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Are Regular Follow-Ups Necessary After a Kidney Transplant? Read What Happens During Follow-Ups

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Are Regular Follow-Ups Necessary After a Kidney Transplant? Read What Happens During Follow-Ups

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Have you ever wondered about the necessity of opting for a kidney transplant after both kidneys fail? Certainly, both the kidneys effectively contribute to the removal of harmful toxins from your body, and when these are affected, your survival becomes difficult. This is where a kidney transplant plays a crucial role in placing healthy kidneys instead of the damaged ones for the filtration of harmful toxins from the body. Do you know what neglected follow-ups after a kidney transplant can lead to? Certainly, it can result in serious complications that might become difficult to manage. If you have recently undergone a kidney transplant, then it is crucial for you to understand the utmost importance of follow-ups after the surgical procedure. This can provide an accurate idea to the professionals for analyzing the functioning of new and healthy kidneys in terms of filtering toxins. Also, if any complications arise, the experts can identify them at an early stage during your regular follow-up session, maintaining your overall health. Now you might be wondering what exactly happens during regular follow-ups; therefore, to get an accurate answer, make sure to go through this blog, depicting the same. 

Understand the professional’s role during follow-up visits after a kidney transplant

Follow-ups after a kidney transplant play a significant role in maintaining your kidney health and the proper filtration process of harmful toxins. Therefore, go through the points mentioned below, highlighting the role of professionals during your follow-up visits after placing the healthy kidney. 

They initiate through a medical health discussion. 

During the follow-up visits after the kidney transplant, the professionals ensure to have a thoughtful conversation regarding your medical health after the kidney transplant. Also, thoroughly identifying your current and precious health status is part of follow-ups for better recovery. You can thoroughly discuss any new symptoms you have been experiencing since your previous visit. The experts evaluate the clear picture of your new kidney functioning. 

They evaluate physical examination. 

The experts make sure to perform specific physical examination tests, such as blood tests and weight changes. Such physical tests play a crucial role in thoroughly checking the functioning of your kidneys. It can be easily identified whether your body is accepting a new organ or not. The doctors ensure that the new kidney is performing well by identifying swelling in your legs to prevent your condition from worsening.

They focus on lab monitoring tests. 

During the follow-up visits, the professionals prefer performing certain tests, such as blood or urine tests. A crystal clear idea would land in the minds of professionals in terms of eliminating toxins and improving kidney performance. Through such tests, they can also detect any early infection that signals the non-acceptance of a new kidney by your body. 

They review the medicine doses. 

After a kidney transplant, you would be provided with certain medications for better recovery. During the follow-up visits, the professionals examine the effectiveness of specific medicines in order to ensure that the medicines are showing effective results. Along with this, this can also make them clear regarding changing the medications if necessary for better recovery after the surgical procedure. 

Conclusion 

You can thoroughly maintain the functioning of your new kidney by prioritising the follow-ups after a kidney transplant. The above-mentioned points vividly demonstrate the specific role played by professionals during the follow-up visits after a kidney transplant, so that you would be prevented from any complications or infections. If you have undergone a kidney transplant, then it’s better to prioritize follow-up visits to keep yourself safe and sound. However, if you have been planning to get a kidney transplant, make sure to thoroughly engage with the experts at RG Stone Urology and Laparoscopy Hospital. Our highly intellectual expert, Dr. Charnbir Singh, ensures to understand your specific kidney issue with the purpose of providing an effective treatment plan accordingly. 

FAQs

  • Is it necessary for me to take the medications after a kidney transplant for my entire life?

Yes, medications need to be taken for the whole life after a kidney transplant, as this can help in preventing rejection of the new organ. 

  • Is experiencing fever after a kidney transplant a normal sign or not? 

No, experiencing pain after a kidney transplant should not be misunderstood as a normal sign and needs to be taken under medical guidance as soon as possible.

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किडनी स्टोन के अलावा वो कौन से 8 कारण हैं, जो किडनी में दर्द का कारण बन सकते हैं? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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दरअसल, इसके बारे में लगभग सभी जानते हैं, कि किडनी हमारे शरीर के लिए कितनी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। यह शरीर में एक अहम भूमिका निभाती है, जो हमारे शरीर में जमा गंदगी को निकालने में हमारी काफी ज्यादा सहायता करती है। हालांकि, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि हमारे शरीर में किडनी पेशाब के जरिये शरीर की गंदगी को बाहर निकालने का काम करती है और साथ में शरीर के केमिकल को बनाए रखने का काम करती है। पर, जब हमारी किडनी में किसी भी तरह की कोई भी परेशानी आती है, तो इस दौरान हमारा शरीर बहुत से संकेतों को प्रदान करता है। कई बार किडनी का दर्द असहनीय हो सकता है, जो एक व्यक्ति की जीवन शैली को काफी ज्यादा प्रभावित कर सकता है। किडनी में दर्द किडनी स्टोन के अलावा और भी बहुत से कारणों की वजह से हो सकता है, जिसमें किडनी में कैंसर, चोट, पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज, किडनी इन्फेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट में रुकावट, यूरेटेरो पेल्विक जंक्शन ऑब्स्ट्रक्शन, वेसिको-यूरेथ्रल रिफ्लक्स और यूरिनरी रिटेंशन जैसे कारण शामिल हो सकते हैं। ऐसे में, जब भी आपको अपनी किडनी में दर्द महसूस होता है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

गुर्दे में दर्द का मुख्य कारण क्या हो सकता है?

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि हमारी किडनी यानी कि गुर्दे ब्लैडर और यूट्रस से भी जुड़े हुए होते हैं। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति के दौरान जब किडनी में किसी भी तरह की कोई भी समस्या हो जाती है, तो किडनी के साथ- साथ यह सभी हिस्से भी काफी ज्यादा प्रभावित होते हैं। किडनी में होने वाले दर्द के कुछ संभावित कारणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. किडनी स्टोन

यह सभी जानते हैं, कि शरीर में जमा होने वाले मिनरल्स की वजह से किडनी में पथरी की समस्या उत्पन्न होती है। दरअसल, इस पथरी के यूरिनरी ट्रैक्ट में फंसने पर आपको काफी ज्यादा तेज दर्द महसूस हो सकता है। 

  1. यूरिनरी रिटेंशन

यूरिनरी रिटेंशन यानी कि पेशाब में रुकावट। इस तरह की स्थिति के दौरान एक व्यक्ति अपना ब्लैडर अच्छे तरीके से खाली नहीं कर पाता है, जिससे दर्द महसूस हो सकता है। यह समस्या अचानक से या फिर उम्र के साथ धीरे-धीरे हो सकती है। 

