510-L, Model Town Ludhiana – 141002 (India)

आखिरकार किन कारणों की वजह से किडनी के मरीजों को हो सकती है खुजली की समस्या? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

Categories
Hindi

आखिरकार किन कारणों की वजह से किडनी के मरीजों को हो सकती है खुजली की समस्या? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

Loading

दरअसल, शरीर के सभी अंग अपनी-अपनी जगह एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, जैसे कि दिमाग के बिना पुरे शरीर का चल पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल होता है, तो वैसे ही हमारे शरीर में मौजूद किडनी की सेहत ठीक न होने की वजह से शरीर में मौजूद जहरीले पदार्थों का शरीर से बाहर निकल पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है। दरअसल, किडनी को शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग माना जाता है, जो शरीर में खून को छानकर, जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने में हमारी काफी ज्यादा सहायता करती है। इस तरह की स्थिति में, जब किसी व्यक्ति की किडनी में कोई समस्या होती है, तो इस दौरान किडनी के काम करने की क्षमता पर काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसकी वजह से एक व्यक्ति के शरीर में कई तरह के बदलाव होने लग जाते हैं। 

किडनी की बीमारी कोई आम समस्या नहीं, बल्कि यह एक गंभीर बीमारी होती है, जिसकी वजह से एक व्यक्ति को शरीर से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, इन्हीं समस्याओं में से एक है व्यक्ति के शरीर में तेज खुजली होना। आम तौर पर, डॉक्टरी भाषा में इस तरह की स्थिति को यूरेमिक प्रुरिटस या फिर सीकेडी-एसोसिएटेड प्रुरिटस के नाम से जाना जाता है। किडनी की समस्या से पीड़ित मरीजों में होने वाली खुजली की समस्या के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें उच्च फास्फोरस और कैल्शियम होना, डायलिसिस की प्रकिर्या ठीक से न हो पाना, खून में जहरीले पदार्थों का जमा होना, त्वचा में रूखापन आ जाना, इम्यून सिस्टम में बदलाव होना और शरीर में सूजन होना क़स्दे कई कारण शामिल हो सकते हैं। समस्या के इन कारणों पर ध्यान न देने पर खुजली और भी ज्यादा बढ़ सकती है, जिससे आपको और भी ज्यादा परेशानी हो सकती है। समस्या को गंभीर बनाने से अच्छा है, कि समस्या का पता चलते ही आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

किडनी की समस्या से पीड़ित मरीजों में खुजली की समस्या क्यों होती है?

वैसे तो, त्वचा में खुजली होना एक आम समस्या होती है, पर अगर यह किसी समस्या के कारण हो रही है, तो समस्या गंभीर हो सकती है। त्वचा में खुजली होना, जिसको यूरेमिक प्रुरिटस के नाम से भी जाना जाता है। यह समस्या ज्यादातर किडनी की गंभीर समस्या से पीड़ित मरीजों में आम देखी जा सकती है। विशेष तौर पर, जो लोग क्रोनिक किडनी फेलियर वाले होते हैं, या फिर जो लोग डायलिसिस पर होते हैं। किडनी की समस्या के दौरान, शरीर में होने वाले बदलावों की वजह से त्वचा पर खुजली का निर्माण हो सकता है। इस समस्या का मुख्य कारण पीड़ित व्यक्ति के खून में वेस्ट पदार्थों का जमा होना, शरीर में फास्फोरस का उच्च स्तर होना, शरीर में कैल्शियम असंतुलित होना और त्वचा में काफी ज्यादा रूखापन होना होता है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती है, तो शरीर में मौजूद वेस्ट प्रोडक्ट खून में मिल जाते हैं, जिससे त्वचा में जलन होती है और शरीर में लगातार खुजली होती रहती है।

किडनी के मरीजों में होने वाली खुजली के कारण?

