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हर्निया क्या होती है और इसके लक्षण कौन-कौन से है ?

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हर्निया क्या होती है और इसके लक्षण कौन-कौन से है ?

हर्निया आमतौर पर पेट या फिर कमर में हो सकता  है | जब पेट के अंदरूनी कमजोर भाग में छेद करके एक अंग उभरकर बहार आता है तो उसे हर्निया कहा जाता है | यह समस्या जन्मजात से भी हो सकती है या फिर समय के साथ यह पेट की कमजोर दीवार में या परत में विकसित हो सकती है | हर्निया के उभरने से उसमे मौजूद रक्तवाहिकाओं पर काफी दबाव पड़ता है | कुछ परिस्थितियां ऐसी भी होती है जिससे खून की सप्लाई रुक जाती है और यह आपातकालीन स्थिति भी बन जाती है क्योंकि ऊतक को खून के मध्याम से मिलने वाली ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है | 

 

हर्निया की पहचान और लक्षण कौन से है ? 

हर्निया का एक आम लक्षण है प्रभावित क्षेत्र में एक उभार या गांठ बन जाना |  उदाहरण के तौर पर इनगुइनल हर्निया जो आपके जांघ की हड्डी के तरफ एक गांठ दिख सकती है, जहाँ आपके जननांग क्षेत्र और जांघ का मिलाप होता है | जान आप लेटते हो तब आपको यह लगता है की यह गांठ गायब हो गया है और जब वही आप खड़े होते हो, झुकते या खांसते हो तो स्पर्श करने पर यह अधिक महसूस होती ह और इसके आस-पास के क्षेत्र में दर्द भी होने लगता है | 

कई मामले ऐसे भी होते है जिसमे हर्निया के कोई लक्षण दिखाई नहीं देता है | कई बार यह भी होता है की जब आप एक नियमित शारीरिक या असंबधित मेडिकल परीक्षण करवाते हो तब आपको इस समस्या के बारे पता लगता है |  

 

हर्निया होने के कारण क्या है ? 

आमतौर पर हर्निया मासपेशियां की कमज़ोरी या फिर त्वं दोनों के संयोजन से होती है | मांसपेशियों के कमज़ोर होने के निम्नलिखित कारण है :- 

  • बढ़ रही उम्र 
  • लम्बे समय से चल रहे खांसी समस्या से ग्रसित होना
  • चोट और सर्जरी से बना घाव 
  • गर्भ के समय शिशु के पेट की परत का सही तरह से विकसित न होना | 

 

हर्निया से पीड़ित रोगी को उपचार की आवश्यकता है या नहीं यह उसके हर्निया के आकर या उसके गंभीरता पर ही निर्भर करता है ,यह सुझाव सिर्फ डॉक्टर ही दे सकता है क्योंकि उपचार कई प्रकार के हो सकते है जैसे दवाइयें या फिर सर्जरी आदि | इसके लिए आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल से परामर्श कर सकते है |

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इन पुरुषों में बढ़ जाता है इरेक्टाइल डिसफंक्शन होने की अधिक संभावना,जाने कैसे करे बचाव

इरेक्टाइल डिसफंक्शन यानी स्तंभ दोष पुरुषों में पायी जाने वाली बहुत आम सी समस्या है, खासकर 40 वर्ष से अधिक आयु वाले पुरुषों के अधिक मामले सामने आये है | वैसे तो यह समस्या चिंता करने का विषय नहीं है, परंतु अगर यह समस्या बार-बार हो रही है तो बेहतर यही है की डॉक्टर के पास जाकर अच्छे से इलाज करवाएं |  

स्तंभ दोष समस्या तब होती है जब आप इरेक्शन प्राप्त करने में असमर्थ हो जाते है या सम्भोग के दौरान प्राप्त समय तक स्तम्भ को बरकरार रखने में असमर्थ हो जाते है | यह स्थिति तब उजागर होती है जब आप काफी तनाव, थकान या अधिक मात्रा में शराब सेवन करते  है | आइये जानते है इसके मुख्य कारण क्या है ?

  • उच्च रक्तचाप होना
  • कोलेस्ट्रॉल का लेवल हाई होना 
  • मधुमेह की समस्या 
  • डिप्रेशन या तनाव में रहना 
  • हार्मोन सम्बन्धी समस्या होना 

इरेक्टाइल डिसफंक्शन से कैसे करे बचाव?

  1. धूम्रपान सेवन छोड़ दे:- यदि आप धूम्रपान का सेवन करते  है तो, उससे छोड़ने की कोशिश करे | इससे होने वाले  हृदय एवं रकत वाहिक रोग इरेक्टाइल डिसफंक्शन को जनम दते है | 
  2. पौष्टिक आहार का सेवन करें :- इरेक्टाइल डिसफंक्शन को कम करने के लिए अपने आहार में साबुत अनाज वाले खाद पदार्थ, कम वसा वाले डेयरी, फल-हरी सब्जियां और दुबले मांस जैसे पौष्टिक आहार को शामिल करें |
  3. शारीरिक रूप से तंदुरुस्त रहे:- शारीरिक गतिविधि शरीर रक्त प्रवाह को बढ़ाने का काम करती है, जिसमे लिंग भी शामिल होता है | इसलिए रोज़ना 30 मिनट तक सैर करना चाहिए |

इस समस्या से जुड़ी कोई भी जानकारी या फिर सलाह के लिए आप आरजी स्टोन यूरोलॉजी & लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल का चयन कर सकते है | इस संस्था के पास यूरोलॉजी & लेप्रोस्कोपी एक्सपर्ट्स डॉक्टर्स की बेहतरीन टीम है | 

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कुल्थी के दाल से निकाला जा सकता है किडनी स्टोन, जाने कैसे करे सही तरीके से सेवन

