में कैल्शियम को पूरा करने के लिए कैल्शियम सिट्रेट वाले सप्लीमेंट का सेवन करना चाहिए। दरअसल, सिट्रेट यूरिन के रास्ते से निकलकर पथरी बनाने वाले तत्वों को नष्ट कर देता है। 

निष्कर्ष

शरीर के लिए कैल्शियम काफी ज्यादा जरूरी होता है। डॉक्टर के अनुसार, कैल्शियम की गोली या फिर सप्लीमेंट का सेवन करने से किडनी में पथरी जैसी किसी भी समस्या का उत्पादन नहीं नहीं होता है। पर इस दौरान ध्यान देने वाली बात यह है, कि इसके ज्यादा सेवन से किडनी में पथरी की समस्या हो सकती है। इसलिए, कम मात्रा में इसका सेवन, किडनी में पथरी जैसी समस्या का उत्पादन नहीं करता है। जिन लोगों को किडनी से संबंधित कोई अन्य परेशानी होती है, उनको कैल्शियम की गोली या फिर अन्य सप्लीमेंट को लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। अगर आपको भी किडनी में पथरी या फिर किडनी से संबंधित कोई समस्या है और आप इसका इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी अस्पताल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में जानकारी ले सकते हैं।

Categories
Hindi Kidney Stones

क्या संबंध होता है हमारी किडनी और ब्लड प्रेशर के बीच? डॉक्टर से जानें

Loading

आज के समय में ज्यादातर लोग अपने काम में व्यस्त रहते हैं, इसलिए, आजकल के वर्किंग कल्चर और गैर सेहतमंद जीवनशैली को अपनाने की वजह से बहुत सारे लोग हाई ब्लड प्रेशर और किडनी से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

अगर इस तरह की स्थिति को गहराई से समझा जाये, तो जो लोग लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठकर काम करते रहते हैं, दरअसल वह फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड जैसे पदार्थों का काफी ज्यादा सेवन करते हैं। आपको बता दें, कि इस तरह के लोग काम के चक्क्र में कम नींद को लेते हैं, जिसकी वजह से ऊके तनाव का स्तर काफी ज्यादा बढ़ जाता है। आम तौर पर, यह सभी कारक न केवल हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को बढ़ावा देते हैं, बल्कि किडनी को भी खराब करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका को निभाते हैं। आपको बता दें, कि अगर समय रहते इन बढ़ती समस्यायों पर ध्यान नहीं दिया जाता है, तो यह समस्याएं आगे चलकर किडनी सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकती हैं। अगर आप इस तरह की समस्याओं से अपना बचाव करना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको समय रहते सही खानपान, एक्सरसाइज और सेहतमंद लाइफस्टाइल को अपनाने की काफी ज्यादा जरूरत होती है। इस तरह की स्थिति में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है, कि आखिर किडनी और ब्लड प्रेशर के बीच में क्या संबंध होता है? तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे कि आखिर ब्लड प्रेशर और किडनी के बीच क्या संबंध है?

ब्लड प्रेशर और किडनी के बीच क्या संबंध होता है?

आपको बता दें कि हमारे शरीर के लिए किडनी बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। दरअसल हमारे शरीर में किडनी का मुख्य काम शरीर में मौजूद जहरीले पदार्थों और ज्यादा पानी को फिल्टर करके पेशाब के जरिये शरीर से बाहर निकालना होता है। आमतौर पर, जिसकी वजह से हमारे शरीर का संतुलन बना रहता है। दरअसल, जब हमारे ब्लड प्रेशर की समस्या में बढ़ोतरी होती है, तो इसकी वजह से किडनी की ब्लड वेसेल्स (रक्त वाहिकाएं) संकुचित हो जाती हैं, जिसकी वजह से किडनी को पर्याप्त मात्रा में खून की सप्लाई नहीं मिल पाती है। आपको बता दें कि इसके कारण किडनी फिल्टर्स पर काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसकी वजह से हमारी किडनी धीरे-धीरे खराब होना शुरू हो जाती है। आम तौर पर, इसके अलावा जब हमारे शरीर में किडनी सही तरीके से काम नहीं करती है, तो हमारे शरीर में फ्लूइड और सोडियम की काफी मात्रा जमा होना शुरू हो जाती है, जिसके कारण हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है। 

ब्लड प्रेशर बढ़ने पर किडनी पर क्या असर पड़ता है?