  1. वेसिकोरेट्रल रिफ्लक्स

दरअसल, यूरिन रिफ्लक्स के दौरान पेशाब आपके ब्लैडर से पीछे की ओर आपके यूरेटर्स या फिर किडनी की तरफ बहने लग जाता है। हालांकि, वेसिको-यूरेथ्रल रिफ्लक्स की समस्या किसी को भी प्रभावित कर सकती है। पर, यह समस्या ज्यादातर शिशुओं और छोटे बच्चों में काफी ज्यादा देखने को मिल सकती है। जिससे किडनी में दर्द हो सकता है। 

  1. यूरेटेरोपेल्विक जंक्शन ओबस्ट्रुक्शन

आम तौर पर, इस तरह की स्थिति के दौरान ब्लॉकेज की समस्या तब होती है, जब आपकी मूत्रवाहिनी आपकी किडनी से जुड़ी हुई होती है। इसके कारण एक व्यक्ति को पीठ में दर्द हो सकता है, जिसका फैलाव पेट या फिर पीठ के निचले हिस्से तक हो सकता है। 

  1. पेशाब की नली में रुकावट

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि असल में यूरेटर वो ट्यूब होते हैं, जो आम तौर पर, पेशाब को आपकी किडनी से आपके ब्लैडर तक ले जाते हैं। इस तरह की स्थिति उत्पन्न होने पर, यूरेटर एक या फिर दोनों तरफ सिकुड़ सकता है, जो किडनी में दर्द का कारण बन सकता है। 

  1. गुर्दे का संक्रमण

दरअसल, गुर्दे में संक्रमण जैसी स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब बैक्टीरिया आपकी किडनी यानी कि गुर्दे को पूरी तरीके से संक्रमित कर देते हैं। इस तरह की स्थिति में आपको बुखार, ठंड लगना, पीठ में दर्द और उल्टी होना जैसे लक्षण नज़र आ सकते हैं। इससे किडनी में काफी ज्यादा दर्द महसूस हो सकता है। 

  1. पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज

इस तरह की समस्या के दौरान जैसे-जैसे सिस्ट फैलता है, वैसे -वैसे किडनी का आकार बड़ा होता जाता है और इस दौरान काफी ज्यादा दर्द महसूस हो सकता है। ऐसे में, नतीजा यह निकलता है, की किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती है। 

  1. चोट

दरअसल, बहुत सी चोटों की वजह से किडनी को काफी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। आम तौर पर, इसकी वजह से पेशाब में या फिर किडनी के आसपास ब्लीडिंग होने की वजह से पेशाब के साथ-साथ खून का लीकेज भी हो सकता है। जिससे किडनी में काफी ज्यादा दर्द हो सकता है। 

निष्कर्ष: किडनी हमारे शरीर में एक अहम भूमिका निभाती है, जो शरीर से जमा गंदगी को निकालने में हमारी बहुत मदद करती है। हमारी किडनी ब्लैडर और यूट्रस से भी जुड़ी हुई होती है, तो ऐसे में जब किडनी में कोई दिक्कत-परेशानी आती है, तो किडनी के साथ यह हिस्से भी प्रभावित होते हैं। किडनी में पथरी के अलावा, किडनी में कैंसर, चोट, पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज, किडनी इन्फेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट में रुकावट, यूरेटेरो पेल्विक जंक्शन ऑब्स्ट्रक्शन, वेसिको-यूरेथ्रल रिफ्लक्स और यूरिनरी रिटेंशन जैसे कारणों की वजह से भी किडनी में दर्द की समस्या हो सकती है। किडनी में होने वाले इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए समय पर इन समस्याओं का इलाज और जांच बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं। किडनी में गंभीर समस्या होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और किडनी से जुड़ी किसी भी तरह की आम से गंभीर समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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क्या मतली का बार-बार होना हो सकता है किडनी की बीमारी का संकेत? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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लोगों में मतली की समस्या होना एक आम बात होती है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि पेट खराब होने की वजह से या फिर कोई संक्रमण होने की वजह से आपको इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, बहुत सी महिलाओं को

गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में भी मतली जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही, हम में बहुत से लोगों को बसों और गाड़ियों में ट्रेवल करने या फिर एसिड रिफ्लक्स की वजह से मतली जैसी समस्या होने लग जाती है। यह समस्या कभी और किसी को भी हो सकती है। हम में से बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जो इस समस्या को स्थिति के हिसाब से जज करते हैं और ऐसे ही नाजज़रांदाज कर देते हैं। यह समस्या आम होती है, पर क्या फिर भी आप इसके बारे में जानते हैं, कि मतली की समस्या को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। क्योंकि कभी कभार ये समस्या शरीर से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। जो एक व्यक्ति की सेहत को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकती है। 

डॉक्टर के अनुसार, मतली की समस्या का किडनी से जुड़ी समस्या के साथ एक बहुत ही गहरा संबंध होता है। जो किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। किडनी की समस्या में एक व्यक्ति के पैरों और चेहरे पर सूजन की समस्या होने लग जाती है, जिसमें कई बार पेट दर्द भी हो सकता है। ऐसे में बहुत से लोग जानना चाहते हैं, कि क्या इस तरह की स्थिति में किडनी से जुड़ी समस्याओं को गैस और मतली से भी जोड़कर देखा जा सकता है? क्या वाकई मतली का बार-बार होना किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है? दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि हाँ बार-बार होने वाली मतली या फिर उल्टी किडनी से जुड़ी बीमारी या फिर किडनी फ़ैल होने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। इसलिए, इस तरह की समस्या को नज़रअंदाज करने की बजाए आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

किडनी की बीमारी के लक्षण क्या हो सकते हैं?

किडनी की बीमारी के लक्षण तभी नजर आते हैं, जब किसी व्यक्ति में किडनी की समस्या काफी ज्यादा गंभीर हो जाती है और बीमारी एक एडवांस स्टेज तक पहुंच जाती है। किडनी की बीमारी के लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. पीड़ित व्यक्ति के चेहरे और पैरों में सूजन की समस्या होना। 
  2. काफी ज्यादा जी मिचलाना या फिर उल्टी जैसा महसूस होना। 
  3. पीड़ित व्यक्ति का धीरे-धीरे वजन कम हो जाना। 
  4. सांस लेते वक्त काफी ज्यादा तकलीफ महसूस होना। 

मतली और किडनी की बीमारी के बीच संबंध!