गुर्दो में पथरी होना आज कल के जीवनशैली में बहुत आम सी बात हो गयी है | किडनी स्टोन की समस्या बाकि गंभीर समस्याओं में से एक है  जिसमे मरीज़ को हर समय होने वाली गंभीर दर्द की शिकायत रहती है | व्यक्ति के शरीर में स्टोन किडनी और गॉल ब्लड में हो सकता है | गुर्दो में पथरी से राहत पाने के लिए आप घरेलु उपचार की मदद ले सकते है या ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर के पास जाना पड़ सकता है | वही घरेलु उपचार से किडनी स्टोन जैसी समस्या से रहत पाने के लिए डाइट का भी  विशेष ध्यान देना ज़रूरी होता है |  

 

गुर्दे में पथरी की समस्या से आजकल हर व्यक्ति झुज रहा है | इस समस्या का मुख्य कारण  है खराब जीवनशैली और गलत खानपान का सेवन करना |कई बार कोलेस्ट्रॉल और कैल्शियम का लेवल बढ़ने से गुर्दे में पथरी की समस्या हो सकती है । गुर्दे में पथरी का माप छोटा होता है, जिसके कारण अधिक पानी का सेवन करने से छोटे स्टोन को बाहर निकाला जा सकता है , वहीं अगर किडनी स्टोन माप में  बड़े है तो इससे पेशाब के ज़रिये बाहर निकलना संभव नहीं | गुर्दे में पथरी के कारण पेट में दर्द के साथ-साथ मरीज़ के कमर के बाये तरह के हिस्से में भी काफी दर्द होता है | 

इस समस्या से हुए दर्द या फिर छुटकारा पाने के लिए घरेलू नुस्खे अपना सकते है | जिसमे से एक है कुल्थी का दाल, जिसके सही तरीके से किये गए सेवन से  इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है | 

 

किडनी स्टोन के लिए कुलथी के दाल के क्या है लाभ 

कुल्थी की  दाल मरीज़ के शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होता है, खासकर किडनी स्टोन से पीड़ित मरीज़ के लिए | कुल्थी दाल के लगातार सेवन करने के कुछ ही महीनो में यह पथरी को गलाने का काम करने लग जाती है  और पेशाब के जरिये बहार निकल जाती है | अगर कुल्थी दाल के पानी को अनियमित रूप से पिया जाए तो छोटे माप के किडनी स्टोन को आसानी से निकला जाते है | 

कुल्थी की दाल से मिलने वाले पौष्टिक तत्व 

कुल्थी के दल में कई तरह के पौष्टिक तत्व मौजूद होते है जैसे की सैपोनिन, स्टेरॉएड, फ्लेवोनॉयड्स इत्यादि जो की सेहत के लिए बहुत फायदे साबित होते है | इसके अलावा  एंटी-यूरोलिथियासिस जैसे तत्व भी मौजूद होते हैं, जो पथरी  को गलाने का काम करते हैं।

कुल्थी की दाल  सेवन करने का सही तरीका

सबसे पहले थोड़ा सा कुल्थी के दाल को अच्छे  से साफ़ कर ले | फिर इस दाल को एक कप पानी में पूरी रात भीगने के लिए छोड़ दे |  सुबह उठकर इस दाल के पानी का सेवन खली पेट करे | ऐसे इस प्रक्रिया को 3-4 महीने के लिए लगातार दौहरायें | कुछ ही महीने में यह पथरी पेशाब के रस्ते बाहर निकल जाएगी | 

कुल्थी दाल के फायदे क्या है ? 

  • नियमित रूप से इस दाल का सेवन करने से हृदय रोगी के स्वास्थ्य में सुधार आ जाता है | 
  • मोटापा बढ़ने से रोकता है और मोटापा को कम करने में भी सहायक है | 
  • ब्लड शुगर के लेवल को कम करता है जिससे डायबिटीज जैसी समस्या का प्रभाव कम होता है | 
  • इसमें मौजूद फाइबर कब्ज जैसी बीमारी को कम करता है | 
  • पीरियड्स को नियमित करती है | 
  • इसके पानी के सेवन से बवासीर जैसे परेशानी से भी राहत मिलती है | 
  • पेट से जुड़ी हर परेशानी को दूर रखती है | 

कभी- कभी इस परेशानी की वजह से काफी दिक़्क़्क़तों का सामना करना पड़ जाता  है | ऐसे स्थिति में डॉक्टर के पास जाना ही बेहतर रहेगा | अगर इससे जुड़ी कोई भी सलाह लेना चाहते तो आप आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल से ले सकते है | इस हॉस्पिटल के पास  बेहतरीन डॉक्टर्स की टीम है जो की यूरोलॉजी एंड लेप्रोस्कोपी ट्रीटमेंट में एक्सपपर्ट्स है |

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पित्ताशय की पथरी की रोकथाम के लिए बेहतरीन योगासन कौन-से है !

योग, भारत से शुरू हुई एक सदियों पुरानी प्रथा है, जो अपने कई स्वास्थ्य लाभों के लिए प्रसिद्ध है। इसके कई फायदों में से, योग पित्ताशय की पथरी की रोकथाम में मदद कर सकता है। पित्ताशय की पथरी दर्दनाक हो सकती है और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। विशिष्ट योग आसनों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पित्ताशय को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इस लेख में, हम पित्ताशय की पथरी की रोकथाम के लिए कुछ सर्वोत्तम योग आसनों पर चर्चा भी करेंगे ;

पित्ताशय की पथरी के लिए कौन-सा योगासन है बेहतरीन !