  1. उच्च फास्फोरस और कैल्शियम होना 

जब किसी व्यक्ति के शरीर में फास्फोरस की मात्रा काफी ज्यादा हो जाती है और साथ ही कैल्शियम का स्तर असंतुलित हो जाता है, तो यह त्वचा में होने वाली खुजली का एक बहुत बड़ा कारण बनता है। 

  1. खून में जहरीले पदार्थों का जमा होना 

जब किसी व्यक्ति की किडनी में कोई समस्या या फिर कोई खराबी आ जाती है, तो ऐसे में शरीर से वेस्ट पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते हैं और वह खून में मिलकर त्वचा के नीचे इकट्ठे हो जाते हैं और त्वचा में खुजली का कारण बनते हैं। 

  1. त्वचा में सूखापन होना 

दरअसल, गुर्दे की पुरानी बीमारी होने की वजह से त्वचा में नमी की कमी हो जाती है, जिसकी वजह से त्वचा में काफी ज्यादा खुजली होना शुरू हो जाती है। 

  1. इम्यून सिस्टम में बदलाव होना 

हालांकि, हम में से ज्यादातर लोग किडनी की ही समस्या से पीड़ित रहते हैं। असल में, जब कोई व्यक्ति किडनी की बीमारी से पीड़ित होता है, तो इस वजह से उस व्यक्ति का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर हो जाता है और इस वजह से स्किन में सूजन और खुजली की समस्या बनी रह सकती है।

  1. डायलिसिस की प्रक्रिया ठीक से न हो पाना 

हालांकि, अगर डायलिसिस ठीक तरीके से नहीं किया जाता है, तो ऐसे में, शरीर में से जहरीले पदार्थ अच्छे या फिर पुरे तरीके से बाहर नहीं निकल पाते हैं, जिसकी वजह से त्वचा में खुजली की समस्या बनी रहती है। 

निष्कर्ष: किडनी की बीमारी कोई आम समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर समस्या है, जिससे एक व्यक्ति को शरीर से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें शरीर में तेज खुजली होना भी शामिल है। हालांकि, कई कारणों की वजह से किडनी से पीड़ित मरीजों के शरीर पर खुजली की समस्या हो सकती हैं, जिसमें उच्च फास्फोरस और कैल्शियम होना, डायलिसिस की प्रकिर्या ठीक से न हो पाना, खून में जहरीले पदार्थों का जमा होना, त्वचा में रूखापन आ जाना, इम्यून सिस्टम में बदलाव होना और शरीर की सूजन होना जैसे कारण शामिल हो सकते हैं। अगर इन कारणों पर ध्यान न दिया जाए, तो इससे किडनी के साथ-साथ खुजली की समस्या भी कई ज्यादा बढ़ सकती है। इसलिए, किडनी की समस्या होने पर, खुजली की समस्या को आम समझ कर बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, त्वचा पर ज्यादा खुजली महसूस होने पर, बिना कोई देरी किए आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और किडनी से जुड़ी किसी भी तरह की गंभीर से आम समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल के विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Categories
Hindi

आखिर क्या होता है किडनी कैंसर? डॉक्टर से जानें, इस समस्या के लक्षण, कारण और इलाज के तरीकों के बारे में!

Loading

आज हर कोई किडनी से जुड़ी तरह-तरह की समस्याओं का सामना कर रहा है, जिसमें किडनी कैंसर भी शामिल है। आपको बता दें, कि किडनी कैंसर कोई छोटी मोटी बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जिस पर ध्यान देना अति आवश्यक होता है। ऐसे में, लोग जानना चाहते हैं, कि किडनी कैंसर क्या होता है? दरअसल, किडनी कैंसर वो होता है, जिसमें किडनी के सेल्स बेकाबू होकर बढ़ने लगते हैं और ट्यूमर का रूप धारण कर लेते हैं। दरअसल, किडनी शरीर के अहम अंगों में से एक है, जो न केवल शरीर में खून को साफ़ करने का काम करती है, बल्कि यह शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में भी काफी ज्यादा सहायता प्रदान करती है। आइये इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

क्या हो सकते हैं किडनी कैंसर के लक्षण? 

किडनी कैंसर की शुरुआत में किसी भी तरह का कोई भी लक्षण नजर नहीं आता है। पर, जैसे-जैसे समस्या आगे बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे यह समस्या फैलती जाती है, जिससे कि इस समस्या के बहुत से लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे कि 

  1. पेशाब करते वक्त खून आना। 
  2. पीठ या फिर कमर की एक तरफ लगातार दर्द होना। 
  3. हर रोज काफी ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होना। 
  4. पेट के आस पास गाँठ का अनुभव होना। 
  5. बिना किसी वजह के व्यक्ति का वजन कम हो जाना। 
  6. बहुत ही कम भूख लगना। 

दरअसल, अगर आपको इस तरह के लक्षणों का अनुभव होता है, तो आपको तुरंत पाने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि, यह लक्षण किडनी में बनने वाले कैंसर के हो सकते हैं, जिसे नजरंअदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। 

क्या हो सकते हैं किडनी कैंसर के कारण? 