इस पर डॉक्टर का कहना है, कि किडनी की बीमारी होने पर आपको इसकी शुरुआत में ही जी मिचलाना या फिर उल्टी होने जैसे लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। अगर इस तरह की समस्या कभी कभार किसी को हो जाती है, तो इस को बिल्कुल भी किडनी की बीमारी से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। कभी कभार होने वाली मतली को आप एक आम समस्या जैसे एसिडिटी और गैस भी समझ सकते हैं, जो किसी को भी प्रभावित कर सकती है। आम तौर पर, ऐसा इसलिए भी हो सकता है, क्योंकि कई बार हम सेहतमंद खाने की जगह, गलत डाइट को भी अपना लेते हैं। डॉक्टर के अनुसार, कभी कभी होने वाले मतली की समस्या किडनी की बीमारी का संस्कृत नहीं हो सकता, पर अगर यह मतली की समस्या किसी व्यक्ति को बार-बार होती है और वह इस समस्या से जहर बार परेशान रहता है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि यह किडनी की बीमारी या फिर किडनी फ़ैल होने का एक बहुत बड़ा संकेत हो सकता है। इसके अलावा, इस तरह की समस्या को लेकर ज्यादा परेशान भी नहीं होना चाहिए। अपने मन में कोई भी धारणा बनाने से पहले बेहतर होगा, कि आप किसी अच्छे डॉक्टर या फिर किसी नेफ्रोलॉजिस्ट के पास जाकर किडनी की अच्छे तरीके से जांच करवानी चाहिए। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि समस्या की पहचान करने के लिए किडनी फंक्शन टेस्ट भी किया जा सकता है, जिस में यह पता लगता है, कि व्यक्ति में मतली की समस्या किडनी की बीमारी से जुड़ी हुई है, या फिर नहीं। NCBI की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के सालों में किडनी के मरीजों की संख्या बढ़ी है। क्रोनिक किडनी की बीमारी में हीमोडायलिसिस की जरूरत होती है। इस समस्या से पीड़ित लोगों को उल्टी या जी मिचलाने की समस्या हो सकती है।

मतली के अन्य कारण क्या हो सकते हैं?

मतली के अन्य कारण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं:

  1. काफी लंबे समय तक पेन किलर लेना।
  2. ज्यादा मात्रा में स्ट्रीट फूड का सेवन करना 
  3. फास्ट फूड भी मतली का कारण हो सकता है।
  4. फास्ट फूड से भी मतली की समस्या हो सकती है। 

निष्कर्ष: मतली की समस्या एक आम समस्या है, जो किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। किडनी की बीमारी होने पर एक व्यक्ति को कई तरह के लक्षण नज़र आ सकते हैं, जिसमें से एक जी मिचलाना भी शामिल हो सकता है। उल्टी आना जैसे लक्षण अक्सर आपको सिर्फ किडनी की बीमारी के एडवांस स्टेज में देखने को मिल सकते हैं। जिसमें किडनी की बीमारी और किडनी फेलियर का होना शामिल हो सकता है। इसलिए, बार बार होने वाली मतली को आप किडनी की बीमारी से जोड़कर देख सकते हैं। ऐसा होने पर अपनी किडनी की तुरंत जांच कराएं। इससे समस्या का पता चल सकता है और वक्त रहते इलाज हो सकता है। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और किडनी से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल के विशेषज्ञों से सम्पर्क कर सकते हैं।

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Does Drinking Energy Drinks Cause Kidney Failure?

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Drinking energy drinks in large amounts can cause kidney damage. Energy drinks contain caffeine that is about 80 to 300 mg per can, which leads to dehydration. They contain excessive sugar, which causes type 2 diabetes and excessive weight gain. Taurine and guarana are additives found in energy drinks that strain the kidneys. Some energy drinks have alcohol, which masks the effects of alcohol. 

The functions of the kidneys

  • Your kidneys filter about 180 litres of fluid every day, removing products from the blood and taking them out as urine. 
  • They help balance water and the electrolytes in your body, which are important for nerve and muscle function.
  • Your blood pressure is managed within the correct range because the kidneys manage the water and salt levels in your system.
  • The kidneys assist with the maintenance of your blood’s PH level. 
  • The kidneys stimulate red blood cell production and help with the production of hormones.

How does excessive intake of caffeine negatively affect the kidneys?

  • Caffeine raises the levels of urine.Going to the bathroom a lot of times after drinking drinks may seem like short term effects but are actually long term effects. Urinating frequently causes dehydration, and that affects the kidneys on a large scale. 
  • Caffeine causes a rise in blood pressure, causing the kidneys to work overtime. 
  • Large intakes of caffeine lead to dehydrated kidneys. That makes the kidneys work overtime, leading to kidney stones and kidney injuries. 

The different types of kidney problems

  • Kidney stones: Kidney stones develop when the salts and minerals in your body huddle together. The illness is caused by a minimum intake of fluid in the body and having too much salt. Sometimes they are caused by genetics and also affect people who are obese. Certain medications and conditions, like urinary tract infections or gout, can lead to the formation of kidney stones. 
  • Polycystic kidney disease: This kidney problem is passed on from parent to child, making it genetic. The cysts are made up of fluid. Polycystic kidney disease occurs when the PKD1 OR the PKD2 genes are modified. If either of the parents has ADPKD, each of their children has a 50% risk of inheriting the disease. 
  • Glomerulonephritis: It is when the kidney’s filters swell up, and it is often caused by infections like HIV, hepatitis, diabetes and high blood pressure.

Substitutes for energy drinks and their benefits

  • Coconut water helps increase your electrolytes and minerals.
  • Salt and lemon water hydrate the kidneys.
  • Kombucha has fizz and a lot of probiotics.
  • Beetroot juice boosts one’s stamina.
  • Consistently drinking pure water each day.
  • Sleeping for 7 to 8 hours for better rest.
  • Eating a balanced diet can help increase your levels of energy.
  • Working out or exercising can help boost your energy.

Conclusion

Problems with the kidneys can be prevented if we reduce our caffeine intake and increase our water intake. Kidney problems are also managed with the help of RG Stone Urology and Laparoscopy Hospital. We are fully equipped with solutions and the latest equipment for our patients. Dr Chanbir Singh has a team that is eager to take good care of you. 

Questions frequently asked

Question 1: Are sugar-free energy drinks bad for the kidneys?

A: Yes, sugar-free energy drinks affect the kidneys because they have high caffeine content. 

Question 2: How often can I drink an energy drink?

A: You can drink energy drinks occasionally, avoiding daily consumption.

Question 3: What is the best alternative to energy drinks?

A:  The best alternative to energy drinks is water. You can also drink herbal tea.

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Understanding Kidney Symptoms In Men And Women

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Kidney disease is an increasing well-being distress around the world, and being aware of its early signs can make a major difference in treatment results. Your kidney achieves crucial tasks, filtering waste, balancing fluids, and preserving blood pressure. Unfortunately when they begin to lose function, symptoms may vary not only by stage but also by gender. RG Hospital Ludhiana can help you in understanding how kidney disease affects men and women differently and can help with early detection and better care.

Understanding Kidney Disease?

Recurrent kidney disease mostly happens when the kidneys steadily lose their ability to filter harmful and noxious from the body. Ordinary causes of diabetes include high blood pressure, recurrent urinary infections, and protracted use of painkillers. While many symptoms are the same in men and women, there are special signs that should not be ignored.