भुजंगासन (कोबरा मुद्रा) :

भुजंगासन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने और पाचन में सुधार के लिए एक बेहतरीन योग मुद्रा है। यह आसन पित्ताशय को उत्तेजित करता है और पित्त पथरी के निर्माण को रोकने में मदद कर सकता है।

धनुरासन (धनुष मुद्रा) :

धनुरासन एक शक्तिशाली आसन है जो पेट के क्षेत्र को संकुचित करता है, जिससे पित्ताशय की मालिश होती है। यह पित्ताशय की कार्यक्षमता को बढ़ा सकता है और पथरी बनने के खतरे को कम कर सकता है।

पवनमुक्तासन (हवा से राहत देने वाली मुद्रा) :

यह आसन पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने और पाचन तंत्र में गैस के संचय को रोकने के लिए उत्कृष्ट है। यह स्वस्थ पाचन को बढ़ावा देकर पित्त पथरी के खतरे को भी कम कर सकता है।

उष्ट्रासन (ऊंट मुद्रा) :

उष्ट्रासन में पीछे की ओर गहरा मोड़ शामिल होता है जो पेट के क्षेत्र को फैलाने में मदद करता है। यह पित्ताशय को उत्तेजित करता है और उसके कार्य में सुधार करता है, जिससे पित्त पथरी बनने की संभावना कम हो जाती है।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन (मछलियों का आधा स्वामी मुद्रा) :

अर्ध मत्स्येन्द्रासन पित्ताशय सहित पेट के अंगों की मालिश करने में प्रभावी है। यह विषहरण में सहायता करता है और समग्र पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।

विपरीत करणी (पैर ऊपर दीवार मुद्रा) :

यह आसन तनाव दूर करने और विश्राम को बढ़ावा देने में मदद करता है। तनाव को अक्सर पित्त पथरी के निर्माण से जोड़ा जाता है, और विपरीत करणी तनाव कम करने में मदद कर सकती है।

सर्वांगासन (कंधे का रुख करना) :

सर्वांगासन एक शक्तिशाली उलटा आसन है जो पेट क्षेत्र में रक्त परिसंचरण में सुधार करता है। यह पित्ताशय में पित्त के ठहराव को रोक सकता है, जिससे पित्त पथरी का खतरा कम हो जाता है।

शवासन (शव मुद्रा):

शवासन एक विश्राम मुद्रा है जो तनाव को प्रबंधित करने में मदद कर सकता है, जो पित्त पथरी के लिए एक ज्ञात जोखिम कारक है। शवासन को अपनी दिनचर्या में शामिल करके, आप भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा दे सकते है और पित्त पथरी बनने की संभावना को कम कर सकते है।

अर्ध हलासन (आधा हल आसन) :

अर्ध हलासन पेट के अंगों की मालिश करने में मदद करता है और पित्ताशय को उत्तेजित कर सकता है। यह पाचन में सुधार और पित्त पथरी को रोकने में भी सहायता करता है।

मत्स्यासन (मछली मुद्रा) :

  • मत्स्यासन एक और आसन है जिसमें पीछे की ओर झुकना होता है और पेट के क्षेत्र को फैलाना होता है। यह पित्ताशय को स्वस्थ बनाए रखने और पित्त पथरी को रोकने में प्रभावी हो सकता है।

अगर आप लुधियाना में पित्ताशय की पथरी का इलाज करवाना चाहते है, तो इसके लिए आपको उपरोक्त बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।

पित्ताशय की पथरी के कारण क्या है ?

  • मोटापे की समस्या।
  • बहुत अधिक डाइटिंग करने से। 
  • डायबिटीज की समस्या। 
  • कमजोर पाचन तंत्र की समस्या का सामना करना। 
  • अधिक एस्ट्रोजन (गर्भावस्था या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के कारण)।
  • कोलेस्ट्रोल का अधिक उत्पादन। 

पित्ताशय की पथरी के लक्षण क्या ?

  • ठंड के साथ तेज बुखार की समस्या। 
  • उल्टी या मितली की समस्या। 
  • पीलिया की समस्या। 
  • पेट या दाएं कंधे में तेज दर्द की समस्या का सामना करना। 
  • पेशाब के रंग का गहरा होना। 
  • मल का रंग मिट्टी की तरह हो जाना। 

अगर पेशाब संबंधी समस्या का आपको सामना करना पड़ रहा है, तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

सुझाव :

अगर आपको उपरोक्त योगासन से आराम न मिले तो इसके बेहतीन इलाज के लिए आपको आरजी स्टोन यूरोलॉजी और लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। 

निष्कर्ष :

  • हालांकि योग आसन पित्ताशय की पथरी को रोकने में फायदेमंद हो सकते है, लेकिन इनका नियमित और सही तरीके से अभ्यास करना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, संतुलित आहार बनाए रखना, हाइड्रेटेड रहना और स्वस्थ जीवन शैली जीना पित्ताशय के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। किसी भी नई व्यायाम दिनचर्या को शुरू करने से पहले हमेशा एक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श लें, खासकर यदि आपको पित्ताशय की समस्याओं का इतिहास है।
  • स्वस्थ जीवन शैली के साथ-साथ इन योगासनों को अपने दैनिक आहार में शामिल करने से पित्ताशय की पथरी को रोकने में काफी मदद मिल सकती है। उचित पाचन को बढ़ावा देकर, तनाव को कम करके और पित्ताशय को उत्तेजित करके, योग आपके समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बनाए रखने में एक मूल्यवान उपकरण हो सकता है।
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जानिए ज्यादा नमक किडनी के मरीजों के लिए कैसे है, खतरा और वो इससे कैसे खुद का बचाव कर सकते है?

किडनी में पथरी की समस्या का सामना कर रहें लोगों के लिए नमक किस तरह खतरे की निशानी है इसके बारे में हम आज के लेख में चर्चा करेंगे, तो अगर आप भी इस तरह की समस्या का सामना कर रहें है तो इससे बचाव के लिए आपको आर्टिकल के साथ अंत तक बने रहना चाहिए ;

क्या है किडनी में स्टोन की समस्या ?