आम तौर पर, अगर हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्या किसी व्यक्ति को काफी लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह एक आगे चलकर किडनी फेल होने का कारण बन सकती है। जैसा कि आपको पहले ही बताया जा चुका है, हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्या के कारण न केवल किडनी में मौजूद ब्लड वेसल सिकुड़ जाती हैं, बल्कि वे सख्त भी हो जाती हैं। इसके कारण एक व्यक्ति की किडनी में खून का प्रवाह कम हो जाता है, जिसकी वजह से किडनी के काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके साथ ही, जब किडनी को पर्याप्त मात्रा में खून की सप्लाई नहीं मिल पाती है, तो वह शरीर में से जहरीले पदार्थों को और शरीर में मौजूद ज्यादा पानी को बाहर नहीं निकल पाती है। इसकी वजह से शरीर में क्रिएटिनिन, यूरिया और अन्य वेस्ट प्रोडक्ट्स काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं, जो एक समय पर किडनी फेल होने का प्रमुख कारण बन सकते हैं। 

  1. हाई बीपी की वजह से ग्लोमेरुलस को काफी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है, जिसके कारण, यूरिन में प्रोटीन लीक होने की समस्या हो सकती है, जो किडनी खराब होने का एक प्रमुख संकेत माना जाता है। 
  2. आम तौर पर, अगर समय रहते हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्या का इलाज न किया जाये, तो यह क्रोनिक किडनी डिजीज का रूप धारण कर सकते हैं, जहां एक समय पर आकर किडनी बिलकुल काम करना बंद कर देती है। दरअसल, इस तरह की स्थीत में एक मरीज को डायलिसिस या फिर किडनी ट्रांसप्लांट जैसे विकल्पों का सहारा लेना पड़ता है। 

निष्कर्ष

जो लोग लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठकर काम करते रहते हैं, वह फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड जैसे पदार्थों का काफी ज्यादा सेवन करते हैं। ऐसे लोग काम के चक्क्र में कम नींद लेते हैं,और अपने तनाव के स्तर को बड़ा लेते हैं। यह सभी कारक न केवल हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को बढ़ावा देते हैं, बल्कि किडनी को भी खराब करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका को निभाते हैं। किडनी और हाई ब्लड प्रेशर एक दूसरे की सेहत पर एक गहरा प्रभाव डालते हैं। अगर लम्बे वक्त तक ब्लड प्रेशर हाई रहता है, तो यह किडनी फेल होने का कारण बनता है। वहीं अगर हमारी किडनी सही से काम नहीं करती है, तो ब्लड प्रेशर जैसी समस्या बढ़ने लगती है। इसलिए समय समय पर इन दोनों की जांच करवाना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। अगर आपको भी हाई ब्लड प्रेशर और किडनी में किसी भी प्रकार की कोई समस्या है, और आप इसका इलाज करवाना चाहते हैं, तो आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी अस्पताल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Categories
Hindi

किडनी में पथरी होने का क्या कारण होता है? आखिर कितने प्रकार की हो सकती है किडनी की पथरी, जानिए विशेषज्ञों से

