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किडनी को सेहतमंद रखने के लिए रोजाना कितनी मात्रा में पानी पीना होता है फायदेमंद? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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किडनी को सेहतमंद रखने के लिए रोजाना कितनी मात्रा में पानी पीना होता है फायदेमंद? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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किडनी शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है, इसमें किसी भी तरह का कोई शक नहीं है। यह न केवल शरीर के खून को फिल्टर करती है, बल्कि शरीर में से जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने में भी काफी ज्यादा सहायता प्रदान करती है। आम तौर पर, डॉक्टर का इस पर कहना है, कि शरीर की सेहत के लिए किडनी की अच्छी देखभाल करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने के लिए किडनी को हर तरह से स्वस्थ रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। 

आम तौर पर, किडनी को सेहतमंद रखने के लिए सही खान पान का सेवन करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, इसके साथ- साथ रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना भी काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। पर, आजकल लोग इन चीजों पर ध्यान नहीं देते हैं और किडनी से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का शिकार हो जाते हैं, जो आगे चलकर किडनी फेल होने कारण भी बन सकती है। ऐसे में, हम में से ज्यादातर लोग अपने रोजाना के खान पान पर ध्यान नहीं देते हैं और न ही पर्याप्त मटर में पानी का सेवन करते हैं, जिससे की न केवल दिमागी सेहत प्रभावित होती है, बल्कि किडनी की सेहत भी बुरी तरीके से प्रभावित हो जाती है। ऐसे में, अपनी किडनी को सेहतमंद रखने के लिए आप रोजाना पानी का सेवन कर सकते हैं। ऐसे में, बहुत से लोग जानना चाहते हैं, कि किडनी को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कितने लीटर पानी पीना जरूरी होता है? दरअसल, किडनी को सेहतमंद रखने के लिए रोजाना कम से कम 3 लीटर पानी, यानी कि रोजाना 8 से 10 गिलास पानी पीना काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। 

किडनी को सेहतमंद रखने के लिए एक दिन में कितनी मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए? 

दरअसल, किडनी को सेहतमंद रखने के लिए आप निम्नलिखित अनुसार पानी का सेवन कर सकते हैं, जैसे कि 

  1. दरअसल, डॉक्टर का इस पर कहना है, कि अगर आप अपनी किडनी को सेहतमंद रखना चाहते हैं, तो आपको दिन भर में लगभग 3 से 3.5 लीटर पानी का सेवन करने की काफी ज्यादा जरूरत होती है। आम तौर पर, हर व्यक्ति के लिए यह मात्रा अलग अलग हो सकती है, क्योंकि हर व्यक्ति का शरीर और सेहत अलग-अलग होती है। इसलिए, किडनी को सेहतमंद रखने के लिए एक दिन में कितनी मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए, यह केवल व्यक्ति की उम्र, फिजिकल एक्टिविटी, वजन और मेडिकल कंडीशन पर ही निर्भर करता है। 
  2. यह सभी जानते हैं, कि गर्मियों के मौसम में लोगों के शरीर से पसीना काफी अधिक मात्रा में निकलता है, इसलिए शरीर को अधिक मात्रा में पानी पीने की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से इस मौसम में पानी का सेवन काफी अधिक मात्रा में किया जाना फायदेमंद होता है। 
  3. अगर आप रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करते हैं, तो इससे शरीर में मौजूद अपशिष्ट पदार्थ पेशाब के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं। इससे न केवल किडनी पर दबाव कम पड़ता है, बल्कि किडनी में होने वाली पथरी की समस्या का खतरा बन्हि काफी कम हो जाता है। दरअसल, आपकी जानकरी के लिए आपको बता दें, कि जब आप रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन नहीं करते हैं, तो इससे न केवल आपका पेशाब गाढ़ा हो जाता है, बल्कि इसके कारण किडनी पर काफी ज्यादा दबाव पड़ता है, जो समस्या का कारण बन सकता है। 

जरूरत से ज्यादा पानी का सेवन करने के क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं?