  • किडनी के भीतर खनिजों और लवणों से बने क्रिस्टल के जमा होने की स्थिति को किडनी स्टोन का कारण माना जाता है। वहीं यह स्थिति गंभीर दर्द का कारण बन सकती है, कुछ लोगों को पेशाब की भी समस्या बनी रहती है। समय रहते इसके लक्षणों की पहचान कर स्टोन्स को निकालने के उपचार कराने की सलाह दी जाती है।
  • इसके अलावा कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञ का मानना है, की कम पानी पीने, आहार में गड़बड़ी, किडनी स्टोन की फैमिली हिस्ट्री या अधिक नमक-चीनी का सेवन करने वालों में किडनी में स्टोन बनने की दिक्कत अधिक होती रहती है। डॉक्टर्स कहते है, अगर आहार पर ध्यान देने के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें तो इस समस्या से बचाव किया जा सकता है।

अगर किडनी स्टोन के कारण आपको मूत्र से सम्बंधित कोई समस्या नज़र आ रहीं है तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

लक्षण क्या है किडनी स्टोन के ?

  • पीठ के निचले हिस्से या पेट के एक हिस्से में दर्द का महसूस होना।
  • दर्द के साथ मतली या उल्टी होना।
  • पेशाब से खून आना या पेशाब के दौरान दर्द होना।
  • पेशाब करने में असमर्थ होना।
  • अधिक बार पेशाब करने की आवश्यकता महसूस होना।
  • बुखार या ठंड का लगना।
  • पेशाब से बदबू या झाग का दिखाई देना।

किडनी स्टोन की समस्या से हम किन तरीको से करें खुद का बचाव ?

  • सबसे पहले तो आप इस तरह की समस्या से बचाव के लिए कम नमक का सेवन करें। वहीं ज्यादा नमक खाने से आपकी यूरिन में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाएगी, जिससे स्टोन का खतरा भी बढ़ जाता है, एक दिन में लोगों को 2300 mg से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए, खास कर जो लोग किडनी स्टोन की समस्या से जूझ रहे है, उन्हें रोज़ 1500 mg नमक ही खाना चाहिए. इससे आपको काफी राहत मिलेगी। 
  • किडनी स्टोन से बचने के लिए लोगों को हर दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, पानी पीने से किडनी में जमे एक्स्ट्रा मिनरल्स बाहर निकल जाते है और किडनी स्टोन का खतरा कम हो जाता है. अगर आप पानी में नींबू है या कुछ खट्टा रस मिला लें, तो भी किडनी स्टोन को बनने से रोक सकते है, इसके अलावा किडनी सर्वे से बचाव के लिए आपको हर दिन कम से कम 3 से 4 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। 
  • कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करने से आप किडनी स्टोन की समस्या से बच सकते है। वहीं दूध, दही, पनीर, सोयाबीम, बादाम और हरी पत्तेदार सब्जियों में बड़ी मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है, ऐसे फूड्स का सेवन करने से आपकी यूरिन में कैल्शियम जमने की संभावना कम हो जाएगी और किडनी स्टोन का खतरा घट जाएगा। 
  • रेडमीट, चिकन, अंडा और सीफूड का ज्यादा सेवन करने से यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ सकती है और किडनी स्टोन का खतरा भी बढ़ जाता है, इससे बचने के लिए हाई प्रोटीन फूड्स को अवॉइड करना चाहिए. नॉनवेज से दूरी बना लेनी चाहिए और हेल्दी फूड का सेवन करना चाहिए। 
  • चॉकलेट खाने की आदत करें कम, क्युकी ज्यादा चॉकलेट, चाय और अखरोट खाने से भी किडनी स्टोन का खतरा बढ़ जाता है, तो ऐसे में आपको इन चीजों से दूरी बनानी चाहिए और हेल्दी चीजों का सेवन करना चाहिए. अगर आप इन बातों का ध्यान रखेंगे तो किडनी स्टोन की समस्या से बच सकते है।

यदि इन उपायों को अपनाने के बाद भी किडनी में स्टोन की समस्या बढ़ते जा रहीं है तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में गुर्दे की पथरी की सर्जरी का चयन करना चाहिए।

सुझाव : 

गुर्दे की पथरी बहुत ही खतरनाक है, इसलिए इससे बचाव के लिए आपको अपने खान-पान का खास ध्यान रखना चाहिए, और नमक का सेवन उपरोक्त बताएं अनुसार ही करना चाहिए।

पथरी के इलाज के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

आप चाहे तो बढ़ी हुई पथरी का इलाज आरजी स्टोन यूरोलॉजी और लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल से भी करवा सकते है। 

निष्कर्ष :

गुर्दे में पथरी का होना बहुत ही खतरनाक समस्या है, क्युकी इस दौरान रह-रह कर दर्द की समस्या आपमें बनी रहती है, इसलिए जरूरी है की इससे बचाव के लिए आपको जल्द डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

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पथरी के कारण अगर आपके कमर में भी रहता है दर्द, तो जानिए क्या है इसके कारण, लक्षण व बचाव के तरीके?

किडनी में पथरी की समस्या हर मार्ग पर व्यक्ति के लिए बाधा बन कर सामने आ रही है, क्युकी इसके दर्द का सामना करना काफी मुश्किल होता है व्यक्ति के लिए। इसके अलावा पथरी के कारण व्यक्ति को और भी कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, वही पथरी के कारण अगर आपको कमर में दर्द की समस्या है तो जानेगे की इस दौरान व्यक्ति में और किस तरह के लक्षण नज़र आते है ;

किडनी में पथरी कैसे बनती है ?

  • पथरी जोकि मिनरल्स और नमक जैसे पदार्थो से बनी एक ठोस जमावट होती है, जो की आजकल बहुत ही आम समस्या हो गयी है और जिस वजह से कमर दर्द की भी समस्या बढ़ती जा रही है। 
  • आमतौर पर पथरी किडनी, मूत्रवाहिनी और मूत्राशय में देखी जाती है।

किडनी में पथरी के दौरान कमर दर्द के क्या लक्षण नज़र आते है ? 

