510-L, Model Town Ludhiana – 141002 (India)

How Can Urinary Tract Infection (UTI) Be Treated?

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How Can Urinary Tract Infection (UTI) Be Treated?

What is Uterine tract infection (UTI)?

The most widely recognized UTI is a disease of the urinary bladder. Notwithstanding, any piece of a youngster’s urinary plot might become tainted, including the urinary bladder, urinary lot, ureter, or kidney. Uterine diseases are most common in young ladies. Most urinary parcel diseases (UTIs) in kids are brought about by microscopic organisms in the gut.

Bladder contamination is a disease of the urinary parcel;

The most widely recognized sign is torment or consuming when peeing. However, other side effects may include stomach torment, fever, and requiring successive pee.

If your youngster encounters any of these side effects, look for clinical assistance immediately. A pee test might be taken to recognize the disease.

 Treatment, for the most part, includes antimicrobials to treat the contamination and assuage side effects. To forestall bladder diseases, urge your kid to drink a lot of liquids, clear off from front to back after utilizing the washroom, and stay away from bubble showers and different items that can disturb the urethra.

Bladder disease in youngsters;

When youngsters have problems related to bladder, it can hurt and be very bad for them if they don’t get help. Parents should know how to tell if their young kids have bladder-related problems so they can go to the doctor fast. With the proper support, bladder-related issues can go away quickly.

Bladder contamination, a urinary lot disease (UTI), is typical for youngsters. Side effects of bladder contamination might include torment or consumption when a youngster pees, as well as fever. Infants and small kids might have various side effects from more established youngsters.

 You can take consultancy from experts to get to know more about this problem. Gallstones surgery in Ludhiana Is the most effective and affordable surgery in town.

To analyze bladder contamination;

Clinical experts will take a clinical history, play out an actual test, and request tests to investigate bladder contamination. Tests might include a pee test to search for microorganisms, white platelets, and disease indications.

If you are unaware of how to catch some symptoms before it gets too late, then you can contact Best Urologist in Ludhiana; they have served more than a thousand people till now, and their expertise in this field makes them one of the best.

UrologistsTreatment for bladder contamination ;

You want to take medication and talk with a specialist to make this issue disappear. Other than that, you can follow some standards, like drinking a ton of water can assist with encouraging you.

If the problem is horrible or comes back often, you may need more help. Most of the time, pee bag problems are common in kids and can be fixed with medicine. 

Conclusion;

So if you are suffering from any of these problems, look no further; contact one of the best Urologist in Ludhiana, RG Stone Urology & Laparoscopy Hospital.

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पुरुषों के अंडकोष में दर्द के क्या है कारण और कैसे सहायक है इसके उपचार !

 

अंडकोष या टेस्टिस किसे कहा जाता है ?

अंडकोष पुरुषों के अंदर पाया जाता है और इसी के बारे में ही हम आज के इस लेखन में बात करेंगे ;

  • अंडकोष यानी टेस्टिस पुरुषों में पायी जाने वाली एक थैली होती है। वही अंडकोष की थैली के अंदर दो अंडकोष होते हैं। अंडकोष लाखों छोटे-छोटे शुक्राणु कोशिकाएं पैदा करते हैं और उन्हें सुरक्षित रखते हैं। इसके अलावा ये टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन भी बनाते हैं, एक हार्मोन जिसके कारण पुरुषों में शुक्राणु पैदा होता है। 
  • अंडकोष यानी टेस्टिस से पुरुषों में मर्दों जैसे गुण यानि दाढ़ी, भारी आवाज, मर्दाना शरीर आदि चीजें भी विकसित होती हैं।

यदि आप अंडकोष के बारे में और अच्छे से जानना चाहते है, तो आरजी स्टोन यूरोलॉजी एन्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल से बेस्ट यूरोलॉजिस्ट पंजाब का चुनाव करे। 

 

पुरुषों के अंडकोष में दर्द के कारण क्या है ? 

इसके निम्न कारण है जिम्मेदार ;

 

  • चोट लगने की वजह से अंडकोष में दर्द की समस्या का होना। 

 

  • अंडकोष में कोई गांठ या सूजन और दर्द की समस्या होने पर सावधान हो जाए नहीं, तो ये टेस्टिकल कैंसर का कारण बन सकती है। 

 

  • एक्सपर्ट का कहना हैं कि एक नली जो अंडकोष के पीछे होती है, उसे हम अधिवृषण कहते हैं। उसमें चोट लगने, संक्रमण होने, सेक्स से उत्पन्न होने वाले संक्रमण से इसमें जलन होती है। इसके कारण इसमें सूजन की समस्या आ जाती है। इस वजह से अंडकोष में दर्द होता है।

 

  • वैरिकोसील एक गंभीर कारण है, इससे भी टेस्टिस में होता है दर्द। 

 

  • हाइड्रोसील की वजह से टेस्टिस में दर्द का होना। 

 

  • ऑर्काइटिस में इंफेक्शन होने से अंडकोष में दर्द का होना। 

 

अंडकोष में दर्द के कारणों के बारे में यदि आपने अच्छे से जान लिया है, तो बिना देर किए मूत्र रोग विशेषज्ञ लुधियाना से संपर्क करे। 

 

अंडकोष में दर्द का उपचार ?