आम तौर पर, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि अगर किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की कोई भी बीमारी नहीं है और वह एक दम स्वस्थ है, तो उस को दिन भर में लगभग 3 लीटर पानी का सेवन करना चाहिए। यह उनकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। हालांकि, ऐसे में जरूरत से ज्यादा पानी का सेवन करना भी हर बार फायदेमंद साबित नहीं होता है। क्योंकि, ऐसे में कुछ लोगों को किडनी से जुड़ी कई बीमारियां, दिल से जुड़ी बीमारियां या फिर सेहत से जुड़ी अन्य समस्याएं हो सकती हैं, जिस में डॉक्टर पीड़ित व्यक्ति को अक्सर पानी कम पीने या फिर पानी की मात्रा को सीमित रखने की सलाह प्रदान करते हैं। इसलिए, इस तरह की समस्या से पीड़ित व्यक्तियों को बिना डॉक्टर कि सलाह के अधिक मात्रा में पानी कासेवन नहीं करना चाहिए। 

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए क्या क्या किया जा सकता है? 

आम तौर पर आप अपनी किडनी को सेहतमंद रखने के लिए नीचे बताए गए उपायों को अपनी जीवनशैली में शामिल कर सकते हैं:

  1. अधिक तेल और मसाले वाले भोजन से बचें। 
  2. ऐसे में, केवल संतुलित आहार को अहमियत दें। 
  3. ऐसे में, आप रोजाना कम से कम 30 मिनट तक एक्सरसाइज और योग करें।
  4. किडनी को सेहतमंद रखने के लिए न केवल पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें, बल्कि एक संतुलित जीवन शैली को भी अपनाएं। 
  5. किडनी की सेहत को बरकरार रखने के लिए अपनी डाइट में हरी सब्जियां और फलों को शामिल करें।

निष्कर्ष: किडनी शरीर के एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंगों में एक माना जाता है। इस की शरीर में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए, इसको सेहतमंद रखना और इस की सेहत का ख्याल रखना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। किडनी किन सेहत को बनाये रखने के लिए रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना किडनी के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। इससे किडनी पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और किडनी में होने वाली पथरी की समस्या का खतरा भी काफी कम हो जाता है। ऐसे में आपको अपनी किडनी को सेहतमंद रखने के लिए एक दिन में कम से कम 3 लीटर पानी पीना चाहिए। ध्यान रहे ऐसे में आपको एक साथ पानी नहीं पीना है, यह पानी आपको पुरे दिन में थोड़ा थोड़ा करके पीना है। अगर आपका खानपान ठीक नहीं है, लाइफस्टाइल में कोई गड़बड़ी है और अगर आपको किसी प्रकार कि कोई बीमारी है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और समय पर अपना किडनी फंक्शन टेस्ट जरूर करवाएं। जिन लोगों के परिवार में किडनी स्टोन या फिर किडनी फेल होने का इतिहास रहा है, तो उनको तो जरूर नियमित अपनी किडनी की जांच करवानी चाहिए। दिल या फिर किडनी से पीड़ित लोगों को पानी का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और किडनी से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल के विशेषज्ञों के साथ संपर्क कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. किडनी में पथरी कितने समय में बन जाती है? 

दरअसल, किडनी में पथरी धीमी गति से बनती है, जिसमें कई हफ्ते, महीने या सालों तक का समय लग सकता है। 

प्रश्न 2. शरीर में पानी की क्या महत्ता है?