Loading

किसी भी तरह की समस्या आने पर दर्द और तकलीफ होना लाज़मी है। जैसे कि किडनी की समस्या होना। बता दें, कि किडनी में पथरी की समस्या काफी ज्यादा दर्दनाक होती है। लम्बे वक्त से पथरी की समस्याय से पीड़त व्यक्ति को तुरंत अस्पताल में भर्ती होन पड़ता है। इस तरह की स्थिति में अगर किडनी में किसी भी तरह की सूजन आ जाये, तो इस दौरान डॉक्टर दवाइयों की मदद से किडनी में मौजूद सूजन को कम करते हैं। इस के बाद, किडनी में से पथरी को निकालने के लिए सर्जरी को किया जाता है, या फिर दवाइयों के इस्तेमाल से किडनी में से पथरी को निकालने की कोशिश की जाती है। आपको बता दें, कि किडनी की पथरी अक्सर बार-बार पथरी बनने का कारण भी बनती है। इस तरह की स्थिति में कई बार दर्द अचानक से होता है, जिसकी वजह से रोगी को अपने आप को संभालना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है। आम तौर पर, इस लिए इस दौरान यह समझना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, कि एक मरीज को किडनी में किस प्रकार की पथरी की समस्या है, ताकि वह उस पथरी की किसम से जुड़े आहार का सेवन करने से अपने आप को बचा सके। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि आखिर किडनी में पथरी कितने प्रकार की होती है और इसके होने के मुख्य कारण क्या हो सकते हैं?

किडनी की पथरी के प्रकार

डॉक्टर के अनुसार, अगर किसी मरीज को बार-बार किडनी में पथरी की समस्या होती है, तो इस तरह की स्थिति में डॉक्टर की सलाह पर अपनी किडनी का चेकअप करवाना चाहिए, ताकि जांच के दौरान यह पता चल सके, कि एक मरीज की किडनी में किस प्रकार की पथरी का निर्माण हो रहा है। किडनी में पथरी के प्रकारों में शामिल हैं, जैसे कि 

  1. कैल्शियम पथरी

दरअसल, कैल्शियम पथरी, किडनी की पथरी का सबसे आम प्रकार है। आम तौर पर, इस प्रकार की किडनी की पथरी का निर्माण अक्सर कैल्शियम ऑक्सलेट या फिर कैल्शियम फॉस्फेट बनने के कारण होता है। ज्यादातर, अपनी रोजाना की डाइट में पालक, चुकंदर या फिर मेवे जैसे पदार्थों को शामिल करने से ऑक्सलेट का निर्माण होता है। आपको बता दें कि बहुत सारे लोगों द्वारा विटामिन सी के सप्लीमेंट लगातार और ज्यादा मात्रा में लिए जाने पर भी कैल्शियम की पथरी होने की सम्भावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है। 

  1. यूरिक एसिड पथरी

दरअसल, गंभीर दस्त या फिर मलएब्जॉर्प्शन सिंड्रोम की वजह से भी लोगों को पथरी की समस्या हो सकती है। आम तौर पर, जो लोग यूरिक एसिड पथरी की समस्या से पीड़त होते हैं, असल में, उनको डॉक्टर के द्वारा, जानवरों से मिलने वाला प्रोटीन का सेवन कम करने की सलाह प्रदान की जाती है। ज्यादातर डायबिटीज के मरीजों को इस तरह की पथरी होने का जोखिम अधिक होता है। 

  1. स्ट्रुवाइट पथरी

स्ट्रुवाइट पथरी, यूरिनरी ट्रैक्ट में किसी भी तरह के संक्रमण होने की वजह से हो सकती है। आम तौर पर, इसकी सबसे बड़ी समस्या यह होती है, कि इस तरह की पथरी का निर्माण बहुत ही ज्यादा जल्दी हो जाता है। इसलिए, डॉक्टर द्वारा स्ट्रुवाइट पथरी से पीड़ित मरीजों को अपने भोजन में सोडियम की मात्रा कम करने और साथ ही प्रोसेस्ड फूड और पैकेट बंद फूड से विशेष रूप से परहेज करने की सलाह प्रदान की जाती है। 