 

अंडकोष में दर्द के उपचारो का वर्णन हम निम्न में कर रहे है ;

 

  • यदि आपके अंडकोष में दर्द है, तो आप सपोर्टर का इस्तेमाल कर सकते है। जोकि आपको दर्द से आराम दिलवाने में काफी सहायक माना जाता है। 

 

  • यदि आपके अंडकोष में ज्यादा दर्द है, तो बर्फ के टुकड़े से आप 10 से 15 मिनट की सिंकाई कर सकते है। 

 

  • गरम पानी में नहाने से भी आपको अंडकोष में होने वाले दर्द से राहत मिलेगा। 

 

  • यौन संबंध बनाते वक़्त जो बीमारियां उत्पन होती है, उससे खुद का बचाव करने के लिए कंडोम का इस्तेमाल करे। 

 

  • इन सभी सहायक उपचारो को ध्यान में रख कर आप अंडकोष में दर्द की समस्या से निजात पा सकते है। 

 

यदि आप अंडकोष में दर्द और सूजन की समस्या से परेशान है। तो उपरोक्त उपचारो को इस्तेमाल करने के साथ ही अगर आपकी सूजन और दर्द की समस्या ज्यादा बढ़ गई है, तो आप आरजी स्टोन यूरोलॉजी एन्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल से भी संपर्क कर सकते है इसके इलाज के लिए। 

निष्कर्ष :

ध्यान रहे यदि आपके अंडकोष में दर्द की समस्या ज्यादा बढ़ जाए, तो उपरोक्त उपचारो के बल पर ही न बैठे, बल्कि जल्दी से डॉक्टर के सम्पर्क में जाए। क्युकि सही समय पर इस समस्या पर ध्यान न दिया गया तो यह आपकी मौ-त का कारण भी बन सकती है। उम्मीद करते है कि आज के इस लेखन में आपको पता चल गया होगा, की अंडकोष में दर्द की समस्या होने पर हम क्या करे। 

 

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मूत्राशय कैंसर इलाज व क्या है, इसका सम्पूर्ण खर्च ?

जैसा कि हमे पता ही है की कैंसर की बीमारी काफी खतरनाक है, अगर ये बीमारी किसी को हो जाए तो व्यक्ति के समस्त जीवन पर विराम सा लग जाता है। ठीक वैसे ही अगर कैंसर व्यक्ति के प्राइवेट पार्ट्स पर हो जाए तो ये और भी खतरनाक साबित हो सकता है। इसके अलावा कैंसर या फिर मूत्राशय का कैंसर कैसे व्यक्ति के लिए खतरनाक साबित हो सकता है, हम इसके बारे में बात करेंगे ;

मूत्राशय का कैंसर क्या है ?

ये बहुत ही गंभीर समस्या है और ये क्या है इसके बारे में हम निम्न में बात करेंगे;

  • मूत्राशय का कैंसर मूत्राशय के ऊतको से उतपन्न होने वाली एक बहुत ही गंभीर बीमारी हैं। यह एक ऐसी बीमारी हैं, जिसमे कोशिकाये असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं व शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैलने की क्षमता रखती हैं।

मूत्राशय में कैंसर के मरीज़ कितने साल तक जीवित रह सकते है ?

  • मूत्राशय के कैंसर के लिए 5 साल की सापेक्ष जीवित रहने की दर 71% है।

  • मूत्राशय का कैंसर हो या कोई अन्य कैंसर इसके मरीज़ की लास्ट स्टेज 5 साल है।

मूत्राशय के कैंसर का इलाज क्या है ?

मूत्राशय के कैंसर का इलाज व्यक्ति करवा कर ठीक हो सकता है। पर इसके लिए उसे समय पर यूरोलॉजिस्ट लुधियाना के सम्पर्क में आ जाना चाहिए और अपनी बीमारी पर खास ध्यान रखना चाहिए।

मूत्राशय कैंसर के इलाज में कितना खर्च पड़ता है ?

  • आपको अपनी बीमारी के इलाज के लिए हर हॉस्पिटल की सही से जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।

  • इसके अलावा स्थिति कितनी गंभीर है और आपके इलाज के लिए किस तरह का उपचार सही होगा। इन सबको देखते हुए डॉक्टर आपको सही से बतायंगे की कौन सा इलाज आपको करवाना चाहिए।

  • तो वही बात करे इस समस्या की औसत लागत की तो ये 20,000 से शुरू होती है, जो की कीमोथेरेपी के लिए होती है। अगर आपकी स्थिति ज्यादा गंभीर होगी तो डॉक्टर आप पर कोई दूसरी सर्जरी का प्रयोग भी कर सकते है ।

कैंसर का इलाज कैसे किया जाता है ?