  • पीठ में या पेट के पास असहनीय दर्द का सामना करना। 
  • दर्द के साथ बार-बार यूरीन आने की समस्या का सामना करना।                   पेशाब के साथ खून आने की समस्या का सामना करना। 
  • उल्टी आने की समस्या को झेलना। 
  • बदबूदार यूरीन का आना। 
  • बैठने में परेशानी का सामना करना। 
  • बुखार और ठंड का महसूस होना। 
  • किडनी और पेट में सूजन की समस्या का सामना। 
  • पेशाब करने पर जलन का महसूस होना। 

अगर आपको पथरी के दौरान यूरीन से संबंधित कोई समस्या है, तो इसके लिए आपको लुधियाना में बेस्ट यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

पथरी होने के क्या कारण है ?

  • पारवारिक इतिहास इसके कारण में शामिल है। 
  • मोटापे को भी इसके कारण में हम शामिल कर सकते है। 
  • रक्त चाप का हाई होना। 
  • खानपान में प्रोटीन और सोडियम अधिक मात्रा में होना और कैल्शियम की मात्रा में कमी का आना। 
  • व्यायाम की कमी भी इसके कारण में शामिल है। 

पथरी के कारणों को जानकर आप लुधियाना में गुर्दे की पथरी की सर्जरी से खुद का बचाव कर सकते है।

पथरी के कारण हो रहें दर्द की समस्या से बचाव !

  • अगर आपको पथरी के कारण कमर दर्द की समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो इससे बचाव के लिए आपको गर्म सिकाई का चयन करना चाहिए। वहीं आप इस सिकाई को कमर के निचले हिस्से में करते है या प्रभावित हिस्से में करते है तो आपको दर्द से काफी आराम मिलता है। 
  • किडनी में पथरी होने की वजह से अगर आपके कमर में भी काफी दर्द की समस्या रहती है, तो इस दर्द से राहत पाने के लिए आप तुलसी का सेवन कर सकते है। इसको बनाने के लिए आप एक बड़े चम्मच तुलसी के जूस को और शहद को एक गिलास पानी में मिलाएं और इसका सेवन करें। ऐसा करने से आप पथरी के कारण कमर दर्द की समस्या से भी छुटकारा पाने में सक्षम हो पाते है।
  • पानी का सेवन पथरी के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, इसलिए किडनी में पथरी की समस्या से राहत पाने के लिए पानी को खूब पिए। वहीं पानी किडनी में पथरी को घोलने में काफी मदद करते है, जिससे यह आसानी से निकल जाएं। इसलिए दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी का सेवन आपको जरूर करना चाहिए 
  • पथरी के मरीजों को ग्रीन टी का खूब सेवन करना चाहिए, ऐसा इसलिए क्युकि इसमें ड्यूरेटिक प्रोपर्टीज होती है, जो कि किडनी की पथरी को घोलने में मदद करती है और साथ ही पथरी के दर्द को भी कम करती है। इसलिए आप एक चम्मच ग्रीन-टी को एक कप पानी में उबाल कर छान लें और इसका रोज सेवन करें। कम से कम दिन में 2 कप ग्रीन-टी का सेवन करें। ऐसा करने से पथरी के कारण जो कमर दर्द की समस्या होती है, उससे आप राहत पा सकते है।
  • नींबू भी पथरी के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, वहीं नींबू में सिट्रस और एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते है, जो की किडनी में पथरी को ख़त्म करने में मदद करते है। इसलिए रोजाना नियमित रूप से एक गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़ कर इसमें थोड़ा शहद मिला लें और इसका सेवन दिन में कम से कम दो बार जरूर करें। 

पथरी से बचाव के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

आप चाहे तो पथरी का इलाज उपरोक्त उपायों की मदद से भी कर सकते है या फिर अगर आपको पथरी के कारण बहुत ज्यादा कमर में दर्द की समस्या है, तो इससे बचाव के लिए आप आरजी स्टोन यूरोलॉजी और लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल से जरूर संपर्क करें।

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गुर्दे की पथरी के दोबारा उत्पन्न होने के क्या है कारण व उपचार के तरीके ?

गुर्दे में पथरी का होना मतलब व्यक्ति के अंदर दर्द की समस्या का हमेशा से बने रहना। वही गुर्दे की पथरी का एक बार इलाज करने के बाद यदि वो दोबारा उत्पन्न हो जाए तो हमे क्या करना चाहिए। इसके अलावा गुर्दे की पथरी से कैसे हम खुद का बचाव कर सकते है इसके बारे में आज के आर्टिकल में बात करेंगे। वही पुनः उत्पन्न गुर्दे की पथरी का सामना अगर आप भी कर रहें है तो आज का आर्टिकल आपके लिए काफी उपयोगी साबित होगा ;

गुर्दे की पथरी दोबारा किन कारणों से उत्पन्न होती है ?

  • एक रिसर्च में ये बात सामने आई है की जिन लोगों को गुर्दे की पथरी हुई है उनमें से आधे लोगों को अगले 5 वर्षों के भीतर फिर से पथरी का अनुभव होगा।
  • वही शरीर में गुर्दे की पथरी का दोबारा से आने का मुख्य कारण ही पानी की कमी है, क्युकी हम में से ऐसे बहुत से लोग है जो समस्या ख़त्म होने पर उपचार को जारी नहीं रखते। 

अगर आपमें भी गुर्दे की पथरी काफी सालों के बाद उत्पन्न हुई है तो इससे बचाव के लिए आपको पंजाब में गुर्दे की पथरी विशेषज्ञ के पास जाना चाहिए। 

गुर्दे की पथरी से हम कैसे खुद का बचाव कर सकते है ?

  • पहली बात तो आपको खूब पानी पीना चाहिए।  
  • नींबू के रस और जैतून के तेल का मिश्रण किडनी की पथरी को शरीर से बाहर निकालने में काफी मददगार है इसलिए इससे बचाव के लिए इन दोनों का सेवन जरूर करें। 
  • सेब का सिरका पिए। 
  • अपने खान-पीन की दिनचर्या में अनार के रस को भी शामिल करें ।  
  • कॉर्न सिल्क (मकई के दाने का सेवन) का सेवन करें। 

गुर्दे की पथरी का उपचार कैसे किया जाता है ?