  1. सिस्टीन पथरी

आम तौर पर, लोगों को इस प्रकार की पथरी बहुत ही कम होती है और साथ ही यह एक वंशानुगत विकार होती है। पथरी के इस प्रकार में एक व्यक्ति के यूरिन में काफी ज्यादा सिस्टीन का निर्माण होने लगता है। 

किडनी में पथरी होने के मुख्य कारण

  1. शरीर में पानी की कमी होना। 
  2. हाइपर पैराथायराइडिज्म, गाउट या मेटाबॉलिक विकार होना। 
  3. परिवार में किडनी में पथरी की समस्या का इतिहास होना। 

निष्कर्ष:

किडनी में पथरी की समस्या काफी ज्यादा दर्दनाक होती है। सर्जरी या फिर दवाओं के जरिये इस तरह की पथरी का किया जाता है। किडनी में पथरी चार प्रकार की हो सकती है, जैसे कि कैल्शियम पथरी, स्ट्रुवाइट पथरी, सिस्टीन पथरी और यूरिक एसिड पथरी आदि। शरीर में पानी की कमी होना, हाइपर पैराथायराइडिज्म, गाउट या मेटाबॉलिक विकार होना और किडनी में पथरी का पारिवारिक इतिहास होना यह सभी किडनी में पथरी होने के मुख्य कारणों में से एक हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और अगर आपको भी किडनी में किसी प्रकार की पथरी की समस्या है, और आप इसका इलाज करवाना चाहते हैं, तो आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी अस्पताल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Categories
Hindi Urologic Diseases Urologist

आखिर किन-किन स्थितिओं में पेशाब निकालने वाली नली की जरूरत पड़ती है? डॉक्टर से जाने

Loading

पेशाब निकालने वाली नली का इस्तेमाल आम तौर पर, कई तरह की मेडिकल स्थितिओं में किया जाता है। आपको बता दें, कि पेशाब निकालने वाली नली जिसको आम तौर पर, अंग्रेजी में यूरिनरी कैथेटर भी कहा जाता है। कहा जाता है, कि इसका निर्माण दो तरह के मटीरियल से होता है, पहिला मेडिकेटेड और दूसरा नॉन-मेडिकेटेड मटीरियल। आम तौर पर अगर इसे लंबे वक्त तक के लिए, इस्तेमाल में लाना हो, तो उस कैथेटर का इस्तेमाल किया जाता है, जो मेडिकेटेड मटीरियल से बना हुआ होता है। यह ब्लैडर में से पेशाब को बाहर की तरफ लेकर जाता है। यह सिलिकॉन के आधारित होता है। इस ट्यूब को पेशाब के रास्ते से ही और जरूरत के अनुसार ही मरीज के यूरेथ्रा में लगाया जाता है। इसकी जानकरी न होने की वजह से कई लोगों के मन में यह सवाल जरूर उठता है, कि आखिर पेशाब निकालने वाली नली की आवश्यकता क्यों पड़ती है और किन- किन स्थितिया में इस ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता है? तो आइये इस लेख के माध्यम से इस के डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

पेशाब निकालने वाली नली की जरूरत क्यों पड़ती है?

दरअसल, पेशाब निकालने वाली नली की जरूरत इस लिए और उन स्थितियों में पड़ती है, आम तौर पर, जब व्यक्ति खुद से पेशाब नहीं कर पाता है। ऐसा कई स्थितिओं में हो सकता है, जैसे कि 

  1. मूत्राशय में पथरी

आज के समय में मूत्राशय की पथरी की समस्या कई लोगों में देखी जा सकती है और मूत्राशय में पथरी बनने के कारण व्यक्ति को कई बार पेशाब करने में परेशानी हो सकती है। क्योंकि मूत्राशय में पथरी बनने के कारण व्यक्ति का मूत्र मार्ग ब्लॉक हो जाता है। ऐसी स्थिति होने पर व्यक्ति का स्वास्थ्य और भी ज्यादा खराब हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर जरूरत के अनुसार ही मूत्र कैथेटर को डालते हैं। इस पेशाब निकालने वाली नली को लगाकर व्यक्ति के मूत्राशय को समय-समय पर खाली किया जाता है। इसके अलावा, रोगी का उपचार भी जारी रखा जाता है, ताकि रोगी के मूत्राशय से पथरी को निकाला जा सके और मूत्रमार्ग को खाली किया जा सके।