Normal Signs in Both Genders

  • Early kidney disease mostly goes unseen. As it progresses, both men and women may experience:
  • Fatigue or weakness
  • Swelling in the ankles, legs, or face
  • transformation in urine output or colour
  • Shortness of breath

Kidney Disease Symptoms in Men

  • Erectile Dysfunction: Bad kidney function can reduce blood flow and hormone levels 
  • Low Testosterone: Preventing kidney function can cause fatigue, low energy, and decreased muscle mass due to hormonal imbalance.
  • Urination condition: Men may experience weak urine flow or frequent urination, particularly at night.

Kidney Disease Symptoms in Women

  • Irregular Menstrual Cycles: Hormonal imbalances from kidney disease can disrupt menstruation and fertility.
  • Frequent UTIs: Women are more prone to urinary infections, which can lead to kidney damage if untreated.
  • Facial Puffiness: Swelling around the eyes or face is often more visible in women.

When to look for medical help

  • Once one has noticed the persistence of fatigue, foamy urine, swelling, or some blood in their urine, don’t hesitate to go for an early test, as this is to avoid it getting worse.

SafeguardYour Kidney’s Health

Both men and women can reduce kidney disease risk by maintaining a healthy lifestyle:

  • Determine blood pressure and blood sugar
  • Stay hydrated
  • Limit salt and processed foods
  • Avoid taking a lot of painkillers
  • Exercise regularly and quit smoking

Conclusion

Kidneys mostly start silently, but the gender quietly but gender-specific symptoms can provide valuable clues. Men may notice sexual well-being changes or urination issues, while women may experience menstrual rules or facial swelling. Early diagnosis and proper medical care are core to preserving kidney function and general well-being at RG Hospital Ludhiana.

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A Comprehensive Review Of Acute Kidney Injury

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Acute Kidney Injury(AKI) means the sudden decline in kidney function over hours or days, causing accumulation of waste, fluid and electrolyte imbalance. Noticing the early symptoms of AKI is crucial for timely intervention, which can prevent damage and avoid progression to chronic kidney disease or end-stage renal failure. RG Stone Urology & Laparoscopy Hospital will assist you with guidance and understanding.

What Generates Acute Kidney Injury?

Acute injury may arise from a lot of underlying causes, some of them are as discussed below: 

  • Reduced blood flow to the kidney: Dehydration, low blood pressure, heart failure or bleeding.
  • Intrinsic kidney damage: Infections, inflammation, toxins, certain medications.
  • Obstruction in the urinary tract: Kidney stones, enlarged prostate, tumors that block urine flow.
  • Patients with diabetes, hypertension, heart disease, or those using nephrotoxic drugs are at higher risk.

Timeline of Symptom Progression

Understanding how AKI unfolds over time helps in early detection.

  • Day 1–2: Subtle Beginnings
  • Mild fatigue, weakness, or loss of appetite
  • Occasional nausea
  • Slightly reduced urine output (may seem normal)
  • Mild swelling in feet, ankles, or hands

These early signs tend to be vague and easily ignored, especially in patients with existing health issues.

  • Day 3–5:accelerating, Symptoms
  • Sharp decline in urine production (oliguria)
  • Urine becomes dark, foamy, or concentrated.
  • Shortness of breath due to fluid accumulation
  • Mental confusion or “brain fog”
  • Worsening swelling in limbs or face
  • Metallic taste in the mouth

At this stage, symptoms become more pronounced and prompt medical evaluation is critical.

  • Day 6–10: Critical stage
  • Severe electrolyte imbalance (especially potassium)
  • Muscle cramps, twitching
  • Irregular heartbeat or chest pain
  • Breathing difficulty due to pulmonary oedema
  • Seizures, dizziness, or loss of consciousness
  • High blood pressure and signs of uremia

If an acute kidney injury is not treated or is left untreated, this may cause a spiral or life-threatening complication.

How Can You Identify Acute Kidney Injury?

To confirm AKI, well-being offers generally use:

  • Blood tests: Elevated creatinine and BUN levels.
  • Urine analysis: Detecting protein, red blood cells, or infection.
  • Imaging: Ultrasound or CT scans to find obstructions or structural abnormalities
  • Physical exam: Assessing swelling, blood pressure, and hydration

Treatment Plans & Reversibility

Managing AKI involves:

  • Administering intravenous fluids to restore circulation
  • Adjusting or stopping nephrotoxic medications
  • Using diuretics if excess fluid is causing harm
  • Correcting electrolyte imbalances
  • Applying dialysis temporarily in severe cases

When treated early, AKI is often improvable. Delayed or inadequate care, however, can lead to chronic kidney disease, permanent renal damage, or enduring dialysis addiction

Prevention & Proactive Steps

To reduce AKI risk:

  • Stay well hydrated, mostly during illness or heat.
  • Use painkillers like NSAIDs cautiously.
  • Closely manage chronic conditions (diabetes, hypertension)
  • Monitor kidney function if on long‑term medications.
  • After surgeries or ICU stays, track urine output and kidney markers.
  • Seek prompt help for sudden swelling or decreased urination.

Conclusion

At RG Stone Urology & Laparoscopy Hospital in Ludhiana, we are dedicated to diagnosing and treating kidney conditions issues, including acute kidney injury, with the highest standards. Our versatile team of urologists, nephrologists, critical care specialists, and support staff gives advanced diagnostic services, dialysis support, and kidney well-being care. If you or a loved one experiences symptoms such as reduced urine output, swelling, nausea, or confusion, don’t delay; reach out for expert evaluation immediately.

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5 Ways to Prevent Developing Acute Kidney Injury

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Developing Acute Kidney Injury can thoroughly and extensively prove to be a troublesome experience. This is especially true when you do not see the problem coming at all. Acute Kidney Injury is a medical phenomenon wherein a person’s kidneys stop working for one reason or another. This kidney failure can thoroughly and extensively take place over a few hours or a few days. This is a serious condition as a stoppage in the functioning of the kidneys can hinder all the procedures of filtering waste, balancing fluids, and managing electrolytes. If you or someone you know is facing this issue, you need to make sure that you are able to access diagnostic and treatment opportunities from the experts at RG Stone Urology & Laparoscopy Hospital. 

 

In this blog post, we extensively discuss the different strategies that one can employ to ensure the possibility of preventing the trouble of Acute Kidney Injury. By following these tips and techniques, you can make certain that you are able to avoid a lot of pain and stress. With the help of experts, you can also make sure to keep an eye on developing symptoms. If there are any issues, you need to consult the experts immediately. 

How to Prevent the Development of Acute Kidney Injury?

The following are some of the ways you can prevent the development of acute kidney injury: 

Hydration is Imperative 

One of the key ways you can make sure that you are able to avoid developing the issue of ACI is by making certain that you are paying attention to hydration. One needs to make sure that you are able to drink at least 7-8 glasses of water each day. 