  • गुर्दे की पथरी के उपचार की बात करें कॉर्न सिल्क (मकई), गुर्दे के पथरी के इलाज में फायदेमंद है क्युकी इसके सेवन से किडनी स्टोन ठीक होता है। इसके सेवन से यूरिन ज्यादा आता है और पथरी छोटे-छोटे कणों के द्वारा बाहर निकल जाती है।
  • इसके अलावा यदि व्यक्ति की पथरी सामान्य आकार से ज्यादा बड़ी है तो ऐसे में मरीज़ की सर्जरी की जाती है, ताकि पथरी को बाहर निकाला जा सके। पर ज्यादा पानी न पीने  की वजह से ये समस्या सर्जरी के बाद भी दोबारा उत्पन्न हो जाती है।
  • वही डॉक्टरों का कहना है की अगर पथरी सामान्य आकार की है तो इसे ज्यादा पानी पीकर ठीक किया जा सकता है।

इसके अलावा पथरी बड़ी है या छोटी के बारे में जानने के लिए आपको यूरोलॉजिस्ट लुधियाना के संपर्क में आना चाहिए। और आपकी पथरी के लिए कौन सा इलाज सही है के बारे में भी जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

गुर्दे की पथरी के लिए बेस्ट हॉस्पिटल ?

  • यदि आपकी गुर्दे की पथरी सामान्य आकार से ज्यादा बड़ी है तो इससे निजात पाने के लिए आपको आरजी स्टोन यूरोलॉजी एन्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। वही अगर आप अपनी बड़ी पथरी का इलाज करवाना चाहते है तो इस हॉस्पिटल का चयन जरूर करें।

निष्कर्ष :

जैसा की आपने उपरोक्त के लेख से जान ही लिया की गुर्दे की पथरी का इलाज करने के बाद वो दोबारा से फिर क्यों उत्पन्न होती है। इसके अलावा अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हो जाए तो इससे बचाव के लिए आपको किसी अच्छे पथरी के डॉक्टर से जरूर मुलाकात करनी चाहिए।

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क्या है पेट में गांठ के कारण और कैसे पहचाने इनके लक्षण ?

पेट में गांठ का पड़ना जिसे आम भाषा में पेट के कैंसर के नाम से भी जाना जाता है, वही पेट में गांठ के क्या कारण है और साथ ही इसके लक्षणों को जान कर हम कैसे इससे खुद का बचाव कर सकते है इसके बारे में बात करेंगे, तो अगर आपके पेट में सूजन व पेट फूलने जैसे कुछ लक्षण नज़र आए तो आर्टिकल के साथ अंत तक बने रहे, वही इस लेख में हम पेट के गांठ या कैंसर की समस्या से कैसे खुद का बचाव कर सकते है इसके बारे में बात करेंगे ;

पेट में गांठ का पड़ना क्या है ?

  • सामान्य शब्दों में अगर समझा जाए तो पेट की गांठ को पेट का कैंसर या स्टमक कैंसर भी कहा जाता है। इस स्थिति में पेट बाहर की तरफ आ जाता है या फिर पेट में सूजन आ जाती है, ये गांठ के शुरुआती लक्षण होते है। 
  • वही पेट में गांठ की अगर बात करें तो ये दो तरह की होती है, जैसे यह नरम भी हो सकती है और कठोर भी हो सकती है।

पेट में गांठ के क्या कारण है ?

  • यदि पेट की गांठ व्यक्ति के ऊपरी हिस्से में है तो व्यक्ति को हर्निया की समस्या हो सकती है। 
  • पित्त में पथरी की वजह से भी व्यक्ति के पेट में गांठ हो सकती है। क्युकि पथरी की वजह से पित्त की थैली बाहर आने लगती है। इसी वजह से गांठ दिखाई देने लगती है। यदि आपके पेट में भी गांठ पित्त की पथरी की वजह से है तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में पित्त पथरी की सर्जरी को जरूर करवा लेना चाहिए।
  • कैंसर से भी पेट में गांठ बन जाते है। वही इसमें कोलन, लिवर, किडनी और आंत के कैंसर को शामिल कर सकते है।
  • क्रोन, जोकि इन्फ्लमेटरी बाउज की बीमारी भी कहलाती है, जिसके कारण पाचन तंत्र की परत पर सूजन होने लगती है।

लक्षण क्या है पेट में गांठ के ?

  • पेट में दर्द का होना। 
  • पेट का फूल जाना। 
  • गांठ के आसपास जलन का होना।  
  • भूख में बदलाव का आना। 
  • जी मिचलाना। 
  • उल्टी की समस्या का सामना करना। 
  • छाती में दर्द का होना। 
  • कब्ज की समस्या। 
  • मल त्यागने में परेशानी का सामना करना। 
  • पेट में दबाव जैसा कुछ महसूस होना। 
  • वजन उठाने में दर्द का सामना करना। 
  • पेशाब बहुत कम आना। 
  • यदि गांठ के साथ खून आ रहा हो तो ये कैंसर के लक्षण हो सकते है। 

यदि आपको लक्षणों में पेशाब कम आने की मात्रा भी आपमें नज़र आ रहीं है तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

पेट के कैंसर का इलाज क्या है ?

  • इसके इलाज में सबसे पहले ऑपरेशन आता है, वही जब भी आपको हार्निया, कैंसर या फिर आंतों में किसी तरह दिक्कत हो तो इसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। वही ऐसी अवस्था में डॉक्टर ऑपरेशन कराने की सलाह दे सकते है। जिसमें लेप्रोस्कोपी नाम की सर्जिकल प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है।
  • इसके अलावा कीमोथेरेपी की जाती है और इसमें गांठ के आकार को कम किया जाता है। जब गांठ का आकार छोटा हो जाता है, तो कीमोथेरेपी को बंद कर दिया जाता है। 

बेस्ट कैंसर हॉस्पिटल ?