  1. आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि धूम्रपान वो चीज है, जो किडनी में कैंसर का एक प्रमुख कारण माना जाता है। दरअसल, धूम्रपान शरीर में कैंसर पैदा करने वाले रसायनों के प्रभाव को काफी ज्यादा तेज कर देता है। 
  2. लंबे समय से चल रहा हाई ब्लड प्रेशर भी किडनी कैंसर का कारण बनता है। 
  3. कुछ प्रकार की दर्द निवारक दवाइयां भी किडनी कैंसर का कारण बनती हैं।
  1. अधिक मोटापे के कारण भी लोगों में किडनी कैंसर का खतरा अधिक बना रहता है। 

किस तरह किडनी कैंसर की जांच की जाती है? 

किडनी कैंसर की जांच करने के लिए कई तरह के उपायों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचें शामिल होती हैं। इन टेस्ट का इस्तेमाल करके किडनी में होने वाली असामान्य वृद्धि या फिर ट्यूमर जैसी समस्या का पता लगाया जाता है। दरअसल, इसके कुछ मामलों में बायोप्सी का रास्ता भी चुना जा सकता है। 

आखिर किस तरह किया जाता है किडनी कैंसर का इलाज? 

  1. आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि सबसे पहले किडनी कैंसर का इलाज करने के लिए ट्यूमर का आकार और मरीज की स्थिति को देखा जाता है। क्योंकि, इस समस्या का इलाज इन दोनों पर ही निर्भर करता है। 
  2. किडनी कैंसर की शुरुआत में ही सर्जरी का विकल्प सबसे ज्यादा अच्छा और प्रभावी माना जाता है। इस प्रक्रिया में, ट्यूमर से प्रभावित हिस्से को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है 
  3. किडनी कैंसर के इलाज के इस तरीके में, नेफ्रेक्टोमी की जाती है, जिसमें केवल किडनी में मौजूद ट्यूमर को निकाल दिया जाता है और साथ में किडनी को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाता है। 

किडनी कैंसर से बचने के लिए क्या किया जा सकता है? 

किडनी कैंसर से बचने के लिए आप निम्नलिखित उपायों को अपना सकते हैं, जैसे कि 

  1. ऐसे में, धूम्रपान से दूरी बनाकर रखें। 
  2. किडनी की सेहत के लिए बैलेंस डाइट का सेवन करें। 
  3. रेगुलर एक्सरसाइज या फिर योगाभ्यास करें। 
  4. अपने बढ़ते वजन को कंट्रोल में रखें। 
  5. हाई ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों को कंट्रोल में रखें। 

निष्कर्ष: किडनी कैंसर एक आम समस्या है, जिस पर ध्यान न दिया जाये, तो जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसलिए, इसको एक जानलेवा बीमारी कहा जाता है। इस लेख में बताये इस समस्या के लक्षणों और कारणों की पहचान करके असल समस्या का पता किया जा सकता है और वक्त पर समस्या का हल निकाला जा सकता है। किडनी कैंसर की पहचान करने के लिए आप सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई जैसे विकल्पों का चुनाव कर सकते हैं। यह इस समस्या में काफी ज्यादा लाभदायक साबित हो सकते हैं। ऐसे में, इस बात का ध्यान रहे, कि पेशाब से जुड़ी समस्याएं भी किडनी कैंसर का कारण बन सकती है। समस्या का पता चलते ही आपको चरण अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और किडनी से जुड़ी कीड़ी भी गभीर समस्या का समाधान पाने के लिए आप अजा ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न 1. किडनी कैंसर किन लोगों को अधिक प्रभावित करता है?

दरअसल, किडनी कैंसर ज्यादातर 50 से 70 साल से भी ज्यादा उम्र के लोगों, मोटापे जैसी समस्या से जूझ रहे लोगों, धूम्रपान करने वाले लोगों, हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों और पुरानी गुर्दे की बीमारी से पीड़ित लोगों को काफी ज्यादा प्रभावित करती है। 

प्रश्न 2. क्या किडनी कैंसर एक जानलेवा बीमारी है?