Pay Attention to Chronic Conditions 

It is also essential to make sure that you are able to pay attention to any and all chronic conditions. One needs to make sure that you are able to manage your chronic conditions, such as diabetes, in an effective manner. Diabetes can effectively ruin your kidney system if not handled correctly.

Consider Your Medications 

It is also essential to make sure that you can consider your medications. More potent medications leave a mark on your kidneys in a critical manner. If one relies on medication too often, it can lead to the development of ACI.

Seek Infection Treatment 

If you have developed an infection, it is also essential to make sure that you are able to seek treatment whenever and however possible. One must not let the infection grow and compound into an intensive issue. 

Healthy Lifestyle 

Furthermore, it is generally essential to make sure that you can thoroughly and effectively have and maintain a healthy lifestyle. One needs to make sure that they are ingesting the right food items and incorporating healthy habits into their routine. 

Conclusion 

Developing any trouble with the kidneys can be thoroughly difficult to manage, all things considered. One needs to make sure that they are able to prevent suffering from these issues. With the help of experts at RG Stone Urology & Laparoscopy Hospital, you can make certain that you are able to understand the ways in which you can prevent developing the trouble of Acute Kidney Injury in an effective manner. Our team ensures that you are able to comprehend symptoms to keep an eye out for, as well as ways of preventing the ACI from developing. 

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क्या किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है कीमोथेरेपी? इसकी पूरी जानकारी डॉक्टर से जानिए

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कीमोथेरेपी कैंसर से जूझ रहे लोगों के लिए जीवन रक्षक इलाज हो सकता है, जो कि एक उम्मीद और ठीक होने की संभावना प्रदान करता है। बता दें कि कीमोथेरेपी मरीज के कैंसर के इलाज में, सर्जरी से पहले, बाद या फिर कई बार बिना सर्जरी के भी दी जाती है। पर इस दौरान मरीज़ के शरीर पर कई तरह के साइड इफैक्ट्स भी देखने को मिलते हैं, जैसे कि मरीज के बाल झड़ना, शरीर का काला पड़ना, मुंह में छाले होना और भूख की कमी लगना आदि। आमतौर पर बाहरी लक्षण तो एक मरीज को दिखाई दे जाते हैं, पर शरीर के अंदरूनी नुकसान को वह बिल्कुल भी समझ नहीं पाते हैं। दरअसल कई बार लगातार कीमोथेरेपी करवाने के बाद कुछ मरीजों को पेशाब में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आपको बता दें कि यह लक्षण व्यक्ति की किडनी से जुड़े होते हैं, तो इस तरह की स्थिति में सवाल उठता है, कि क्या कीमोथेरेपी की वजह से एक व्यक्ति की किडनी पर असर पड़ता है और इसकी क्या वजह होती है? तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

क्या कीमोथेरेपी के कारण किडनी को नुकसान होता है?

डॉक्टर के अनुसार, हाँ कीमोथेरेपी की वजह से मरीजों की किडनी पर बुरा प्रभाव देखने को मिल सकता है। दरअसल कुछ तरह की कीमोथेरेपी दवाएं एक व्यक्ति की किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। आमतौर पर अगर आपको इसके बारे में एक आसान भाषा में समझाया जाए, तो यह दवाइयां कैंसर सेल्स की वृद्धि को रोकने या फिर छोटा करने के लिए होती है। दरअसल यह दवाइयां कैंसर सेल्स पर तो काम करती ही हैं, पर इसके साथ ही शरीर के अन्य अंगों जैसे किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकती है। आमतौर पर किडनी का मुख्य काम हमारे शरीर से जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने का होता है। इस तरह की स्थिति में कीमोथेरेपी की दवाइयां किडनी पर बहुत ही ज्यादा दबाव डाल सकती हैं और इसके साथ ही कई महीनों तक लगातार ऐसा करने से मरीज को किडनी से सबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 

कीमोथेरेपी में किडनी को नुकसान पहुंचने की वजह 

इसके बारे में डॉक्टर का कहना है, कि कीमोथेरेपी के दौरान मरीजों को आमतौर पर उल्टी, थकावट, बाल झड़ना, दस्त या फिर पेट खराब होने जैसी कई परेशानियां होने लग जाती हैं। इस समस्यायों की वजह से किडनी पर भी असर पड़ता है। दरअसल इस दौरान मरीज के पेशाब में प्रोटीन की मात्रा भी बढ़ सकती है, या फिर उनको पेशाब के जरिये खून भी आ सकता है। आपको बता दें कि इसके कई मामलों में मरीज की किडनी में सूजन भी देखने को मिल सकती है, जिसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि

  • कीमोथेरेपी में सिस्प्लैटिन जैसी दवाइयों को देना।
  • ज्यादातर कीमोथेरेपी में हाई डोज वाली दवाइयों को देना।
  • इस दौरान मरीज को पहले से ही किडनी की समस्या होना।
  • शरीर में पानी की कमी होना।
  • मरीज को डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी परेशानी होना।
  • मरीज की उम्र ज्यादा होना, ज्यादा उम्र के कारण किडनी फंक्शन कम होना
  • किडनी का नुकसान कौन से लक्षणों से पता चलता है ?

दरअसल इस पर डॉक्टर का कहना है, कि वैसे तो कीमोथेरेपी के दौरान डॉक्टर मरीज का रोजाना चेकअप करते रहते हैं, ताकि मरीज के शरीर में किसी भी तरह की समस्या का पहले ही पता चल जाए। बता दें कि इसके बावजूद भी अगर मरीज को कीमोथेरेपी के दौरान नीचे दिए बदलाव महसूस होते हैं, तो उसको बिना देरी किये तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। 

  • दिनभर थकावट या कमजोरी महसूस होना। 
  • मरीज के पैरों या फिर चेहरे पर सूजन का होना। 
  • ज्यादातर भूख न लगना। 
  • उल्टी या फिर जी का मिचलाना। 
  • पेशाब में झाग का आना। 
  • पेशाब में खून आना। 
  • रोगी के शरीर में खुजली होना या फिर त्वचा में रूखापन आना। 
  • सांस का फूलना। 
  • पेशाब की मात्रा कम या ज्यादा होना। 
  • रात के समय बार-बार पेशाब का आना। 
  • ध्यान और याददाश्त में कमी होना 

किडनी को सेहतमंद रखने के तरीके

आपको बता दें कि कैंसर के मरीजों को डॉक्टर के द्वारा कुछ टिप्स दिए गए हैं, जिनको आमतौर पर कीमोथेरेपी के दौरान इस्तेमाल किया जा सकता है। 