दरअसल, आपकी जानकरी के लिए आपको बता दें, कि पानी का सेवन करना एक व्यक्ति के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, इस में किसी भी तरह का कोई शक नहीं है। पानी की शरीर में काफी महत्ता होती है, क्योंकि यह शरीर के तापनाम को कंट्रोल में रखता है, कोशिकाओं तक पोषक तत्व पहुँचता है, जोड़ों में चिकनाई बनाए रखता है, शरीर तक क्सीजन पहुँचता है, पाचन में काफी मदद करता है और जहरीले पदार्थों को बाहर निकलने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करता है। किडनी को सेहतमंद रखने के लिए रोजाना कितनी मात्रा में पानी पीना होता है फायदेमंद? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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आखिर क्या होता है किडनी डायलिसिस प्रक्रिया में? डॉक्टर से जानें, क्या ट्रांसप्लांट से एक बेहतर विकल्प होता है डायलिसिस कराना!

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किडनी हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक मानी जाती है। दरअसल, किडनी को गुर्दा भी कहा जाता है, जिन का स्वस्थ होना सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। किडनी की देखभाल करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योकि यह हमारे शरीर से जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करती है और हमारे खून को भी साफ़ करने में काफी ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए, इसका स्वस्थ रहना एक अच्छा जीवन जीने के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। दरअसल, किडनी में होने वाली समस्या एक व्यक्ति के काम को नहीं, बल्कि उसके पूरे जीवन को बुरी तरीके से प्रभावित करके रख देती है। अगर किडनी में होने वाली समस्याओं का वक्त पर इलाज न किया तो इससे एक व्यक्ति की जान पर भी बन सकती है। इसलिए, किडनी में होने वाली समस्याओं पर विशेष ध्यान देना और वक्त पर इलाज करवाना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। 

 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि जब कोई व्यक्ति किडनी की बीमारी से पीड़ित होता है और उसकी किडनियां शरीर में अच्छे से से काम करना बन कर देती हैं, तो इस तरह की स्थिति में व्यक्ति कि हालत बहुत ही ज्यादा नाजुक सी हो जाती है। इस दौरान वह न तो कुछ सोच पाता है और न ही कुछ अच्छे तरीके से कर पाता है। बस इस तरह की स्थिति में वो केवल एक मरीज बन जाता है, जिस में कि उसका इलाज होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, जब मरीज की किडनियां बिल्कुल ही काम करना बंद कर देती हैं, मतलब कि फेल हो जाती है, तो इस तरह की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को डायलिसिस कराना पड़ता है। ऐसे में, बहुत से लोग जानना चाहते हैं, आखिर किडनी डायलिसिस प्रक्रिया में क्या होता है? दरअसल, डॉक्टर के अनुसार इस प्रक्रिया में सभी डॉक्टर मेडिकल मेडिकल प्रक्रिया का उपयोग करके एक नकली तरीके से शरीर के खून को उसी प्रकार साफ़ करते हैं, जिस तरह शरीर में किडनी करती है।

डायलिसिस जैसी प्रक्रिया के दौरान जहरीले पदार्थों, काफी ज्यादा पानी और कचरे को खून में से निकलकर बाहर किया जाता है। इसके बाद जब किडनी सही तरीके से काम करने लग जाती है, तो शरीर में मौजूद अपशिष्ट पदार्थ अपने आप पेशाब के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाते हैं। किडनी को सेहतमंद रखने के लिए नियमित जांच काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

क्या वाकई डायलिसिस कराना ट्रांसप्लांट से बेहतर होता है?