कैंसर का इलाज अनुभवी कैंसर डॉक्टर के द्वारा निम्न तरीके से किया जाता है ;

  • कैंसर का इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर मरीज का चिकित्सा का इतिहास कैसा है, उसे देखते है।

  • इसके अलावा डॉक्टर मरीज़ का यूरिन टेस्ट, इमेजिंग स्कैन, सिस्टोस्कॉपी, बायोप्सी, इंट्रानर्वस यूरोग्राम की रिपोर्ट को अच्छे से देखने के बाद ही इलाज शुरू करते है।

  • फिर डॉक्टर मूत्राशय कैंसर के इलाज के लिए कैस्टेक्टॉमी सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी करके मरीज़ को आराम दिलवाते है। लेकिन ध्यान रहे आराम व्यक्ति को तभी मिल सकता है जब उसके कैंसर की अभी शुरुआत ही हुई हो।

  • इसके अलावा आपको मूत्राशय कैंसर है, तो इन सभी सर्जरी में से कौनसी सर्जरी आपके लिए सही होगी इसके बारे में डॉक्टर से जरूर पूछे।

सुझाव :

कैंसर की बीमारी काफी खतरनाक है। लेकिन समय से पहले ही इसके बारे में पता चल जाए तो इसके खरते को हम काफी हद तक कम कर सकते है। इसके अलावा अगर आप कैंसर के इलाज के लिए उपरोक्त उपचार का चयन करना चाहते है तो किसी अच्छे कैंसर हॉस्पिटल का चयन करे या फिर आप कैंसर के बारे में विशेष जानकारी हासिल करने के लिए आर जी हॉस्पिटल से भी सम्पर्क कर सकते है।

निष्कर्ष :

अगर आप भी कैंसर की बीमारी से निजात पाना चाहते है, तो उपरोक्त बातो का खास ध्यान रखे।

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A Comprehensive Guide To Understand Everything About Urinary Retention

The Human bladder is like a bag to collect the waste of the human body in the form of urine and when it is full a person needs to urinate. Passing of urine is important because in urine the waste of human body is present such as after filtration of wastewater, sodium ions, potassium, calcium nitrogenous waste like urea and ammonia and is important to pass the urine from the body and the process is called urination. 

 Definition of urinary retention 

Urinary retention is a problem in which patients feel discomfort while passing the urine and they are not able to empty their bladder and the main cause of this problem is blockages, nerve issues and some medicational effects. It is of two types acute and chronic. In both conditions patients should consult the best urologist of ludhiana

Symptoms of acute and chronic retention 

Acute urinary retention : In this retention patient feels sudden and often pain but unable to urinate after having the full bladder with urine. 

Chronic urinary retention : The patient with chronic urinary retention is able to pass the urine but not able to empty the bladder and in this retention patients are unable to feel any symptoms .

Causes of acute and chronic retention 

 Cause of acute retention : The main cause of this retention is blockage and narrowing in the urethra and bladder neck, the urethral sphincter is to close and urinary tract stones which are also known as calculi. Constipation can also cause acute retention through compression on the urethra 

Causes of chronic retention : In the chronic retention the cause can be categorized as 

  1. Obstructive: obstructive retention causes benign prostatic hyperplasia in male, and organ prolapse in females and urethral strictures in both genders. 
  2. Infectious or inflammatory : This retention is vary with the cause of injury and the power of the body to repair it 
  3. Neurologic : This retention is caused by defective innervation. 

How to diagnose it 

For the diagnosis of the cause of urinary retention, urologists use various information such as medical history, physical exam of the patient, tests of urine measurements, laboratory tests, scans,urodynamic tests and cystoscopy. By the reports of these tests urologists find the main cause of the problem. 

Treatment of urinary retention

For  acute retention: Doctors insert the catheter to drain the urine quickly also they use local anesthesia to prevent the patient from feeling discomfort. If a catheter does not work and can not be used in those cases, professionalists use suprapubic catheters for the patients. 

for chronic urinary retention: There are various methods to cure the chronic retention. 

  1. Catheterization : Catheters are used for draining out the urine from the bladder but it is not a long term solution for chronic retention because frequent use of catheters cause infection in the body because of bacteria. 
  2. Urethral dilation and stents: In this method small tubes are inserted into the urethra which helps to open the urethral stricture. It is a safe method.
  3. Medication : Urologists suggest some medicines to help in the treatment of retention.
  4. Surgery: if the other methods do not work then doctors suggest surgery for treating the urinary retention. 

Preventions 

Humans can prevent themselves from urinary retention by keeping their diet proper and by doing some exercise and yoga related to the strength of the internal organs.

Urologists also said that the clue about gallstones can be given by urine. The urine is darker then the normal when there is blockage in the bile duct. If you are opting for Gallstones surgery in Ludhiana, choose RG Stone Urology & Laparoscopy Hospital.