विशेष तौर पर, अगर किडनी कैंसर जैसी समस्या की पहचान देर से हो, तो हाँ किडनी कैंसर की बीमारी एक गंभीर और जानलेवा बीमारी हो सकती है।

प्रश्न 3. क्या किडनी कैंसर का इलाज संभव हो सकता है? 

हालांकि, अगर किडनी कैंसर जैसी समस्या की पहचान इसके शुरुआती चरणों में हो जाये, तो हाँ किडनी कैंसर का इलाज संभव हो सकता है। 

प्रश्न 4. किन चीजों का सेवन करने से किडनी कैंसर हो सकता है? 

आम तौर पर, किडनी कैंसर ज्यादातर, प्रोसेस्ड और रेड मीट, तेज़ तापमान पर पका हुआ मीट, ज्यादा नमक वाला भोजन, मीठे ड्रिंक्स और सोडा, तंबाकू, शराब और स्मोकिंग का सेवन करने से होता है।

Categories
Hindi

किडनी में पथरी होने पर किन चीजों का सेवन करना हो सकता है बेहद नुकसानदायक? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

Loading

दुनिया में आधे से ज्यादा लोग किडनी से जुड़ी तरह-तरह की समस्याओं से पीड़ित हैं। फिर चाहे वो किडनी डैमेज होने की समस्या हो या फिर किडनी में पथरी की समस्या हो। आज के समय में, लोगों को ज्यादातर किडनी में पथरी की समस्या परेशान करती है। यह समस्या आम है, पर उतनी ही ज्यादा दर्दनाक भी है। इस समस्या के कारण लोगों के सभी काम बुरी तरीके से प्रभावित हो जाते हैं। दरअसल, इस गंभीर समस्या को ठीक करने के लिए लोगों के पास न जाने कितने ही घरेलू उपाय उपलब्ध है। जिसमें बीयर पीने से पथरी का ठीक होना और पत्थरचट्टा के पत्ते को चबाने से किडनी में मौजूद पथरी मल के माध्यम से बाहर आना शामिल है। इसी तरह हम में से कुछ लोगों का मानना है, कि पथरी के दौरान टमाटर, पालक और चाय का सेवन करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। 

असल में, यह सच है, या फिर नहीं इस मामले में डॉक्टर का कहना है, कि ज्यादातर इंटरनेट पर आधी-अधूरी जानकारी उपलब्ध है, जिसने व्यावहारिक रूप से इन पौष्टिक चीजों को किडनी का दुश्मन करार दे दिया है। दरअसल, डॉक्टर के अनुसार, सिमित मात्रा में इन का सेवन किडनी के लिए नुकसानदायक नहीं होता है और अगर इन का सेवन काफी ज्यादा मात्रा में किया जाये, तो यह किडनी में पथरी के दौरान नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। क्योंकि, इन में काफी मात्रा में ऑक्सालेट पाया जाता है, जो किडनी में पथरी का कारण बनता है। इसलिए अधिक मात्रा में इन का सेवन नुकसानदायक साबित हो सकता है। किडनी की गंभीर समस्या होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

किडनी में पथरी होने पर किन चीजों का सेवन करना हो सकता है बेहद नुकसानदायक? 

  1. पालक का सेवन करना 

दरअसल, पालक में ऑक्सलेट की मात्रा काफी होती है। अगर आपका किडनी की पथरी का इतिहास है, तो आपको इसका सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। हालांकि, सेहतमंद लोगों के लिए पालक आयरन और विटामिन एक अच्छा स्रोत माना जाता है। ऐसे में अगर आप पालक को कच्चा खाने की बजाए, इसको उबालकर खाते हैं, तो यह सेहत के लिए बेहतर हो सकता है। ऐसा करने पर ऑक्सलेट का स्तर कम हो जाता है। 

किडनी में पथरी बनने के कारण

डॉक्टर के अनुसार केवल पालक या फिर टमाटर का सेवन करने से पथरी नहीं होती है, बल्कि लाइफस्टाइल से जुड़ी कुछ गलत आदतों से भी पथरी हो सकती है, जैसे 

  1. निर्जलीकरण होना। 
  2. अत्यधिक नमक का सेवन करना। 
  3. प्रोटीन का अधिकता सेवन करना। 