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि कम से बहुत से लोगों को इसके बारे में कंफ्यूजन रहती है, कि किडनी फेल होने पर, किडनी डायलिसिस कराना बेहतर विकल्प होता है, या फिर किडनी ट्रांसप्लांट कराना एक बेहतर विकल्प होता है। दरअसल, आपकी कंफ्यूजन को दूर करते हुए इस पर डॉक्टर का कहना है, कि इस तरह की स्थिति में यह मरीज पर निर्भर करता है, कि वह इन आखिरी पलों में किस चीज का चुनाव करता है, हालांकि उसको इस दोनों प्रक्रियाओं के बारे में बखूबी जानकारी दे दी जाती है। पर, फिर भी डॉक्टर के हिसाब से ट्रांसप्लांट कराना डायलिसिस से बेहतर होता है। क्योंकि, जब किसी मरीज का डायलिसिस किया जाता है, तो वह एक तय समय पर ही किया जाता है। इसमें व्यक्ति को अपने खाने-पीने पर महत्वपूर्ण ध्यान देने की जरूरत होती है, इसमें कई चीजों का परहेज करना होता है। जबकि कोई व्यक्ति अगर किडनी ट्रांसप्लांट करवाता है, तो इसमें ऐसा कुछ भी नहीं होता है और यह केवल एक बार की सर्जिकल प्रक्रिया होती है। इसमें, सर्जरी के बाद मरीज की जिंदगी में काफी हद तक सुधार हो जाता है। वहीं कुछ मरीज किडनी ट्रांसप्लांट कराने की बजाय अक्सर किडनी डायलिसिस करवाते हैं, क्योंकि इसमें किसी भी तरह की कोई बड़ी सर्जरी नहीं होती है और तुरंत हो जाती है, न किसी प्रकार का कोई दर्द होता है। इसके अलावा, इसमें आर्गन रिजेक्शन का खतरा भी बिल्कुल नहीं होता है। 

आखिर किन लोगों को किडनी डायलिसिस कराना पड़ता है?

दरअसल, डॉक्टर के अनुसार निम्नलिखित समस्या से पीड़ित लोगों को किडनी डायलिसिस कराना पड़ता है, जैसे 

  1. जिन लोगों की दोनों किडनियां फेल हो जाती हैं। 
  2. जिन लोगों की किडनियां सही तरीके से काम नहीं करती हैं। 
  3. जब किडनी 85 से 90 प्रतिशत तक बिल्कुल काम करना बंद कर देती है। 
  4. जिन लोगों का लास्ट स्टेज किडनी डिजीज होता है। 

किडनी फेल होने के क्या-क्या कारण हो सकते हैं? 

दरअसल, डॉक्टर के अनुसार किडनी फेल होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें से कुछ निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे 

  1. अनियंत्रित डायबिटीज की समस्या होना। 
  2. हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होना। 
  3. किडनी में गंभीर इंफेक्शन की समस्या होना। 
  4. किडनी में अचानक गंभीर चोट लगना। 
  5. पथरी से रुकावट और पॉलीसिस्टिक किडनी जैसी जन्मजात बीमारियां होना। 

हालांकि, बिना किसी बड़ी बीमारी के भी कुछ लोग किडनी से जुड़ी तरह -तरह की समस्याओं का शिकार हो सकते हैं। 

क्या किडनी डायलिसिस करना एक बहुत ही ज्यादा गंभीर स्थिति होती है?

दरअसल, हम में से बहुत से लोगों का यह मानना है, कि किडनी डायलिसिस करना एक बहुत ही ज्यादा गंभीर स्थिति होती है, जिसमें काफी ज्यादा दर्द होता है। पर, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। डॉक्टर के अनुसार, किडनी डायलिसिस करना किसी भी तरह की कोई सर्जिकल प्रक्रिया नहीं होती है। पर, अगर आपके डॉक्टर ने डायलिसिस कराने के लिए बोला है, तो आपको इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, बल्कि इसे उतनी ही गंभीरता से लेना चाहिए, जितना कि आप अपनी जिंदगी को लेते हैं। ध्यान रहे, इसे शुरू न करना, अपनी मर्जी से कभी करवाना और कभी नहीं करवाना आपकी जिंदगी के लिए बहुत ही ज्यादा भारी पड़ सकता है। अगर आप ऐसा करते हैं, तो इससे आपके खून में टॉक्सिन जमा हो सकते हैं और यूरीमिया जैसी जीवन घातक स्थिति का निर्माण कर सकते हैं। अगर पीड़ित व्यक्ति का इलाज न करवाया जाये, तो किडनी फेल्योर की स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

डायलिसिस कितने प्रकार का होता है?