  • दरअसल जब भी मरीज कीमोथेरेपी को कराये, तो मरीज को उस से पहले और उसके बाद में खूब पानी पीना चाहिए। 
  • इस दौरान डॉक्टर द्वारा आपको जो भी दवाइयां दी गई हैं, उनको आप नियमित रूप से और समय पर लें। 
  • डॉक्टर की सलाह लेकर ही, नियमित रूप से आप अपने क्रिएटिनिन और यूरिया जैसे किडनी फंक्शन टेस्ट को जरूर कराएं।
  • इस दौरान संतुलित और हेल्दी डाइट का पालन करें। आप अपनी डाइट में नमक और प्रोसेस्ड जैसे फूड को कम करें
  • इस दौरान आप जरूरत से ज्यादा किसी भी तरह की पेनकिलर न लें और डॉक्टर की सलाह पर ही दवाइयों का सेवन करें। 
  • इस दौरान आप नियमित रूप से व्यायाम करें। 
  • ज्यादातर शराब और धूम्रपान के सेवन से अपना बचाव करें। 
  • बता दें कि इस दौरान आप डॉक्टर से बिना पूछे किसी भी तरह का सप्लीमेंट या दवा को न लें।
  • आप अपनी किडनी को सेहतमंद रखने के लिए ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल में रखें। 
  • दरअसल कीमोथेरेपी कैंसर के इलाज के लिए जरूरी होती है। इसलिए कीमोथेरेपी दौरान डॉक्टर की सलाह पर अपने खानपान और दवाइयों पर जरूर ध्यान दें।

निष्कर्ष : कीमोथेरेपी कैंसर के इलाज में प्रभावी होती है और कीमोथेरेपी को कराना मरीज के लिए बहुत कठिन होता है, क्योंकि इस दौरान मरीज को हाई डोज दवाइयां दी जाती है। जिसके कारण मरीज में उल्टी, थकावट, बाल झड़ना, दस्त और पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे साइड इफैक्ट्स देखने को मिलते हैं। कीमोथेरेपी के दौरान शरीर के सभी अंगों पर कोई न कोई प्रभाव जरूर पड़ता है। पर कैंसर के इलाज में इस को करवाना बहुत जरूरी होता है। इस दौरान सिस्प्लैटिन जैसी कुछ दवाइयां किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। मरीज को अगर पहले से ही किडनी की समस्या, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, डिहाइड्रेशन या फिर उम्र बहुत ज्यादा हो, तो इससे किडनी को नुक्सान पहुंचने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए आप कीमोथेरेपी करवाते वक्त किडनी की नियमित जांच करवाना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और इसके साथ ही डॉक्टर की सलाह का पालन करना बहुत जरूरी होता है, ताकि आपका उपचार काफी असरदार भी हो और साथ ही आपकी किडनी सुरक्षित भी रहे। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर आपको भी इस तरह की कोई समस्या हो गयी है और आप इस समस्या से काफी ज्यादा परेशान हैं और आप इस समस्या का इलाज करवाना चाहते हैं, तो आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी और लैप्रोस्कोपी अस्पताल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न 1. कीमोथेरेपी के बाद कौन से अंग खराब हो सकते हैं?

बता दें की कीमोथेरेपी के दौरान शरीर के सभी अंगों पर कोई न कोई प्रभाव जरूर पड़ता है। दरअसल इस दौरान हार्ट, फेफड़े, किडनी और रिप्रोडक्टिव अंगों पर इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है। 

प्रश्न 2. क्या कीमोथेरेपी क्रिएटिनिन को बढ़ाता है?

आमतौर पर कीमोथेरेपी के दौरान कुछ दवाइयां क्रिएटिनिन के स्तर को बढ़ा सकती हैं। इसकी वजह से किडनी को काफी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। आमतौर पर अगर इस दौरान आपके पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस हो, तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह करनी करनी चाहिए 

प्रश्न 3. कीमोथेरेपी के लिए किडनी का टेस्ट क्या है?

आपको बता दें कि कीमोथेरेपी के दौरान ब्लड टेस्ट के माध्यम से क्रिएटिनिन और यूरिक एसिड की जांच की जाती है। दरअसल पेशाब की जांच करके पेशाब में प्रोटीन की मात्रा को चेक किया जाता है। 

 

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किडनी की बीमारी से क्या पैरों में जलन होती है? डॉक्टर से जानें

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आजकल लोगों को शरीर से जुड़े न जानें ऐसे कौन -कौन से रोग हो जाते हैं, जिनके बारे में उनको पता भी नहीं होता है। इन्हीं समस्याओं में से एक है पैरों में जलन होना। दरअसल पैरों में जलन की परेशानी होना एक आम समस्या हो सकती है। अक्सर लोगों को पैरों में जलन की शिकायत रहती है। ज्यादातर लोगों को अपने पैरों में होने वाली जलन, झनझनाहट, सुन्नपन, चुभन और गर्माहट को महसूस करते हैं। कई बार लोगों के पैरों में यह जलन बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, हालांकि आपको इसके प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। पर कई बार लोगों द्वारा इन समस्याओं को थकान, पैरों में दर्द या फिर मौसम के साथ जोड़कर नजरअंदाज कर दिया जाता है। क्योंकि यह समस्याएं लोगों को ज्यादातर रात के वक्त आराम करने के दौरान होती है, जो न सिर्फ लोगों की नींद में परेशानी पैदा करती हैं, बल्कि उनकी दिनचर्या को भी खराब कर देती हैं। आमतौर पर पैरों की जलन कई

तरह की समस्याओं का संकेत हो सकती है, जैसे डायबिटीज, विटामिन की कमी, थायराइड और अन्य कई स्वास्थ्य समस्याएं। पर क्या आपको इसके बारे में पता है, कि आपके पैर में जलन का कारण किडनी से जुड़ी समस्याओं का प्रभाव भी हो सकता है। इसलिए ऐसे में इसको बिलकुल भी नज़रअंदाज न करें। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि किडनी की बीमारी की वजह से पैरों में जलन हो सकती है या फिर नहीं? 

क्या किडनी की बीमारी से पैरों में जलन हो सकती है?