निष्कर्ष: आज किडनी की पथरी से लाखों लोग पीड़ित हैं और यह समस्या ज्यादातर लोगों के गलत खान पान और गैर सेहतमंद जीवनशैली के कारण ही होती है। किडनी में पथरी काफी दर्दनाक हो सकती है, यदि इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या आगे चलकर एक गंभीर रूप भी ले सकती है, जो एक व्यक्ति की सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक संकेत नहीं होता है। इस समस्या में ज्यादातर पालक, टमाटर और चाय के सेवन को जिम्मेदार माना जाता है, क्योंकि इन में ऑक्सालेट की काफी मात्रा पाई जाती है, जो किडनी में पथरी का कारण बनती है। इसलिए, किडनी में पथरी होने पर पालक, टमाटर और चाय के सेवन को काफी नुकसानदायक माना  जाता है। इसके अलावा, अगर इन का सेवन सामान्य मात्रा में किया जाये, तो यह जहरीले नहीं होते हैं, क्योंकि यह आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। ऐसे में, सवाल उठता है, कि आप क्या खा रहे हैं, पर साथ में सवाल यह भी उठता है, कि आप अपने शरीर को कितना हाइड्रेट रखते हैं, कि आप दिन में कितना पानी पी रहे हैं और कितना नमक का सेवन कर रहे हैं। बेहतर होगा, कि आप अपने शरीर को ज्यादा से ज्यादा हाइड्रेट रखें और नमक का सेवन कम करें। इससे किडनी की पथरी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अगर आप पहले से ही किडनी की किसी समस्या से पीड़ित हैं, तो ऐसे में अपने डॉक्टर से संपर्क करना न भूलें। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और किडनी से जुड़ी किसी भी समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. कैसे बनती है किडनी की पथरी?

डॉक्टर के अनुसार किडनी में पथरी विशेष तौर पर शरीर में कैल्शियम ऑक्सालेट के जमा होने के कारण बनती है। पालक, टमाटर और चाय में काफी मात्रा में ऑक्सालेट मौजूद होता है, इसलिए किडनी में पथरी बनने का सबसे बड़ा कारण इन्हीं चीजों को माना जाता है। 

प्रश्न 2. किन समस्याओं के कारण किडनी डैमेज होने का खतरा बना रहता है? 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि बेकाबू शुगर और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं के कारण किडनी डैमेज होने का खतरा काफी ज्यादा बना रहता है। ऐसे में, विशेष देखभाल की काफी ज्यादा जरूरत होती है। 

प्रश्न 3. किस स्थिति में किडनी की पथरी हानिकारक साबित हो सकती है? 

आज किडनी में मौजूद पथरी मूत्र मार्ग में रुकावट पैदा कर देती है, जिसके कारण पेशाब का प्रवाह रुक जाता है और इसकी वजह से संक्रमण पूरी किडनी तक फैल जाता है। तो इस तरह की स्थिति में किडनी की पथरी एक व्यक्ति के लिए काफी हानिकारक हो जाती है। 

प्रश्न 4. किस आकार की पथरी में जीवन सुरक्षित होता है? 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि अगर किडनी की पथरी की बात की जाए, तो 4 से 5 मिलीमीटर या फिर इससे छोटी पथरी को सुरक्षित माना जाता है। इसमें दर्द तो होता है, पर यह बिना किसी सर्जरी के केवल रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने से और कुछ दवाओं का सेवन करने पर ही अपने आप पेशाब के माध्यम से बाहर निकल जाती हैं।

Categories
Hindi

आखिर किन मेडिकल कंडीशन्स की वजह से पेशाब पर कंट्रोल न रहना और लीक होने की समस्या हो सकती है? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

Loading

दरअसल, शरीर में होने वाली कमजोरी का अहसास लगभग सभी लोगों को उम्र बढ़ने पर हो ही जाता है। मतलब कि जैसे -जैसे हमारी उम्र में बढ़ोतरी होती है, वैसे-वैसे ही हमारे शरीर में कमजोरी आने लग जाती है। उम्र बढ़ने के कारण न केवल हमारा शरीर कमजोर होता है, बल्कि इसकी वजह से त्वचा में झुर्रियां आना, बालों का सफेद होना और हड्डियों का कमजोर हो जाना जैसी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उम्र बढ़ने के कारण लोगों से ठीक से चला भी नहीं जाता है, जिसकी वजह से उनके रोजाना के काम क़ाफी ज्यादा प्रभावित हो जाते हैं। इसके अलावा, उम्र बढ़ने के कारण शरीर के ऑर्गन भी ठीक तरीके से काम करना बंद कर देते हैं और शरीर को काफी ज्यादा कमजोर बना देते हैं, जिसकी वजह से एक व्यक्ति चलने, उठने, बैठने और खड़े होने में भी काफी ज्यादा दिक्क्त महसूस करने लग जाता है। बढ़ती उम्र के कारण लोगों को तरह- तरह कि समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसमें किसी भी तरह का कोई भी शक नहीं है। इस दौरान अक्सर लोगों को पेशाब रोकने में काफी ज्यादा दिक्कत होने लग जाती है। दरअसल, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग की रिपोर्ट के अनुसार, लोगों में बढ़ती उम्र के कारण पेशाब को कंट्रोल करने की शक्ति काफी ज्यादा कम या फिर कमजोर हो जाती है, जिसकी वजह से इस उम्र में आकर एक व्यक्ति को काफी ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