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इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC) या दर्दनाक मूत्राशय सिंड्रोम के क्या है – लक्षण, कारण और उपचार के तरीके?

इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC), जिसे दर्दनाक मूत्राशय सिंड्रोम के रूप में भी जाना जाता है, जोकि एक पुरानी मूत्र संबंधी स्थिति है जो मूत्राशय की दीवारों को प्रभावित करके व्यक्ति के लिए काफी समस्या खड़ी कर देते है। जिससे सूजन और असुविधा की समस्या उत्पन्न होती है। वहीं यह स्थिति कई प्रकार के लक्षण पैदा कर सकती है जो दैनिक जीवन को काफी हद्द तक प्रभावित करते है। तो आइए इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस के प्रकार, लक्षण और इससे बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से जानते है ;

इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस (IC) क्या है ?

  • इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस (IC) को आमतौर पर आपके मूत्राशय में उत्पन्न होने वाली समस्या के रूप में जाना जाता है, वहीं मूत्राशय की बात करें तो ये गुर्दे द्वारा फ़िल्टर किए जाने के बाद मूत्र को संग्रहीत करता है। और इसका विस्तार तब तक होता रहता है जब तक कि यह पूर्ण न हो जाए। यह एक पुरानी, ​​लंबे समय तक चलने वाली मूत्र स्थिति है जो मुख्य रूप से दर्दनाक पेशाब की विशेषता है। 
  • इसे दर्दनाक मूत्राशय सिंड्रोम के रूप में भी जाना जाता है। और इसमें दर्द हल्के से मध्यम से गंभीर तक भिन्न हो सकते है। 
  • वहीं यह स्थिति पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक प्रभावित करती है और किसी की जीवन शैली पर दीर्घकालिक प्रभाव डालती है। 

इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC) के क्या कारण है ?

  • मूत्राशय में जलन के एक स्रोत का उत्पन्न होना।
  • शरीर में सूजन जिसके कारण कुछ अन्य पदार्थों की रिहाई होती है, जो लक्षणों का एक प्रमुख कारण बनती है।
  • मूत्राशय की आपूर्ति करने वाली नसों में समस्या दर्द का कारण बन सकती है।
  • तनाव, चिंता या कोई भावनात्मक विकार का सामने करने के कारण ये समस्या उत्पन्न होती है। 
  • मासिक धर्म होने के कारण भी ये समस्या उत्पन्न हो सकती है। 
  • मूत्र पथ के संक्रमण से अगर आपके परिवार में कोई सामना कर रहा है तो, घर का दूसरा व्यक्ति जरूर इस समस्या से ग्रस्त होगा।  
  • लंबे समय तक मूत्र को पकड़े रहना या लगातार मूत्र आने के कारण। 
  • कुछ एलर्जी भी इसके कारण में शामिल हो सकते है। 
  • मौसम में बार-बार बदलाव के कारण भी आप इस तरह की समस्या का सामना कर सकते है। 
  • लंबे समय तक लगातार खड़े होने के कारण भी आपको इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

मूत्र पथ में किसी भी तरह की समस्या अगर नज़र आए तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट यूरोलॉजिस्ट के पास आना चाहिए।

इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC) के प्रकार क्या है ?

इसके प्रकार को चार भागों में बाटा गया है, जैसे –

  • सबसे पहले अल्सरेटिव आईसी, की बात करें तो इसमें मूत्राशय की दीवारों पर अल्सर (छाले) होते है, जिससे दर्द और असुविधा होती है।
  • फिर गैर-अल्सरेटिव आईसी, में व्यक्तियों को अल्सर के बिना मूत्राशय में सूजन का अनुभव होता है।
  • हनर अल्सर के साथ इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस, में मूत्राशय की दीवार पर सूजन और क्षति के विशिष्ट क्षेत्र है, जो अक्सर गंभीर दर्द का कारण बनते है।
  • मूत्राशय दर्द सिंड्रोम (बीपीएस), शब्द कभी-कभी आईसी के साथ परस्पर उपयोग किया जाता है और क्रोनिक मूत्राशय दर्द और असुविधा को संदर्भित करते है।

इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC) के दौरान व्यक्ति किस तरह के लक्षण का अनुभव करते है ?

  • जल्दी पेशाब का आना। 
  • आग्रह या पेशाब करने की अचानक और तीव्र इच्छा का अनुभव होना जिसे नियंत्रित करना कठिन हो सकता है।
  • मूत्र त्याग करने में असहनीय दर्द का सामना करना। 
  • महिलाओं को योनि और गुदा के बीच दर्द का अनुभव होना और पुरुषों में अंडकोश और गुदा के बीच दर्द का अनुभव होना।  
  • लगातार पेशाब करने की इच्छा का होना। 
  • लगातार पेशाब का आना। 
  • मूत्राशय भर जाने पर दर्द का होना। 
  • संभोग के दौरान तेज दर्द का अनुभव होना। 

अगर आपको मूत्राशय में गंभीर जलन के कारण पथरी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो इससे बचाव के लिए आपको पित्त पथरी की सर्जरी का चयन करना चाहिए।

इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC) के मरीज को किन खाने की चीजों का खास ध्यान रखना चाहिए !