डॉक्टर का कहना है, कि किडनी हमारे शरीर का एक मुख्य अंग होती है, जो हमारे शरीर की गंदगी को बाहर निकालने और कई अन्य जरूरी कामों को करने में मदद करती है। इसके साथ ही यह मिनरल्स के संतुलन को बनाए रखने और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखती है। दरअसल जब हमारी किडनी सही तरीके से काम नहीं करती है, तो हमारे शरीर में टॉक्सिन्स, जैसे कि यूरिया, क्रिएटिनिन और अन्य जहरीले पदार्थ शरीर में जमा होने लग जाते हैं, जो आमतौर पर धीरे-धीरे आपके शरीर की नसों को भी प्रभावित करते हैं, और इसके साथ ही पेरिफेरल न्यूरोपैथी का कारण बनते हैं, दरअसल इस तरह की स्थिति में सबसे पहले मरीज व्यक्ति के पैरों में जलन, झनझनाहट, चुभन, सुन्नता और इसके साथ ही शरीर में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने लग जाते हैं। इसलिए आपको किडनी की समस्या होने पर आपके पैरों में जलन हो सकती है, जबकि यह इसका एक आम लक्षण हो सकता है। 

किडनी की समस्या से पैरों में जलन होने के कारण

यूरेमिक न्यूरोपैथी

विशेष रूप से यूरेमिक न्यूरोपैथी की समस्या तब देखी जाती है, जब किडनी, फेल होने के अंतिम चरण तक पहुंच जाती है। जिसकी वजह से नसों को बहुत ज्यादा नुकसान होता है और इसके कारण पैरों में लगातार जलन, झनझनाहट और पैरों में सुन्नता होने लगती है।

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन 

आमतौर पर शरीर में सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स को संतुलित रखना यह किडनी का एक अहम् काम होता है। जबकि किडनी खराब होने पर इन सब चीजों का संतुलन बिगड़ जाता है। दरअसल ये असंतुलन नसों के काम करने के तरीके को प्रभावित करता है और पैरों में जलन जैसी समस्यायों को बढ़ाता है।

विटामिन बी की कमी

आपको बता दें कि किडनी की समस्या से पीड़ित मरीज को अक्सर पोषण की कमी, खास तौर पर विटामिन बी12 और बी-कॉम्प्लेक्स की कमी का सामना करना पड़ता है। दरअसल यह विटामिन नसों के लिए बहुत ही ज्यादा जरूरी होते हैं। आमतौर पर इन की कमी के कारण ही नसें कमजोर होने लगती है और इसके साथ ही जलन या फिर सुन्नपन जैसी समस्या बढ़ सकती है।

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर

आपको बता दें की डायबिटीज और हाई बीपी, यह दोनों समस्याएं पुरानी किडनी की बीमारी के सबसे आम कारण हैं और इसके साथ ही यह दोनों बीमारियां अपने आप में न्यूरोपैथी की वजह बन सकती हैं, जिसकी वजह से इस से पीड़ित मरीज के पैरों में जलन की समस्या हो सकती है। 

पैरों में जलन होने पर डॉक्टर के पास कब जाएं? 

आमतौर पर अगर किसी व्यक्ति को पहले से ही किडनी से जुड़ी कोई समस्या है, तो वह लगातार पैरों में जलन, झनझनाहट या फिर कमजोरी को महसूस कर सकता है। आपको बता दें कि यह एक नसों में होने वाली गंभीर समस्या की तरफ इशारा हो सकता है। इस तरह की स्थिति को नज़रअंदाज करना बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि असल में यह धीरे धीरे आपके पूरे नर्व सिस्टम को श्रति पहुंचा सकता है। इसलिए अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण नजर आते है, तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। 

  • लंबे समय से आपके पैरों वाली जलन होना। 
  • पैरों में जलन की वजह से नींद का न आना। 
  • आपको चलने या फिर खड़े होने में परेशानी का होना। 
  • आपकी स्किन में कई तरह के बदलाव का होना या सूजन होना। 
  • पैरों में जलन के साथ -साथ पेशाब की समस्या या फिर चेहरे पर सूजन होना। 

 

निष्कर्ष : आजकल लोगों को शरीर से जुड़ी कई तरह की समस्याएं हो रहीं हैं। इनमें से एक पैरों में जलन होना। जिसमें व्यक्ति अपने पैरों में जलन, झनझनाहट, सुन्नपन, चुभन और गर्माहट को महसूस करता है। दरअसल पैरों में जलन की समस्या तकलीफ देने वाली हो सकती है। इसलिए ऐसे में इसको बिलकुल भी नज़रअंदाज न करें, क्योंकि यह आपकी किडनी में होने वाली समस्याओं का संकेत हो सकता है। बता दें की इस समस्या को नज़रअंदाज करने से न सिर्फ आप नसों से जुड़ी समस्यायों के शिकार हो सकते हैं, बल्कि इस से आपकी किडनी फेल होने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए आपके पैरों में होने वाली परेशानी को नजरअंदाज करने की जगह आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर आपको भी पैरों में जलन की समस्या है या फिर इससे संबंधित कोई भी परेशानी है, जिससे आप बहुत ज्यादा परेशान हैं और आप इसका इलाज ढूंढ रहे हैं, तो आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी और लैप्रोस्कोपी अस्पताल में जाकर आप अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न 1.  किडनी खराब होने का पहला संकेत क्या होता है?

दरअसल किडनी खराब होने का पहला संकेत पेशाब की आदतों में बदलाव होना हो सकता है, जैसे सामान्य से ज्यादा या फिर कम पेशाब का आना और इसके साथ ही पेशाब में झाग या खून आना।

प्रश्न 2. कौन से विटामिन की कमी से पैरों में जलन हो सकती है?

विटामिन बी12 की कमी से शरीर में जलन हो सकती है। आमतौर पर इस तरह की स्थिति न्यूरोपैथी की वजह बनती है, जिसके कारण आपको पैरों में जलन, झुनझुनी या फिर सुन्नता महसूस हो सकती है।

प्रश्न 3. पैरों में जलन का मुख्य कारण क्या है?

दरअसल पैरों में जलन के कई कारण हो सकती है, जिसमें सबसे आम न्यूरोपैथी है, जो अक्सर डायबिटीज की वजह से होती है। इसके अलावा विटामिन की कमी, इंफेक्शन, और उसके साथ कुछ स्वास्थ्य स्थितियां भी पैरों में जलन का कारण बन सकती हैं।

 

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क्या किडनी से जुड़ी समस्याओं का कारण बनता है थायराइड? डॉक्टर से जानिए

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आज के समय में लोगों का खानपान बहुत ही ज्यादा बदला गया है। खराब लाइफस्टाइल के चलते आजकल लोगों में थायरॉइड और किडनी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। आपको बता दें की थायरॉइड होने पर एक मरीज को कई तरह की बिमारिओं का सामना करना पड़ सकता है। दरसल थायराइड की समस्या होने पर आपको थकान, कमजोरी और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में कई लोग सोचते हैं, कि किडनी से जुड़ी समस्याओं का कारण  थायराइड बनता है। पर क्या ऐसा वाकई होता है। 

इतना ही नहीं, थायराइड की समस्या होने पर कुछ लोगों का वजन बढ़ता है, तो कुछ मामलों में लोगों का वजन कम भी हो जाता है। आपको बता दें कि थायराइड कई बार किडनी से जुड़ी समस्याओं की वजह बन सकता है। इसलिए इस समस्या से अपना बचाव करने के लिए आपको अपना थायराइड कंट्रोल में रखना चाहिए। कुछ मामलों में थायराइड की वजह से किडनी के फंक्शन पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। आइये इस लेख के माध्यम से डॉक्टर से इसके बारे में और जानते हैं। 

क्या किडनी से जुड़ी समस्याओं का भी कारण बनता है थायराइड?