अगर आप पेट में गांठ की समस्या से निजात पाना चाहते है तो इससे बचाव के लिए आपको आर जी यूरोलॉजी एन्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। वही इस हॉस्पिटल में किडनी में पथरी से लेकर पैट के कैंसर तक का इलाज किया जाता है। 

निष्कर्ष :

पेट में गांठ की समस्या काफी खतरनाक मानी जाती है और इस तरह की समस्या से हम कैसे खुद का बचाव कर सकते है इसके बारे में हम उपरोक्त आपको बता चुके।

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किडनी के लिए डायबिटीज की समस्या कैसे खतरनाक है – जानिए इसके लक्षण और बचाव के उपाय ?

मधुमेह गुर्दे के स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा है, जिससे गंभीर जटिलताएँ पैदा होने की संभावना है। इस स्थिति से किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है और यदि इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) या यहां तक कि किडनी फेलियर भी हो सकता है। इस संबंधित मुद्दे के प्रबंधन में लक्षणों को समझना और निवारक उपायों को लागू करना महत्वपूर्ण है ;

किडनी के लिए डायबिटीज का जोखिम क्या है ?

  • मधुमेह के कारण रक्त शर्करा का स्तर लंबे समय तक बढ़ने से किडनी खराब होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। गुर्दे में छोटी रक्त वाहिकाएँ होती है, जो रक्त से अपशिष्ट को फ़िल्टर करती है। 
  • हालाँकि, लगातार उच्च रक्त शर्करा इन वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे किडनी की कार्यक्षमता ख़राब हो सकती है। समय के साथ, यह क्षति बढ़ सकती है, जिससे सीकेडी या गुर्दे की विफलता हो सकती है, जिसे मधुमेह अपवृक्कता के रूप में जाना जाता है।

डायबिटीज होने पर किडनी में लक्षण क्या नज़र आते है ?

मधुमेह के कारण गुर्दे की क्षति के प्रारंभिक चरण में अक्सर कोई ध्यान देने योग्य लक्षण दिखाई नहीं देते है। हालाँकि, जैसे-जैसे स्थिति बढ़ती है, लक्षणों में निम्न चीजें शामिल हो सकते है ;

सूजन : 

गुर्दे की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी के कारण द्रव प्रतिधारण से पैरों, टखनों या आंखों के आसपास सूजन हो सकती है।

थकान : 

असामान्य रूप से थकान या कमजोरी महसूस होना, जो एनीमिया या शरीर में अपशिष्ट संचय का परिणाम हो सकता है।

पेशाब का बढ़ना :  

सामान्य से अधिक पेशाब आना या रात में बार-बार पेशाब करने के लिए उठना पड़ता है। यदि आपमें पेशाब की समस्या सामान्य से अधिक बढ़ जाए, तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

मूत्र में रक्त : 

मधुमेह से संबंधित गुर्दे की क्षति के परिणामस्वरूप मूत्र में रक्त आ सकता है।

मधुमेह की समस्या में किडनी निवारक उपाय क्या है ?

रक्त शर्करा के स्तर को प्रबंधित करें :

स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर द्वारा बताए गए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और दवा के माध्यम से रक्त शर्करा के स्तर की लगातार निगरानी और उसे नियंत्रण करें।  

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें :

उच्च रक्तचाप किडनी को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। कम सोडियम वाले आहार, नियमित व्यायाम और निर्धारित दवाओं सहित स्वस्थ जीवन शैली के माध्यम से रक्तचाप को नियंत्रित करें।

स्वस्थ जीवन शैली को अपनाएं :

स्वस्थ वजन बनाए रखें, धूम्रपान से बचें, शराब का सेवन सीमित करें और फलों, सब्जियों और साबुत अनाज से भरपूर संतुलित आहार का सेवन करें।

नियमित जांच :

किडनी की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए नियमित रूप से स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से मिलें। किसी भी समस्या का समय पर पता चलने से त्वरित हस्तक्षेप और प्रबंधन की अनुमति मिलती है।

दवा का पालन :

निर्धारित दवाओं का पालन करें, जिनमें विशेष रूप से गुर्दे की कार्यप्रणाली की रक्षा करने वाली दवाएं, जैसे एसीई अवरोधक या एआरबी शामिल है। इसके अलावा किसी भी ऐसी दवाई का सेवन न करें जो आपके किडनी और पेट में समस्या उत्पन्न कर दें। वहीं अगर आपने दवाई का ज्यादा सेवन कर लिया है, जिसकी वजह से आपके पेट में इंफेक्शन का खतरा उत्पन्न हो गया है, तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में हर्निया का इलाज जरूर से करवाना चाहिए।

डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति को कौन-से किडनी जाँच को करवाना चाहिए ?

  • यूरीन की सामान्य जांच।
  • कम मात्रा में प्रोटीन निकलने की जांच (माइक्रो एल्बुमेनैरिया)।
  • अधिक मात्रा में प्रोटीन निकलने की जांच (मैक्रो एल्बुमिनुरिया)।
  • किडनी की कार्य प्रणाली की जांच (किडनी फं क्शनिंग टेस्ट)।

किडनी की जाँच के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

अगर आप डायबिटीज की समस्या का सामना कर रहें है, जिसकी वजह से आपको किडनी जैसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो इससे बचाव के लिए आपको आरजी स्टोन यूरोलॉजी और लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए।

निष्कर्ष :

  • मधुमेह और गुर्दे के स्वास्थ्य के बीच संबंध एक गंभीर चिंता का विषय है, लेकिन सक्रिय उपाय जोखिमों को काफी कम कर देते है। रक्त शर्करा के स्तर को प्रबंधित करके, रक्तचाप को नियंत्रित करके और स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर, व्यक्ति मधुमेह से उत्पन्न होने वाली किडनी संबंधी जटिलताओं की संभावना को काफी कम कर सकते है। नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण है, जिससे कोई भी समस्या उत्पन्न होने पर शीघ्र पता लगाया जा सकता है और हस्तक्षेप किया जा सकता है।
  • जबकि मधुमेह के कारण गुर्दे की क्षति का खतरा एक गंभीर चिंता का विषय है, निवारक उपायों को लागू करने और किसी के स्वास्थ्य की बारीकी से निगरानी करने से इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। रक्त शर्करा के स्तर और समग्र स्वास्थ्य के प्रबंधन के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण अपनाकर, व्यक्ति प्रभावी ढंग से अपनी किडनी की सुरक्षा कर सकते है और अपने समग्र स्वास्थ्य पर मधुमेह के प्रभाव को कम कर सकते है।
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पित्ताशय की पथरी में किन खाने की चीजों का सेवन करें किन का नहीं !