  • अगर आप इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC) रोग से पीड़ित है, तो ऐसे में आपको अपने सेहत के साथ-साथ अपने खान-पान का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, क्युकि इस समस्या में अगर आप कुछ खाने की चीजों से परहेज नहीं करते तो ये आपके लक्षण को और बढ़ा सकते है। 
  • वहीं खाने की चीजों की बात करें तो IC के मरीज को कॉफी, सोडा, शराब, टमाटर, गर्म और मसालेदार भोजन, चॉकलेट, कैफीनयुक्त पेय पदार्थ, खट्टे रस और पेय, एमएसजी, और उच्च एसिड खाद्य पदार्थ से दुरी बनाकर रखना चाहिए, नहीं तो ये चंद खाने की चीजे आपकी जान की दुश्मन बन सकती है।

इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC) का इलाज कैसे किया जाता है?

  • जीवन शैली में परिवर्तन लाकर आप इस तरह की समस्या से खुद का बचाव कर सकते है। 
  • आहार में परिवर्तन लाकर भी आप इस तरह की समस्या से खुद का बचाव कर सकते है।
  • मूत्राशय का प्रशिक्षण करवाते रहना समय-समय पर।  
  • ढीले-ढाले कपड़े पहने ताकि आपको परेशानी न हो। 
  • तनाव से बचे। 
  • धूम्रपान को छोड़ने की कोशिश करें। 
  • रोजाना व्यायाम करें। 
  • वहीं डॉक्टर इसका इलाज मौखिक दवाएं देकर भी करते है अगर लक्षण ज्यादा गंभीर न हो तो। 
  • दवाइयों में आपको गैर-स्टेरायडल विरोधी भड़काऊ दवाएं (NSAIDS)।
  • ट्राईसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट दवाई। 
  • एंटीथिस्टेमाइंस। 
  • पेंटोसन पॉलीसल्फेट सोडियम। 
  • वहीं अगर दवाई से कुछ फ़ायदा न हो तो सर्जिकल विकल्प का सहारा लिया जाता है, जैसे –
  • पूर्णता और इसमें व्यक्ति की समस्या का पूर्ण रूप से खात्मा किया जाता है।  
  • मूत्राशय वृद्धि को रोकने के लिए सर्जरी का चयन करना।  

आप इस सर्जरी को चाहे तो वाजिफ दाम में आरजी स्टोन यूरोलॉजी और लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल से भी करवा सकते है, वहीं इस हॉस्पिटल में डॉक्टर पहले मरीज के लक्षणों को जानने के बाद उसके उपचार की शुरुआत करते है, और कई बार तो इस समस्या को जानने के लिए डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट करवाने को भी कह सकते है।

 

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Things to know about urinary health for transgenders

Hormone therapy is a beneficial therapy for those who suffer from transgender conditions. Hormone therapy helps to find gender identity. Hormone therapy has positive physical and psychological effects on the transitioning individual and is considered a treatment for many patients. After knowing your gender, you can get surgery to convert to a self-known gender. You can opt for Transgender Surgery.

Transgender Urinary Health and how hormone therapy affects the Urinary tract

Urinary health for trans male

A trans male assigned female at birth is mostly using high levels of testosterone medication for urinary health. There are several side effects to testosterone medication when you get medication treatment that blocks the ovaries’ function. Side effects include vaginal dryness, pelvic pain, and increased urinary tract infection frequency after medication treatment. 

Some symptoms do not disappear, but some medication help to reduce those side effects, such as 

Stay hydrated 

More drinking water helps to moisturize your body and helps to hydrate your body. Drinking helps to solve problems such as vaginal dryness and decreased urine tract infections.

Do not use perfume. 

Using soap, bubble baths, and powder is the cause of vaginal dryness. 

Probiotics

Many probiotics help to reduce vaginal dryness. First, ask your healthcare doctor to guide you on probiotics. 

Utilize natural lubricant 

Aloe vera gel, coconut oil, and vitamin D, this all-natural lubricant helps rescue dryness.

If you suffer from pelvic pain, pelvic floor therapy helps reduce the pain. If you do regular treatment, this therapy helps to reduce other problems such as intercourse, sexual dysfunction, and other issues.

Urinary health for trans female

This baby was born female, but the doctor assigned male. Most of the use for high levels of estradiol medication with anti-androgen for urinary health. This procedure affects a trans-female reproductive system: pelvic growth and a relaxed pelvic floor. Pelvic floor physical therapy improves the symptoms. When you adopt estradiol and anti-androgen medication, you begin to have prostate issues. Estoril treatment helps to decrease the level of BPH. When you start transgender hormone therapy, then you have prostate cancer. It is common after treatment. 