आम तौर पर, इस सब के बावजूद क्या आप जानते हैं, कि बहुत सी ऐसी मेडिकल कंडीशन की वजह से लोगों को अपने पेशाब को कंट्रोल न कर पाने और साथ में, पेशाब लीक होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, इन मेडिकल कंडीशन्स की वजह से लोगों को पेशाब लीक होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें पेल्विक फ्लोर मसल्स का काफी ज्यादा कमजोर हो जाना, नर्व से जुड़ी कोई समस्या होना, पुरानी बीमारियां होना और मोटापा आदि होना जैसी कई तरह की मेडिकल कंडीशन्स शामिल हो सकती हैं। दरअसल, इस तरह की समस्या को कंट्रोल में रखने के लिए इन मेडिकल कंडीशन पर ध्यान देना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। वक्त रहते इनका इलाज और गंभीर समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

किन मेडिकल कंडीशन्स में पेशाब पर कंट्रोल न रहने और पेशाब लीक होने की समस्या हो सकती है?

आम तौर पर, निम्नलिखित मेडिकल कंडीशन्स की वजह से लोगों को पेशाब लीक होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। 

  • पेल्विक फ्लोर मसल्स का काफी कमजोर हो जाना 

अक्सर ही महिलाओं को गर्भावस्था, मेनोपॉज और डिलीवरी जैसी स्थिति के बाद पेल्विक फ्लोर कमजोर होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। दरअसल, इस तरह की स्थिति में, ज्यादातर खांसने और छींकने जैसी समस्या के दौरान महिलाओं का पेशाब पर कंट्रोल नहीं रहता है और वह लीक हो जाता है। ऐसे में, ज्यादातर महिलाओं को अपना पेशाब रोकने में काफी ज्यादा दिक्कत महसूस होती है। 

  • नर्व से जुड़ी कोई समस्या होना 

दरअसल, एक व्यक्ति बहुत सी ऐसी बीमारियों से पीड़ित होता है, जिसकी वजह से शरीर की नसें काफी ज्यादा खराब हो जाती हैं। आम तौर पर, इसमें पार्किंसन डिजीज, मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी समस्या शामिल होती है। इसके अलावा, रीढ़ की हड्डी में चोट लगने पर भी आपको नसों के खराब होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सककत है। इसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के नाम से जाना जा सकता है। आम तौर पर, जब शरीर की नसें खराब या फिर डैमेज हो जाती हैं, तो इसकी वजह से आपको पेशाब रोकने में काफी ज्यादा दिक्कत महसूस हो सकती है। 

  • कोई पुरानी बीमारी (क्रॉनिक डिजीज) होना 

क्रॉनिक डिजीज के कारण भी आपको पेशाब को रोकने में काफी दिक्कत महसूस हो सकती है। दरअसल, काफी लंबे वक्त तक चलने वाली बीमारियों में हाई ब्लड शुगर यानी कि डायबिटीज जैसी समस्या शामिल हो सकती है। ऐसी बीमारियों के कारण नसें डैमेज हो जाती हैं और इस दौरान ज्यादा देर तक पेशाब को रोकने की क्षमता काफी ज्यादा कमजोर हो जाती है। ऐसे में, पेशाब फिर अपने आप ही बहने लग जाता है। डायबिटीज जैसी समस्या के दौरान पीड़ित व्यक्तियों को बार-बार पेशाब आने की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है। 

  • पेशाब लीक होने जैसी समस्या के दौरान क्या किया जा सकता है?