पित्ताशय की पथरी एक दर्दनाक और असुविधाजनक स्थिति हो सकती है, लेकिन लक्षणों को प्रबंधित करने और आगे की जटिलताओं को रोकने में आहार विकल्प महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। इसलिए इस ब्लॉग में, हम यह पता लगाएंगे कि यदि आपको पित्ताशय में पथरी है तो आपको किन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए और किन खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए, ताकि इसे समझना और इससे बचना आसान हो सके ;

खाने योग्य खाद्य पदार्थ !

ताजे फल और सब्जियां : 

ताजे उपज फाइबर एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो पित्त पथरी के प्रबंधन में मदद कर सकती है। इसलिए सेब, नाशपाती, पालक और ब्रोकोली जैसे विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों का सेवन करें।

लीन प्रोटीन : 

चिकन, टर्की और मछली जैसे लीन प्रोटीन स्रोतों का चयन करें। इन्हें आपके शरीर के लिए पचाना आसान होता है और पित्त पथरी के लक्षण उत्पन्न होने की संभावना कम होती है।

साबुत अनाज : 

ब्राउन चावल, साबुत गेहूं की ब्रेड और जई जैसे खाद्य पदार्थ आपके पित्ताशय पर अधिक भार डाले बिना आवश्यक पोषक तत्व और फाइबर प्रदान करते है।

स्वस्थ वसा : 

अच्छे वसा, जैसे कि एवोकाडो, जैतून का तेल और नट्स में पाए जाने वाले, फायदेमंद हो सकते है। वे पित्ताशय की पथरी के जोखिम को कम कर सकते है और समग्र पित्ताशय स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकते है।

कम वसा वाले डेयरी प्रोडक्ट्स : 

दही और दूध जैसे कम वसा वाले या वसा रहित डेयरी उत्पाद चुनें। उच्च वसा वाले डेयरी उत्पादों की तुलना में ये आपके पित्ताशय पर आसान होते है।

पानी : 

खूब सारा पानी पीकर अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहें। यह आपके पित्ताशय के स्वास्थ्य को बनाए रखने और पथरी बनने से रोकने में मदद करता है। पानी कम पीने की वजह से अगर आपको मूत्राशय सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

हर्बल चाय : 

पुदीना और अदरक जैसी हर्बल चाय पित्त पथरी से जुड़ी पाचन संबंधी परेशानी को शांत कर सकती है।

परहेज करने योग्य खाद्य पदार्थ !
  • तले हुए खाद्य पदार्थ, वसायुक्त मांस और भारी क्रीम से बचें। क्युकि उच्च वसा सामग्री पित्ताशय की थैली के हमलों को ट्रिगर कर सकती है।
  • प्रसंस्कृत स्नैक्स, फास्ट फूड और पहले से पैक किए गए भोजन से दूर रहें क्योंकि इनमें अक्सर अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा अधिक होती है।
  • चीनी का सेवन कम करें, जिसमें चीनी युक्त पेय पदार्थ और मिठाइयाँ शामिल है, जो वजन बढ़ाने और पित्त पथरी के निर्माण में योगदान कर सकते है।
  • लाल मांस का सेवन सीमित करें, क्योंकि आपके पित्ताशय के लिए इसकी प्रक्रिया करना कठिन हो सकता है।
  • मसालेदार व्यंजन पित्ताशय में जलन पैदा कर सकते है और असुविधा पैदा कर सकते है। इनसे बचना या सीमित करना सबसे अच्छा है।
  • शराब पित्ताशय में जलन पैदा कर सकती है, इसलिए सलाह दी जाती है कि शराब का सेवन कम से कम करें या ख़त्म कर दें।
  • कॉफी और ऊर्जा पेय जैसे कैफीनयुक्त पेय पदार्थों का सेवन कम करें, क्योंकि वे पित्त पथरी के लक्षणों को खराब कर सकते है।

अगर आपके द्वारा उपरोक्त खाने की चीजों का सेवन बहुत ज्यादा किया गया है तो आपको लुधियाना में पित्ताशय की पथरी का इलाज जरूर से करवाना चाहिए।

ध्यान रखें :

अगर आप पित्त की पथरी की समस्या से परेशान है तो इससे बचाव के लिए आपको आरजी स्टोन यूरोलॉजी और लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए, पर ध्यान रहें अगर आप अभी शुरुआती स्टेज पर है पथरी के तो आप इस समस्या का समाधान खाने की चीजों पर रोक लगा कर भी कर सकते है।

निष्कर्ष :

संतुलित और पित्त-अनुकूल आहार इस स्थिति को प्रबंधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। सरल आहार विकल्प लक्षणों को कम कर सकते है और जटिलताओं के जोखिम को कम कर सकते है। उच्च वसा और प्रसंस्कृत विकल्पों से बचते हुए ताजे, और संपूर्ण खाद्य पदार्थों के सेवन पर ध्यान दें। पित्ताशय की पथरी के प्रबंधन पर व्यक्तिगत सलाह के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपके आहार विकल्प आपकी विशिष्ट स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप हों, हमेशा एक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श लें।

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