  1. ब्लैडर कैंसर

ब्लैडर कैंसर या फिर ब्लैडर से जुड़ी अन्य समस्याओं के लिए एक पेशाब निकालने वाली नली का इस्तेमाल किया जाता है। आपको बता दें कि पेशाब निकालने वाली नली की सहयता से कीमोथेरेपी की दवाईयों को सीधे ब्लैडर में पहुंचाया जाता है। हालाँकि, आपको बता दें, कि इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब मूत्राशय कैंसर के लिए इंट्रावेसिकल इम्यूनोथेरेपी असफल हो जाती है। आम तौर पर, यह भी एक ब्लैडर कैंसर के इलाज का तरीका है। 

  1. मूत्राशय में कमजोरी

आम तौर पर, मूत्राशय की नर्व का डैमेज होना, सर्जरी या पेशाब करने में काफी ज्यादा परेशानी का सामना करना आदि, इस तरह के कई कारण है, जो मूत्राशय में कमजोरी पैदा करते हैं।दरअसल, इस तरह की स्थिति में मरीज को पेशाब निकालने वाली नली को लगाया जाता है और इसके साथ ही इस दौरान मरीज का इलाज भी चलता रहता है। आपको बता दें, कि जैसे जैसे मरीज ठीक होता जाता है, वैसे ही, पेशाब निकालने वाली नली को निकालने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है।हालांकि, आम तौर पर, पेशाब निकालने वाली नली को कब निकालना है और किस तरीके से निकलना है, यह सब कुछ डॉक्टर ही तय करते हैं।

निष्कर्ष: वेस तो, कई तरह की मेडिकल स्थितियों में पेशाब निकालने वाली नली का इस्तेमाल किया जाता है, पर दरअसल, जब कोई व्यक्ति खुद से पेशाब नहीं कर पाता है, या फिर उसको पेशाब करने में काफी ज्यादा परेशानीओं का सामना करना पड़ता है, तो इस तरह की स्थिति में पेशाब निकालने वाली नली की जरूरत पड़ती है। पेशाब निकालने वाली नली का इस्तेमाल, मूत्राशय में पथरी, ब्लैडर कैंसर और मूत्राशय में कमजोरी जैसी कई स्थितियों में किया जाता है। जो एक व्यक्ति के ब्लैडर में से पेशाब को बाहर की तरफ लेकर जाने में सहायता प्रदान करती है। अगर आप इसके बारे में और जानना चाहते हैं, या आपको भी पथरी की समस्या के कारण पेशाब करने में काफी दिक्कत होती है, और आप इसका इलाज करवाना चाहते हैं, तो आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी अस्पताल में जाकर आपकी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Categories
Laparoscopy Urologist

Four Different Benefits Of Laparoscopic Fibroid Removal Surgery

Loading

Living a normal life while having fibroids in the uterus is not child’s play. Such fibroids are initially tiny, but their size gradually increases with time if not treated right away. Most of the women suffer from uterine fibroids, which include dangerous symptoms such as heavy bleeding and intense pelvic pain. Along with this, women’s sexual life also gets affected due to uterine fibroids, as they feel severe pain while having any sexual activity with their partners. Due to such pain, it becomes difficult for them to have sexual pleasure in a satisfactory manner. Therefore, women suffering from uterine fibroids must get a proper treatment plan for it, which includes Laparoscopic Fibroid Removal surgery. There are many experienced surgeons performing this surgery with proper attention and care. This surgery holds numerous benefits which each woman should be aware of. Those benefits are discussed in this blog, so keep reading.