दरअसल, पेशाब लीक होने जैसी समस्या के दौरान आप निम्नलिखित सुझावों का

पालन कर सकते हैं, इन से समस्या को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है, जैसे कि 

  1. ऐसी समस्या महसूस होने पर लाइफस्टाइल में महत्वपूर्ण बदलाव जरूर करें। 
  2. रात की जींद लेने से पहले तरल पदार्थों का सेवन कम मात्रा में ही करें। 
  3. वजन को नियंत्रण में रखें।
  4. पेल्विक की मजबूती के लिए रोजाना कसरत करें। 

निष्कर्ष: पेल्विक फ्लोर मसल्स का कमजोर होना, नर्व से जुड़ी कोई समस्या होना, पुरानी बीमारियां होना और मोटापा होना जैसी कई समस्याओं के कारण आपको पेशाब लीक होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अगर आपको भी ऐसी कोई समस्या होती है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है, इस दौरान आप समस्या के कारणों की पहचान करके सीधे अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। अगर आपके बढ़ते वजन के कारण आपको पेशाब लीक होने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो इसको नजरअंदाज करने की बजाए आपको तुरंत इसका इलाज करवाना चाहिए। इस दौरान हमको यह नहीं भूलना चाहिए, कि मोटापा के कारण हमें कई बिमारियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, अपने वजन को संतुलन में बनाए रखना जरूरी होता है। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और पेशाब लीक होने जैसी किसी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल के विशेषज्ञों से सम्पर्क कर सकते हैं।

Categories
Hindi

क्या वाकई शरीर में बढ़ती हुई शुगर चुपचाप पहुंचा रही है किडनी को नुकसान? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

Loading

डायबिटीज एक आम समस्या है, जो बहुत से लोगों को प्रभावित कर देती है। इसके कारण लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे कि उनके सारे काम बुरी तरीके से प्रभावित हो जाते हैं। यह समस्या कभी भी और किसी को भी हो सकती है। दरअसल, डायबिटीज केवल शरीर में ब्लड शुगर बढ़ने का नाम नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ यह एक व्यक्ति के बहुत से अंगों को धीरे-धीरे प्रभावित करने वाली एक खतरनाक बीमारी है, जिस पर ध्यान देना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, डायबिटीज एक पुरानी बीमारी है, जिसमें एक व्यक्ति के शरीर में गुलूकोज़ कि मात्रा काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इस तरह की समस्या के दौरान आपको बार-बार पेशाब लगना, काफी ज्यादा प्यास लगना, भूख लगना, काफी ज्यादा थकान महसूस होना, वजन कम हो जाना और धुंधली नजर होना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। इन लक्षणों पर ध्यान देकर इस समस्या का समय पर इलाज होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसके लक्षणों को नजरअंदाज की बजाए, इनपर महत्वपूर्ण ध्यान देना अति आवश्यक होता है।

शायद हम में से बहुत ही कम लोग इसके बारे में जानते होंगे, कि अगर कोई व्यक्ति डायबिटीज जैसी समस्या से काफी लंबे वक्त से परेशान है और वह ठीक से कंट्रोल नहीं हो पा रही है, तो इस दौरान इस समस्या का प्रभाव शरीर के कई अंदरूनी अंगों पर देखने को मिल सकता है और शरीर के इन्हीं अंगों में से एक है किडनी जो इस तरह की समस्या से काफी ज्यादा प्रभावित हो जाती हैं। दरअसल, इस पर डॉक्टर का भी यही कहना है, कि अगर किसी व्यक्ति में डायबिटीज की समस्या काफी लंबे वक्त से चली आ रही है, तो इस समस्या का प्रभाव शरीर के महत्त्वपूर्ण अंग जैसे किडनी पर भी पड़ सकता है। ऐसे में यह भी सच है, कि एक व्यक्ति के शरीर में बढ़ती हुई शुगर चुपचाप किडनी को नुक्सान पहुँचती है। दरअसल, डायबिटीज जैसी समस्या से पीड़ित मरीजों में होने वाली ऐसी ही एक किडनी की बीमारी है, जिसको डायबिटिक नेफ्रोपैथी के नाम से जाना जाता है। अगर आम भाषा में आपको इसके बारे में समझाया जाए, तो यह मधुमेह की समस्या की वजह से होने वाली एक किडनी की बीमारी है, आम तौर पर, जिसका विकास किडनी में धीरे-धीरे होता है और अगर वक़्त रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए और लगातार इस समस्या को नजरअंदाज किया जाए, तो यह किडनी से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है, किडनी फेलियर का कारण भी बन सकती है। इसलिए, वक्त रहते समस्या का समाधान करना जरूरी होता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

ब्लड शुगर का किडनी फंक्शन पर प्रभाव!