Transgender surgery 

When you want transgender surgery, there are various surgical techniques to use for transition to your self identify gender. Using surgical procedures has many side effects. Before surgery, you should ask your healthcare doctor for the proper medical procedure information.  

Trans male surgery 

Trans Male surgery has many surgical procedures, such as bottom surgery and penis.

Phalloplasty

Phalloplasty surgery is surgery for urine. That procedure allows urination through the penis. 

Metoidioplasty 

Metoidioplasty surgery is different from phalloplasty surgery. In which surgery removes a vagina. 

Trans female surgery

Trans Female surgery more than shortens the uterine. It has some side effects, such as they suffer urinary tract infections after surgery. After surgery, neurogenic bladder. After surgery, you suffer from urination issues. The prostate relocated to neovagina. If you have any queries regarding surgery, then you ask your doctor. They will provide you with information.

Transgender surgery includes  various surgical procedures. One is that plastic surgery helps to give a shape and size according to self-known gender. Cosmetic Surgery helps remove a scar through surgical treatment. 

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महिलाओं में पेशाब रुकने का क्या है कारण और बचाव के तरीके !

लोगों के लिए पेशाब का रुकना काफी परेशानी खड़ी कर सकता है और ये समस्या महिला और पुरुष दोनों में पाई जाती है। वही पेशाब रुकने जैसी समस्या की बात करें, तो ये गलत खान-पान और अपनी दिनचर्या का अच्छे से ध्यान न रखने की वजह से होती है, वही ये समस्या महिलाओं में किन कारणों की वजह से उत्पन्न होती है इसके बारे में आज के आर्टिकल में चर्चा करेंगे ;

 

महिलाओं में पेशाब रुकने की वजह से उन्हें निम्न तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है, जैसे ;

 

  • उनमे किडनी फेलियर का खतरा बढ़ सकता है।
  • मूत्र मार्ग में गंभीर समस्याओं का खतरा हो सकता है।
  • नसों को नुकसान हो सकता है।
  • मूत्राशय से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

 

महिलाओं में पेशाब रुकने के कारण क्या है ?

  • यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन।
  • मूत्राशय से जुड़ी बीमारियां।
  • नसों का डैमेज होना।
  • किसी सर्जरी की वजह से।
  • पेशाब की नली में इन्फेक्शन का होना। 
  • प्रोस्टेट के बढ़ने से भी ये समस्या होती है।
  • खानपान में कमी की वजह से भी ये समस्या देखने को मिलती है।
  • किडनी स्टोन की समस्या भी इसका एक महत्वपूर्ण कारण है।
  • कैंसर या ट्यूमर की वजह से भी महिलाओं में पेशाब रुकने की समस्या उत्पन्न होती है।

यदि यूरिनरी ट्रैक्ट में इन्फेक्शन की वजह से महिलाओं में पेशाब रुकता है तो इसके लिए आप लुधियाना में यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें।

महिलाओं में पेशाब रुकने के लक्षण क्या है ?

  • सबसे पहले उन्हें पेशाब करने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
  • पेशाब का बंद होना भी उनके एक लक्षण में शामिल है।
  • तेज बुखार की समस्या का सामना करना।
  • शरीर का कांपना।
  • ठंड लगने जैसी समस्या का सामना करना।
  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द का अनुभव होना।
  • उल्टी की समस्या।

यदि महिलाओं के गुर्दे में पथरी की वजह से उनमें पेंशन रुकने के लक्षण नज़र आ रहें है तो इससे बचाव के लिए महिलाओं को पंजाब में गुर्दे की पथरी के बेस्ट डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

महिलाओं में पेशाब रुकने की समस्या का इलाज क्या है !

  • अगर आप भी पेशाब रुकने जैसी समस्या का सामना कर रहें है तो इसके लिए आपको एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। वही सबसे पहले इस समस्या में डॉक्टर आपकी जांच करेंगे और उसके बाद इस समस्या में इलाज के लिए दवाओं के सेवन की सलाह भी दे सकते है। 
  • इसके अलावा अगर संक्रमण या अन्य किसी वजह से ये समस्या हो रही है तो एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा गंभीर मामलों में सर्जरी भी की जा सकती है।

पेशाब रुकने की समस्या से निजात दिलवाने के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

अगर आप भी पेशाब रुकने की समस्या का सामना कर रहें है तो इससे बचाव के लिए आपको अनुभवी डॉक्टर के संपर्क में आना चाहिए और साथ ही इसके इलाज के लिए आपको आरजी स्टोन यूरोलॉजी एन्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। इसके अलावा ध्यान रहें महिलाओं को पेशाब रुकने के लक्षणों पर खास ध्यान रखना चाहिए, ताकि समस्या और ज्यादा न बढ़ सकें।

 

निष्कर्ष :

पेशाब रुकने की समस्या कोई गंभीर बात तो नहीं है, क्युकी ये समस्या अपने आप होती है और अपने आप ही ठीक भी हो जाती है। लेकिन इसके लक्षण अगर आपमें गंभीर नज़र आने लगें तो इससे बचाव के लिए आपको जल्द डॉक्टर के संपर्क में आना चाहिए।

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बार-बार पेशाब आने के क्या है कारण, लक्षण और इलाज ?