Different benefits of undergoing Laparoscopic Fibroid Removal surgery

As the name itself suggests, this surgery is done to remove the fibroids from the uterus in order to protect women from its harmful symptoms. This surgery is performed by experienced surgeons after analysing the woman’s physical health in order to achieve successful results. Go through the points mentioned below, highlighting the benefits of undergoing Laparoscopic Fibroid Removal surgery. 

  • Leaves minimal scars

Most of the women are afraid of scarring after the surgery, as it is related to their cosmetic concerns. However, they no longer have to worry about this, as Laparoscopic Fibroid Removal surgery includes minimal scarring. Women don’t have to suffer from the scars left behind after this surgery is completed. This is one of the major benefits of undergoing this surgery if one is suffering from uterine fibroids. 

  • Feels less pain and discomfort

Another great benefit of choosing this surgery for the removal of fibroids in the uterus includes feeling less pain and discomfort. Most of the women feel that there’s no intense abdominal pain, which is great for them. Due to less pain and discomfort after the surgery, women can continue doing their work like before. In some cases, most of the women are discharged on the same day of their surgery because of reduced pain and discomfort. 

  • Low risk of infection

During this surgery, the skilled surgeons take the proper preventive measures to protect the internal organs from coming into contact with the outside environment. When the internal organs are not exposed to the computer environment, then there’s less risk of any infection, hence contributing to the safe procedure. Therefore, women can go for this surgery to remove the fibroids without worrying about any complications or risks. 

  • Keep the uterus intact

Most of the women have some concerns regarding their uterine health before going for this surgery. Their concern is genuine and valid; the perfect answer to this concern is that this surgery is done while preserving the uterus. Fibroids are removed during this surgery with keen perfection without damaging the uterus. Therefore, it is beneficial for those women who wish to have a baby in the future. 

Conclusion

Uterine fibroids are a serious health concern which can affect your physical and sexual life if not treated on time. Fibroids can have a negative impact on your regular routine, hence making it difficult for you to continue your household chores normally. Therefore, it is necessary to get quick medical help from an experienced laparoscopic surgeon who can better understand your condition. With such a gentle approach towards the treatment of uterine fibroids, you can witness the different benefits of Laparoscopic Fibroid Removal surgery in a thorough manner. If you are looking for a skilled laparoscopic surgeon in Ludhiana, then your search ends with RG Stone Urology and Laparoscopy Hospital. We analyse your physical health first and then commence with this surgery for your healthy life ahead.

Categories
Kidney Diseases

Understanding Kidney Symptoms In Men And Women

Loading

Kidney disease is an increasing well-being distress around the world, and being aware of its early signs can make a major difference in treatment results. Your kidney achieves crucial tasks, filtering waste, balancing fluids, and preserving blood pressure. Unfortunately when they begin to lose function, symptoms may vary not only by stage but also by gender. RG Hospital Ludhiana can help you in understanding how kidney disease affects men and women differently and can help with early detection and better care.

Understanding Kidney Disease?

Recurrent kidney disease mostly happens when the kidneys steadily lose their ability to filter harmful and noxious from the body. Ordinary causes of diabetes include high blood pressure, recurrent urinary infections, and protracted use of painkillers. While many symptoms are the same in men and women, there are special signs that should not be ignored.

Normal Signs in Both Genders

  • Early kidney disease mostly goes unseen. As it progresses, both men and women may experience:
  • Fatigue or weakness
  • Swelling in the ankles, legs, or face
  • transformation in urine output or colour
  • Shortness of breath

Kidney Disease Symptoms in Men

  • Erectile Dysfunction: Bad kidney function can reduce blood flow and hormone levels 
  • Low Testosterone: Preventing kidney function can cause fatigue, low energy, and decreased muscle mass due to hormonal imbalance.
  • Urination condition: Men may experience weak urine flow or frequent urination, particularly at night.

Kidney Disease Symptoms in Women

  • Irregular Menstrual Cycles: Hormonal imbalances from kidney disease can disrupt menstruation and fertility.
  • Frequent UTIs: Women are more prone to urinary infections, which can lead to kidney damage if untreated.
  • Facial Puffiness: Swelling around the eyes or face is often more visible in women.