दरअसल, हमारे शरीर में किडनी एक सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण अंग होता है, जिसका काम शरीर से फालतू पदार्थों को बाहर निकालना होता है, जिसमें खून से बेकार चीजों को फ़िल्टर करना और शरीर से ज्यादा पानी को बाहर निकालना शामिल होता है। आम तौर पर, किडनी में लाखों छोटी-छोटी सरंचनाएं होती हैं, जिन को नेफ्रॉन और ग्लोमेरुली के नाम से जाना जाता है। दरअसल, यह फिल्टर खून में से गंदगी और पानी को अलग करने का काम करते हैं और पेशाब के माध्यम से उनको बाहर निकाल देते हैं। जब हमारे शरीर में ब्लड शुगर काफी लंबे वक्त तक उच्च स्तर पर रहता है, तो इसकी वजह से हमारी किडनी में मौजूद इन छोटी-छोटी संरचनाओं की काफी ज्यादा हानि होती है। 

आपको बता दें, कि अगर वक्त रहते डायबिटीज का इलाज न किया जाए, तो यह इतनी ज्यादा खतरनाक हो जाती है, कि इसके कारण ग्लोमेरुली की झिल्ली कमजोर होकर लीक होने लगती है, जिसकी वजह से शरीर में से एल्ब्यूमिन जैसे महत्वपूर्ण ब्लड प्रोटीन गलती से फिल्टर होकर पेशाब के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं। आम तौर पर, एक मात्र यही डायबिटिक नेफ्रोपैथी का शुरुआती संकेत होता है, जिस पर ध्यान न देने पर किडनी के फिल्टर करने की शक्ति कम होने लगती है। 

आखिर ब्लड शुगर किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाता है?

ब्लड शुगर किडनी को निम्नलिखित तरीकों से नुकसान पहुंचाता है, जैसे कि 

  • छोटी ब्लड वेसल को नुकसान होना 

आम तौर पर, किडनी की नाजुक रक्त-नलिकाएं और अन्य संरचनाएं हाई ब्लड शुगर की वजह से वक्त के साथ-साथ काफी ज्यादा सख्त और कठोर बन जाती हैं। जिसके इसके कारण वह पहले की तरह प्रभावित रूप से काम नहीं कर पाती हैं। 

  • ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन होना

दरअसल, एक व्यक्ति के शरीर में बढ़ा हुआ शुगर लेवल किडनी में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन का निर्माण कर सकता है, जिसकी वजह से किडनी के टिशू और फ़िल्टरिंग सिस्टम को काफी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। 

  • डायबिटिक नेफ्रोपैथी के शुरुआती संकेत!
  1. पेशाब करते वक्त झाग बनना। 
  2. त्वचा में खुजली का अहसास होना। 
  3. पैरों और टखनों में सूजन आना। 
  4. बार-बार पेशाब आना। 

निष्कर्ष: किडनी से जुड़ी कुछ समस्याओं का खतरा डायबिटीज के मरीजों को भी होता है, इनमें से ही एक बीमारी है डायबिटिक नेफ्रोपैथी। दरअसल, हाई ब्लड शुगर के मरीजों के लिए डायबिटिक नेफ्रोपैथी एक बहुत ही ज्यादा गंभीर बीमारी हो सकती है। समस्या की समय पर पहचान और सही मैनेजमेंट से स्थिति को काफी हद तक कंट्रोल में किया जा सकता है। इस तरह की समस्या से बचने के लिए नियमित जांच, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर पर कंट्रोल काफी ज्यादा जरूरी होता है। इसके अलावा, अगर किसी भी डायबिटीज के मरीज में इस लेख में बताए गए लक्षण नजर आते हैं, तो यह किडनी की सेहत के लिए एक अच्छा संकेत नहीं होता है, इसलिए लक्षण नजर आते ही आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और पेशाब में प्रोटीन की जांच और खून की ईजीएफआर रिपोर्ट करवानी चाहिए। इसके बारे में ज़्यादा जानने के लिए और किडनी से जुड़ी किसी भी समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।

Telephone Icon
whatsup-icon