पेशाब का एक समय सीमा से ज्यादा आना किसी परेशानी से कम नहीं है। यदि आपको भी दिन में 8 से 10 बार पेशाब करने जाना पड़ता है, तो इस समस्या को हल्के में न ले बल्कि समय रहते डॉक्टर का चयन करें और साथ ही हम आपको बताएगे की बारबार पेशाब आने के क्या है लक्षण, कारण और उपाय ;

बारबार पेशाब आने के कारण क्या है ?

  • प्रोस्टेट का बढ़ना।

  • किडनी या यूरेट्रिक स्टोन का होना।

  • मूत्रमार्ग में इन्फेक्शन का होना।

  • डायबिटीज की समस्या।

  • अतिसक्रिय ब्लैडर का होना।

  • गर्भावस्था में बारबार मूत्र का आना।

बारबार पेशाब का आना क्या है ?

  • बारबार पेशाब अधिक मात्रा में पानी या अन्य तरल पदार्थ पीने से हो सकता है। परन्तु जब इन सभी कारणों की ग़ैरमौजूदगी में यह होता है, तब यह किसी गंभीर परेशानी का संकेत हो सकता है। यदि आप भी बारबार पेशाब आने की स्थिति से परेशान है तो इसके लिए आपको बेस्ट यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करना चाहिए।

  • कुछ अनुभवी डॉक्टरों का कहना है कि इंसान दिन में लगभग 4 से 7 बार पेशाब करता है जिससे वो कुलमिलाकर केवल 2 से 3 लीटर पेशाब शरीर से बाहर निकाल देता है। परन्तु व्यक्ति दिन में 6 या 8 से अधिक बार पेशाब करने लगे और हर बार सामान्य से ज़्यादा पेशाब निकले तो उस स्तिथि में हम कह सकते हैं कि वह बारबार पेशाब आने की परेशानी से जूझ रहा है।

लक्षण क्या है बारबार पेशाब आने के ?

  • पेशाब को बिलकुल न रोक पाना।

  • पेशाब में खून का आना।

  • पेशाब करते वक़्त जलन या दर्द का महसूस होना।

  • पेट के निचले हिस्से और बगल में दर्द का होना।

  • पूरी तरह से ब्लैडर को खाली करने में नाकामयाब होना।

  • अचानक से पेशाब करने की तीव्र इच्छा का आना।

यदि अनेक बार पेशाब आने के लक्षण आपमें भी ऐसे ही दिख रहे है तो लुधियाना में पित्त पथरी की सर्जरी करवाने की सलाह डॉक्टर से जरूर ले।

बारबार पेशाब आने से निजात पाने का इलाज क्या है ?

  • यदि आपको अनेक बार पेशाब आने की वजह डायबिटीज है, तो “इंसुलिन थेरेपी” एक बेहतरीन इलाज है।

  • डाईयुरेटिक्स” का इलाज भी बारबार मूत्र आने की समस्या से निजात दिलवाता है।

  • अनेक बार मूत्र का आना मूत्राशय कैंसर का कारण भी हो सकता है, जिसके लिए “कीमोथेरेपी” एक बेहतरीन इलाज माना जाता है।

  • बारबार मूत्र आने की समस्या को रोकने के लिए कई बार डॉक्टर अन्य दवाइयां भी देते है।

  • इसके अलावा कुछ “घरेलू उपाय” भी बारबार मूत्र आने की समस्या को रोक सकते है जैसेकेले का सेवन, मेथी की पत्तियां, तिल का सेवन, चने का सेवन आदि।

यदि आप अनेक बार मूत्र आने की समस्या से परेशान है, तो इसके उपचार के लिए उपरोक्त बातों का खास ध्यान रखें और यदि आपने इसका इलाज सर्जरी के माद्यम से करवाना है तो इसके लिए आप आरजी स्टोन यूरोलॉजी एन्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल का चयन करें।

निष्कर्ष :

समस्या कोई भी हो अगर उसके बारे में विस्तार से जानके हम उसका इलाज करवाते है, तो हमे जल्दी फर्क पड़ने लगता है। ठीक उसी प्रकार बारबार पेशाब आने की समस्या पर भी ये बात लागु होती है। तो आप अगर चाहते है की आपको अनेक बार आने वाले मूत्राशय की समस्या से निजात मिले तो इसके लिए आपको उपरोक्त बातो का खास ध्यान रखना है और साथ ही किसी भी तरह की दवाई को प्रयोग में लाने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह ले।

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The Hidden Dangers of Holding In Your Urine

We often come across with the situation where we must retain urine for longer periods of time than we would choose. Whether it’s because of a busy schedule or the absence of a bathroom, holding in urine can appear to be a minor inconvenience. However, it is However to perceive that there are hidden risks implied with this way of behaving. In this blog post, we’ll talk about the dangers and consequences of holding your urine, highlighting how important it is to see a top urologist in Ludhiana as soon as possible. Let’s dive in!