When to look for medical help

  • Once one has noticed the persistence of fatigue, foamy urine, swelling, or some blood in their urine, don’t hesitate to go for an early test, as this is to avoid it getting worse.

SafeguardYour Kidney’s Health

Both men and women can reduce kidney disease risk by maintaining a healthy lifestyle:

  • Determine blood pressure and blood sugar
  • Stay hydrated
  • Limit salt and processed foods
  • Avoid taking a lot of painkillers
  • Exercise regularly and quit smoking

Conclusion

Kidneys mostly start silently, but the gender quietly but gender-specific symptoms can provide valuable clues. Men may notice sexual well-being changes or urination issues, while women may experience menstrual rules or facial swelling. Early diagnosis and proper medical care are core to preserving kidney function and general well-being at RG Hospital Ludhiana.

Categories
Kidney Diseases

A Comprehensive Review Of Acute Kidney Injury

Loading

Acute Kidney Injury(AKI) means the sudden decline in kidney function over hours or days, causing accumulation of waste, fluid and electrolyte imbalance. Noticing the early symptoms of AKI is crucial for timely intervention, which can prevent damage and avoid progression to chronic kidney disease or end-stage renal failure. RG Stone Urology & Laparoscopy Hospital will assist you with guidance and understanding.

What Generates Acute Kidney Injury?

Acute injury may arise from a lot of underlying causes, some of them are as discussed below: 

  • Reduced blood flow to the kidney: Dehydration, low blood pressure, heart failure or bleeding.
  • Intrinsic kidney damage: Infections, inflammation, toxins, certain medications.
  • Obstruction in the urinary tract: Kidney stones, enlarged prostate, tumors that block urine flow.
  • Patients with diabetes, hypertension, heart disease, or those using nephrotoxic drugs are at higher risk.

Timeline of Symptom Progression

Understanding how AKI unfolds over time helps in early detection.

  • Day 1–2: Subtle Beginnings
  • Mild fatigue, weakness, or loss of appetite
  • Occasional nausea
  • Slightly reduced urine output (may seem normal)
  • Mild swelling in feet, ankles, or hands

These early signs tend to be vague and easily ignored, especially in patients with existing health issues.

  • Day 3–5:accelerating, Symptoms
  • Sharp decline in urine production (oliguria)
  • Urine becomes dark, foamy, or concentrated.
  • Shortness of breath due to fluid accumulation
  • Mental confusion or “brain fog”
  • Worsening swelling in limbs or face
  • Metallic taste in the mouth

At this stage, symptoms become more pronounced and prompt medical evaluation is critical.

  • Day 6–10: Critical stage
  • Severe electrolyte imbalance (especially potassium)
  • Muscle cramps, twitching
  • Irregular heartbeat or chest pain
  • Breathing difficulty due to pulmonary oedema
  • Seizures, dizziness, or loss of consciousness
  • High blood pressure and signs of uremia

If an acute kidney injury is not treated or is left untreated, this may cause a spiral or life-threatening complication.

How Can You Identify Acute Kidney Injury?

To confirm AKI, well-being offers generally use:

  • Blood tests: Elevated creatinine and BUN levels.
  • Urine analysis: Detecting protein, red blood cells, or infection.
  • Imaging: Ultrasound or CT scans to find obstructions or structural abnormalities
  • Physical exam: Assessing swelling, blood pressure, and hydration

Treatment Plans & Reversibility

Managing AKI involves:

  • Administering intravenous fluids to restore circulation
  • Adjusting or stopping nephrotoxic medications
  • Using diuretics if excess fluid is causing harm
  • Correcting electrolyte imbalances
  • Applying dialysis temporarily in severe cases

When treated early, AKI is often improvable. Delayed or inadequate care, however, can lead to chronic kidney disease, permanent renal damage, or enduring dialysis addiction

Prevention & Proactive Steps

To reduce AKI risk:

  • Stay well hydrated, mostly during illness or heat.
  • Use painkillers like NSAIDs cautiously.
  • Closely manage chronic conditions (diabetes, hypertension)
  • Monitor kidney function if on long‑term medications.
  • After surgeries or ICU stays, track urine output and kidney markers.
  • Seek prompt help for sudden swelling or decreased urination.