डॉक्टर के अनुसार अगर आप थायराइड के मरीज हैं, तो आपको इसका इलाज जल्द से जल्द शुरू करना बहुत ज्यादा जरूरी है। ताकि आपको इसकी वजह से शरीर में कोई और समस्याएं न हो सके। आपको बता दें कि कुछ मामलों में थायराइड होने पर आपके किडनी फंक्शन पर भी काफी प्रभाव पड़ सकता है। कुछ मामलों में जब व्यक्ति का थायरॉइड बढ़ता है, तो किडनी शरीर में से जहरीले तत्वों को साफ कर पाने में सक्षम नहीं रहती है। दरअसल, थायरॉयडिज्म होने पर व्यक्ति के शरीर में फ्लूड रिटेंशन की समस्या हो सकती है। इस तरह की स्थिति में किडनी पर बहुत ज्यादा जोर पड़ता है। जिसके कारण किडनी में से जहरीले तत्व सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाते हैं। 

थायराइड का किडनी फंक्शन पर क्या प्रभाव पड़ता है? 

आमतो पर अगर आप थायरॉइड की समस्या से पीड़ित हैं, तो इस तरह की स्थिति में सबसे ज्यादा असर आपकी किडनी फंक्शन्स पर पड़ता है। जब किडनी फंक्शन्स पर 

असर पड़ता है, तो किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है या कई बार किडनी सुचारू रूप से काम करने में असमर्थ हो जाती है। इसकी वजह से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर बैलेंस में नहीं होता है, जिसके कारण किडनी फंक्शन पर काफी ज्यादा प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही अगर आपको हाइपरथायरॉइडिज्म है, तो आपको इसकी वजह से पेशाब में से प्रोटीन लीक होने की भी समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में इसकी वजह से किडनी डैमेज होने का भी खतरा बना रहता है।

थायराइड शरीर के किन हिस्सों को प्रभावित करता है?

दरअसल थायराइड होने पर शरीर के कई हिस्से प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि यह हार्मोन को बनाता है, जो आमतौर पर मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में मदद करते है। थायराइड शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकता है, जैसे कि 

  1. इससे आपके दिल की धड़कन तेज या धीमी हो सकती है और आपका ब्लड प्रेशर बढ़ने के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ सकता है, जिसकी वजह से आपको दिल की समस्याएं हो सकती हैं।
  2. इस तरह की स्थिति में आपको शारीरिक ऊर्जा की कमी के कारण बहुत ज्यादा थकावट और सुस्ती महसूस हो सकती है, और इसके साथ ही चिड़चिड़ापन भी हो सकता है।
  3. इसके कुछ मामलों में आपको मांसपेशियों और जोड़ों में कमजोरी, दर्द और अकड़न महसूस हो सकती है। इसके अलावा बोन डेंसिटी पर भी प्रभाव पड़ता है और साथ ही हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। 
  4. दरअसल थायराइड हार्मोन कई बार त्वचा और बालों पर भी अपना प्रभाव डाल सकता है, जिसके कारण आपकी त्वचा रूखी हो सकती है और बाल झड़ सकते हैं।
  5. इसके कुछ मामलों में याददाश्त, मूड और एकाग्रता पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। 
  6. इस तरह की स्थिति में आपका तंत्र खराब हो सकता है, जिसकी वजह से आपको कब्ज या दस्त की समस्या हो सकती है।
  7. इसकी वजह से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी कमजोरी आ सकती है। 

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

  1. अपनी किडनी को स्वस्थ रखने के लिए आपको अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत होती है। 
  2. इसके लिए आपको दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। दिन में कम से कम आपको 7 से 8 गिलास पानी पीना चाहिए। 
  3. किडनी को स्वस्थ रखने के लिए आपको फल, सब्जियों और प्रोटीन से भरपूर फूड्स को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। 
  4. किडनी के स्वास्थ्य को हेल्दी रखने के लिए आपको नमक का सेवन कम करना चाहिए।
  5. किडनी को हेल्दी रखने के लिए आपको शराब और धूम्रपान का सेवन करने से जितना हो सके परहेज करना चाहिए।
  6. इस तरह की स्थिति में आपको अपने ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना चाहिए। 

निष्कर्ष

लोगों के खराब लाइफस्टाइल की वजह से आजकल थायराइड और किडनी से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं। थायराइड होने पर व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं हो सकती हैं जैसे थकान, कमजोरी और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी कई समस्याएं आदि। डॉक्टर के अनुसार अगर आपको थायराइड है, तो आपको इसका इलाज जल्द से जल्द करवाना चाहिए। ताकि इसकी वजह से शरीर में कोई और समस्या न बढ़े। अगर आपको थायराइड की समस्या है, तो ऐसे में सबसे ज्यादा असर आपकी किडनी फंक्शन पर पड़ता है। इसके कारण किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है या कई बार किडनी सुचारू रूप से काम करने में असमर्थ हो जाती है। इसके अलावा अगर आपको हाइपरथायरॉइडिज्म है, तो इसकी वजह से पेशाब में से प्रोटीन लीक हो सकता है और कुछ मामलों में किडनी डैमेज होने का खतरा बना रहता है। इस तरह समस्या होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर आपको भी थायराइड की समस्या है, और इसकी कारण आपको किडनी में समस्या हो गयी है और आप इस से काफी परेशान हैं और आप इसका इलाज करवाना चाहते हैं, तो आप आज ही आर. जी. स्टोन यूरोलॉजी एंड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी ले सकते हैं।  

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न 1. क्या थायराइड से किडनी खराब हो सकती है?

दरअसल थायराइड होने पर किडनी खराब नहीं होती है, पर इसकी वजह से किडनी पर कई तरीकों से प्रभाव पड़ सकता है। इस तरह की स्थिति में किडनी फंक्शन पर भी प्रभाव पड़ सकता है। 

प्रश्न 2. थायराइड होने से शरीर में क्या-क्या समस्याएं होती है?

थायराइड होने पर व्यक्ति के शरीर पर कई तरीकों से प्रभाव पड़ सकता है। इसकी वजह से कई बार थायराइड ग्लैंड का आकार भी बढ़ सकता है और इसके साथ ही आपका वजन भी कम हो सकता है। 

प्रश्न 3. थायराइड में कहां-कहां दर्द हो सकता है?

आमतौर पर थायराइड की वजह से आपको गर्दन के पीछे के हिस्से में दर्द महसूस हो सकता है। इसके कुछ मामलों में आपको गर्दन के आस-पास के हिस्से में भी दर्द का अनुभव हो सकता है। 

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