  1. Understanding the Urinary System:

    Holding urine affects the urinary system’s natural flow and function. When urine is held in the bladder for an extended period, it puts pressure on the bladder and can cause bladder distension. This can gradually weaken the bladder muscles, impairing their ability to contract and empty appropriately.


  2. Risk of Urinary Tract Infections (UTIs):

    Holding in urine for an extended time increases the chance of acquiring urinary tract infections (UTIs). Urine retention in the bladder produces a breeding habitat for bacteria to proliferate, increasing the probability of infection.

  3. Urinary Incontinence:

    Holding in urine regularly can weaken the bladder muscles over time. This deterioration might result in urinary incontinence, a disorder defined by involuntary urine leaking. Urinary incontinence can reduce a person’s quality of life by generating humiliation, mental anguish, and social limitations. Consult the best urologist for appropriate diagnosis and treatment solutions for this ailment.

  4. Bladder and Kidney Damage:

    The bladder is intended to hold a set volume of urine. Holding in urine frequently can cause bladder distension, which causes the bladder to be stretched beyond its capacity. This distension might weaken the bladder muscles and impair the bladder’s capacity to drain completely. It can also induce bladder rupture in severe situations.

  5. Increased Risk of Gallstones:

    While it may appear unrelated, holding in urine can increase the risk of gallstones indirectly. Through the bile ducts, the urinary system and the gallbladder are linked. The concentration of waste materials in the body rises when urine is held. This can change the makeup of bile, causing gallstones to develop. Gallstones can cause discomfort, inflammation, and digestive problems, often requiring gallstones surgery in Ludhiana or other medical procedures.

Conclusion

It is critical to recognize and manage the hidden hazards of urine retention. If left untreated, the risk of urinary tract infections (UTIs) increases considerably, causing discomfort and serious consequences. Furthermore, the bladder and kidneys may be harmed over time, affecting their performance and general urine health. If you have recurrent episodes of holding in urine or other symptoms, it is critical to emphasize regular bathroom breaks and get medical assistance from a urologist. Maintaining your urinary health is critical to your overall health and enjoyment of life. If you have repeated episodes of retaining your urine or if you develop any other symptoms, see the best urologist in Ludhiana at RG Hospital. Prompt action can assist to avoid problems and maintain excellent urinary health.

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Urinary Problems

Common Signs & Symptoms of Urinary Disorders

Are you aware of your Urinary System completely? Well, most of you know that our Urinary system helps release toxins and waste from our body through urine.

Instead, most people know nothing about it, along with the urinary disorders they might be facing and noticing the symptoms. Later they will be looking for the “Best Urologist in Ludhiana‘ or Kidney Hospitals to get their treatment done.

We specifically believe in “Precaution is better than cure.” Hence, we are going to talk about some of the common signs and symptoms of urinary disorders, with the help of which you can learn more about your urinary system and cure the problems linked with it.

List of Urinary Disorders Commonly Faced

Before talking about Urinary disorders, let us look at how the urinary system in our body works.

The first and most crucial section of our Urinary system is the upper urinary tract, which consists of our kidneys, which help clean blood, and all the waste collected is converted into the form of urine in the same section.

Urine then moves to the Urinary bladder through the ureters; the Urinary bladder is the storage system of urine.

Once the muscles start contracting, the urine is released from our body with the help of the last part of the lower urinary tract, which is the urethra.

If you are facing any urinary disorder, it means there is some problem in your urinary tract.

Some of the urinary disorders are as follows:

  • Phimosis
  • Kidney Stone
  • Urinary Bladder Stone
  • Balanitis
  • Urinary Tract Infection (UTI)

Common Signs & Symptoms of Urinary Disorders

Let us look at some of the general symptoms & signs of Urinary disorders. If you are facing any of the mentioned-below signs, you should get in touch with a Urologist as early as possible.

  • If your Urine color is dark, brown, or red, this is a serious sign of an enlarged prostate or tumor.
  • When you face pain while passing urine, you either have a urinary tract infection (for women) or any prostate condition (for men).
  • If you have a consistent urge to urinate, this means there are urinary problems affecting your bladder functioning.
  • When your body cannot control the urinary bladder or pass urine when you cough or sneeze, you face urinary incontinence.
  • If you can notice a foul smell from your urine, this must be because of some medications you took or bladder inflammation.
  • When you are facing sharp pain in the back and side of the last rib, there is a high chance of having some problem with your urinary bladder.

Conclusion:

However, with this post, you must have a good enough idea of the most common signs and symptoms of urinary problems.

You can contact the best Kidney Hospital in Ludhiana, RG Hospital, to eliminate any urinary or kidney disorder.

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