आम तौर पर, डायलिसिस मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है, जैसे 

  1. हेमोडायलिसिस। 
  2. पेरिटोनियल डायलिसिस। 

निष्कर्ष: किडनी से जुड़ी समस्या लोगों को इतना ज्यादा परेशान कर देती है, कि उसके मरने जैसी हालत हो जाती है। किडनी की बीमारी के दौरान एक व्यक्ति की किडनियां अच्छे तरीके से काम करना बंद कर देती हैं, जिससे व्यक्ति मौत के मुँह में चला जाता है। इस बीमारी से अपने जीवन को बचाने के लिए इस लेख में हमने आपको किडनी डायलिसिस की प्रक्रिया और किडनी डायलिसिस के बारे में जानकारी दी है। यह भी बताया गया है, कि इन प्रक्रियाओं में क्या होता है। डॉक्टर के हिसाब से ट्रांसप्लांट कराना डायलिसिस से बेहतर होता है। पर, फिर भी किडनी ट्रांसप्लांट कराने की बजाय कुछ मरीज अक्सर किडनी डायलिसिस करवाते हैं, क्योंकि इसमें किसी भी तरह की कोई बड़ी सर्जरी नहीं होती है। ऐसे में, मरीज पर भी निर्भर करता है, कि वो किस ऑप्शन का चुनाव करता है। दोनों में मरीज की जान बचाई जा सकती है। किडनी से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या में आपको देर नहीं करनी चाहिए, बल्कि आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और किडनी से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. किडनी को स्वस्थ रखने के लिए किन चीजों का सेवन किया जा सकता है?

दरअसल, अगर आप अपनी किडनी को सेहतमंद रखना चाहते हैं, तो इसके लिए आप रोजाना संतुलित आहार का सेवन, पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन और ज्यादा नमक या फिर ज्यादा नमक वाली चीजों का सेवन बहुत ही कम मात्रा में कर सकते हैं। यह किडनी की सेहत के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। 

प्रश्न 2. क्या पथरी की समस्या में व्यक्ति की जान भी जा सकती है?

दरअसल, ऐसा कहना गलत नहीं हो सकता है, कि हाँ पथरी की समस्या में व्यक्ति जान जा सकती है, पर बहुत ही कम मामलों में ऐसा देखने को मिलता है। पर, आपको बता दें, कि ऐसा तब होता है, जब व्यक्ति अपनी पथरी का इलाज सही समय पर और अच्छे तरीके से देखभाल नहीं करता है। ऐसे में, महत्वपूर्ण रूप से आपको बता दें, कि इस तरह की स्थिति में पथरी खुद जानलेवा नहीं बनती है, पर इस समस्या के कारण व्यक्ति को होने वाली जटिलताएं जान जाने का कारण बन सकती हैं। इसलिए, शरीर से जुड़ी हर समस्या में सावधान होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।

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आखिरकार किन कारणों की वजह से किडनी के मरीजों को हो सकती है खुजली की समस्या? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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दरअसल, शरीर के सभी अंग अपनी-अपनी जगह एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, जैसे कि दिमाग के बिना पुरे शरीर का चल पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल होता है, तो वैसे ही हमारे शरीर में मौजूद किडनी की सेहत ठीक न होने की वजह से शरीर में मौजूद जहरीले पदार्थों का शरीर से बाहर निकल पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है। दरअसल, किडनी को शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग माना जाता है, जो शरीर में खून को छानकर, जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने में हमारी काफी ज्यादा सहायता करती है। इस तरह की स्थिति में, जब किसी व्यक्ति की किडनी में कोई समस्या होती है, तो इस दौरान किडनी के काम करने की क्षमता पर काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसकी वजह से एक व्यक्ति के शरीर में कई तरह के बदलाव होने लग जाते हैं। 