Conclusion

At RG Stone Urology & Laparoscopy Hospital in Ludhiana, we are dedicated to diagnosing and treating kidney conditions issues, including acute kidney injury, with the highest standards. Our versatile team of urologists, nephrologists, critical care specialists, and support staff gives advanced diagnostic services, dialysis support, and kidney well-being care. If you or a loved one experiences symptoms such as reduced urine output, swelling, nausea, or confusion, don’t delay; reach out for expert evaluation immediately.

Categories
Hernia Repair

Understand The Process Of Inguinal Hernia Surgery

Loading

Living life with an inguinal hernia can be challenging and exhausting for most men. The bulge in the pubic bone can interrupt their life by making them feel constant pain and discomfort throughout the day. Even the small activities, such as standing or coughing, can’t be done without feeling aching pain. Such pain can prohibit them from living a normal and healthy life. However, in order to get rid of such symptoms, one can engage with experienced surgeons who can help in performing inguinal hernia surgery to dissolve that bulge on the pubic bone of males. This surgery is the last but least option to get away from aching and burning sensations in the abdominal area due to an inguinal hernia. But before going for this surgery, one must ensure that they are already aware of the procedure to make their mind ready for it. To know about its procedure, read this blog in an attentive manner. 

How is inguinal hernia surgery done?

The procedure of inguinal hernia surgery is not so complex and is performed under keen attention and proper care. Usually, this surgery is done when the bulge is too large and the symptoms get worse with time. To get the knowledge about its procedure, go through the points mentioned below, highlighting how it is done. 

  • Use of anaesthesia

This is the crucial part that is performed before commencing the surgery. Anaesthesia is given to the patients so that they don’t feel any pain or discomfort during the surgery. When they don’t feel any kind of pain, then surgeons perform this surgery without any interruption. Some patients might be awake after having anaesthesia during the surgery, but some patients can fall asleep as well. In this way, surgeons use anaesthesia for the easy process of the surgery. 

  • Incisions are made

During inguinal surgery, two types of incisions are made to assess the real issue. Firstly, several incisions are made on the abdominal area to treat the real issue annually through special tools. The team of expert surgeons makes this incision to achieve the positive results. Secondly, a small incision is made to insert a video monitor and treat the bulge on the pubic bone. In this way, the surgeons have easy access to the herniated tissue and perform the required step with accuracy and precision.

  • Herniated tissue is accessed

After making an incision, the surgeons detect the herniated tissue and perform the required steps. They take back the herniated tissue into its original place, and this whole process is done in a gentle way. Afterwards, the surgeons make sure that the surrounding tissue is strengthened and is not weak in order to prevent the recurrence of the inguinal hernia. 

  • Incisions are closed

This is the final step of inguinal surgery in which the incisions that were made earlier are now closed with the help of mesh or sutures. This is done to ensure that there will be no recurrence of hernia, which can be a great obstacle in leading a normal life. Along with this, the healing process gets better after the incisions are closed, as it helps in making the tissues stronger. 

Conclusion

Before undergoing inguinal hernia surgery, you should be aware of the procedure so that you can prepare your mind accordingly. For this, make sure to engage with the skilled surgeon who can guide you thoroughly about the procedure of this surgery. The overall process of this surgery is not so complex and is even done within a few hours by general surgeons. If you are someone looking for the best hospital in Punjab, then get in contact with the experienced surgeons of RG Stone Urology and Laparoscopic Hospital for effective surgery. Our experts use the latest technology to perform the specific surgery while being careful.

Telephone Icon
whatsup-icon