किडनी की बीमारी कोई आम समस्या नहीं, बल्कि यह एक गंभीर बीमारी होती है, जिसकी वजह से एक व्यक्ति को शरीर से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, इन्हीं समस्याओं में से एक है व्यक्ति के शरीर में तेज खुजली होना। आम तौर पर, डॉक्टरी भाषा में इस तरह की स्थिति को यूरेमिक प्रुरिटस या फिर सीकेडी-एसोसिएटेड प्रुरिटस के नाम से जाना जाता है। किडनी की समस्या से पीड़ित मरीजों में होने वाली खुजली की समस्या के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें उच्च फास्फोरस और कैल्शियम होना, डायलिसिस की प्रकिर्या ठीक से न हो पाना, खून में जहरीले पदार्थों का जमा होना, त्वचा में रूखापन आ जाना, इम्यून सिस्टम में बदलाव होना और शरीर में सूजन होना क़स्दे कई कारण शामिल हो सकते हैं। समस्या के इन कारणों पर ध्यान न देने पर खुजली और भी ज्यादा बढ़ सकती है, जिससे आपको और भी ज्यादा परेशानी हो सकती है। समस्या को गंभीर बनाने से अच्छा है, कि समस्या का पता चलते ही आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

किडनी की समस्या से पीड़ित मरीजों में खुजली की समस्या क्यों होती है?

वैसे तो, त्वचा में खुजली होना एक आम समस्या होती है, पर अगर यह किसी समस्या के कारण हो रही है, तो समस्या गंभीर हो सकती है। त्वचा में खुजली होना, जिसको यूरेमिक प्रुरिटस के नाम से भी जाना जाता है। यह समस्या ज्यादातर किडनी की गंभीर समस्या से पीड़ित मरीजों में आम देखी जा सकती है। विशेष तौर पर, जो लोग क्रोनिक किडनी फेलियर वाले होते हैं, या फिर जो लोग डायलिसिस पर होते हैं। किडनी की समस्या के दौरान, शरीर में होने वाले बदलावों की वजह से त्वचा पर खुजली का निर्माण हो सकता है। इस समस्या का मुख्य कारण पीड़ित व्यक्ति के खून में वेस्ट पदार्थों का जमा होना, शरीर में फास्फोरस का उच्च स्तर होना, शरीर में कैल्शियम असंतुलित होना और त्वचा में काफी ज्यादा रूखापन होना होता है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती है, तो शरीर में मौजूद वेस्ट प्रोडक्ट खून में मिल जाते हैं, जिससे त्वचा में जलन होती है और शरीर में लगातार खुजली होती रहती है।

किडनी के मरीजों में होने वाली खुजली के कारण?

  1. उच्च फास्फोरस और कैल्शियम होना 

जब किसी व्यक्ति के शरीर में फास्फोरस की मात्रा काफी ज्यादा हो जाती है और साथ ही कैल्शियम का स्तर असंतुलित हो जाता है, तो यह त्वचा में होने वाली खुजली का एक बहुत बड़ा कारण बनता है। 

  1. खून में जहरीले पदार्थों का जमा होना 

जब किसी व्यक्ति की किडनी में कोई समस्या या फिर कोई खराबी आ जाती है, तो ऐसे में शरीर से वेस्ट पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते हैं और वह खून में मिलकर त्वचा के नीचे इकट्ठे हो जाते हैं और त्वचा में खुजली का कारण बनते हैं। 

  1. त्वचा में सूखापन होना 

दरअसल, गुर्दे की पुरानी बीमारी होने की वजह से त्वचा में नमी की कमी हो जाती है, जिसकी वजह से त्वचा में काफी ज्यादा खुजली होना शुरू हो जाती है। 

  1. इम्यून सिस्टम में बदलाव होना 

हालांकि, हम में से ज्यादातर लोग किडनी की ही समस्या से पीड़ित रहते हैं। असल में, जब कोई व्यक्ति किडनी की बीमारी से पीड़ित होता है, तो इस वजह से उस व्यक्ति का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर हो जाता है और इस वजह से स्किन में सूजन और खुजली की समस्या बनी रह सकती है।

  1. डायलिसिस की प्रक्रिया ठीक से न हो पाना 

हालांकि, अगर डायलिसिस ठीक तरीके से नहीं किया जाता है, तो ऐसे में, शरीर में से जहरीले पदार्थ अच्छे या फिर पुरे तरीके से बाहर नहीं निकल पाते हैं, जिसकी वजह से त्वचा में खुजली की समस्या बनी रहती है। 

निष्कर्ष: किडनी की बीमारी कोई आम समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर समस्या है, जिससे एक व्यक्ति को शरीर से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें शरीर में तेज खुजली होना भी शामिल है। हालांकि, कई कारणों की वजह से किडनी से पीड़ित मरीजों के शरीर पर खुजली की समस्या हो सकती हैं, जिसमें उच्च फास्फोरस और कैल्शियम होना, डायलिसिस की प्रकिर्या ठीक से न हो पाना, खून में जहरीले पदार्थों का जमा होना, त्वचा में रूखापन आ जाना, इम्यून सिस्टम में बदलाव होना और शरीर की सूजन होना जैसे कारण शामिल हो सकते हैं। अगर इन कारणों पर ध्यान न दिया जाए, तो इससे किडनी के साथ-साथ खुजली की समस्या भी कई ज्यादा बढ़ सकती है। इसलिए, किडनी की समस्या होने पर, खुजली की समस्या को आम समझ कर बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, त्वचा पर ज्यादा खुजली महसूस होने पर, बिना कोई देरी किए आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और किडनी से जुड़ी किसी भी तरह की गंभीर से आम समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल के विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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आखिर क्या होता है किडनी कैंसर? डॉक्टर से जानें, इस समस्या के लक्षण, कारण और इलाज के तरीकों के बारे में!

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आज हर कोई किडनी से जुड़ी तरह-तरह की समस्याओं का सामना कर रहा है, जिसमें किडनी कैंसर भी शामिल है। आपको बता दें, कि किडनी कैंसर कोई छोटी मोटी बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जिस पर ध्यान देना अति आवश्यक होता है। ऐसे में, लोग जानना चाहते हैं, कि किडनी कैंसर क्या होता है? दरअसल, किडनी कैंसर वो होता है, जिसमें किडनी के सेल्स बेकाबू होकर बढ़ने लगते हैं और ट्यूमर का रूप धारण कर लेते हैं। दरअसल, किडनी शरीर के अहम अंगों में से एक है, जो न केवल शरीर में खून को साफ़ करने का काम करती है, बल्कि यह शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में भी काफी ज्यादा सहायता प्रदान करती है। आइये इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

क्या हो सकते हैं किडनी कैंसर के लक्षण? 

किडनी कैंसर की शुरुआत में किसी भी तरह का कोई भी लक्षण नजर नहीं आता है। पर, जैसे-जैसे समस्या आगे बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे यह समस्या फैलती जाती है, जिससे कि इस समस्या के बहुत से लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे कि 

  1. पेशाब करते वक्त खून आना। 
  2. पीठ या फिर कमर की एक तरफ लगातार दर्द होना। 
  3. हर रोज काफी ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होना। 
  4. पेट के आस पास गाँठ का अनुभव होना। 
  5. बिना किसी वजह के व्यक्ति का वजन कम हो जाना। 
  6. बहुत ही कम भूख लगना। 

दरअसल, अगर आपको इस तरह के लक्षणों का अनुभव होता है, तो आपको तुरंत पाने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि, यह लक्षण किडनी में बनने वाले कैंसर के हो सकते हैं, जिसे नजरंअदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। 

क्या हो सकते हैं किडनी कैंसर के कारण? 

  1. आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि धूम्रपान वो चीज है, जो किडनी में कैंसर का एक प्रमुख कारण माना जाता है। दरअसल, धूम्रपान शरीर में कैंसर पैदा करने वाले रसायनों के प्रभाव को काफी ज्यादा तेज कर देता है। 
  2. लंबे समय से चल रहा हाई ब्लड प्रेशर भी किडनी कैंसर का कारण बनता है। 
  3. कुछ प्रकार की दर्द निवारक दवाइयां भी किडनी कैंसर का कारण बनती हैं।
  1. अधिक मोटापे के कारण भी लोगों में किडनी कैंसर का खतरा अधिक बना रहता है। 

किस तरह किडनी कैंसर की जांच की जाती है? 

किडनी कैंसर की जांच करने के लिए कई तरह के उपायों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचें शामिल होती हैं। इन टेस्ट का इस्तेमाल करके किडनी में होने वाली असामान्य वृद्धि या फिर ट्यूमर जैसी समस्या का पता लगाया जाता है। दरअसल, इसके कुछ मामलों में बायोप्सी का रास्ता भी चुना जा सकता है। 

आखिर किस तरह किया जाता है किडनी कैंसर का इलाज? 

  1. आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि सबसे पहले किडनी कैंसर का इलाज करने के लिए ट्यूमर का आकार और मरीज की स्थिति को देखा जाता है। क्योंकि, इस समस्या का इलाज इन दोनों पर ही निर्भर करता है। 
  2. किडनी कैंसर की शुरुआत में ही सर्जरी का विकल्प सबसे ज्यादा अच्छा और प्रभावी माना जाता है। इस प्रक्रिया में, ट्यूमर से प्रभावित हिस्से को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है 
  3. किडनी कैंसर के इलाज के इस तरीके में, नेफ्रेक्टोमी की जाती है, जिसमें केवल किडनी में मौजूद ट्यूमर को निकाल दिया जाता है और साथ में किडनी को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाता है। 

किडनी कैंसर से बचने के लिए क्या किया जा सकता है? 

किडनी कैंसर से बचने के लिए आप निम्नलिखित उपायों को अपना सकते हैं, जैसे कि 

  1. ऐसे में, धूम्रपान से दूरी बनाकर रखें। 
  2. किडनी की सेहत के लिए बैलेंस डाइट का सेवन करें। 
  3. रेगुलर एक्सरसाइज या फिर योगाभ्यास करें। 
  4. अपने बढ़ते वजन को कंट्रोल में रखें। 
  5. हाई ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों को कंट्रोल में रखें। 

निष्कर्ष: किडनी कैंसर एक आम समस्या है, जिस पर ध्यान न दिया जाये, तो जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसलिए, इसको एक जानलेवा बीमारी कहा जाता है। इस लेख में बताये इस समस्या के लक्षणों और कारणों की पहचान करके असल समस्या का पता किया जा सकता है और वक्त पर समस्या का हल निकाला जा सकता है। किडनी कैंसर की पहचान करने के लिए आप सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई जैसे विकल्पों का चुनाव कर सकते हैं। यह इस समस्या में काफी ज्यादा लाभदायक साबित हो सकते हैं। ऐसे में, इस बात का ध्यान रहे, कि पेशाब से जुड़ी समस्याएं भी किडनी कैंसर का कारण बन सकती है। समस्या का पता चलते ही आपको चरण अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और किडनी से जुड़ी कीड़ी भी गभीर समस्या का समाधान पाने के लिए आप अजा ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न 1. किडनी कैंसर किन लोगों को अधिक प्रभावित करता है?

दरअसल, किडनी कैंसर ज्यादातर 50 से 70 साल से भी ज्यादा उम्र के लोगों, मोटापे जैसी समस्या से जूझ रहे लोगों, धूम्रपान करने वाले लोगों, हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों और पुरानी गुर्दे की बीमारी से पीड़ित लोगों को काफी ज्यादा प्रभावित करती है। 

प्रश्न 2. क्या किडनी कैंसर एक जानलेवा बीमारी है?

विशेष तौर पर, अगर किडनी कैंसर जैसी समस्या की पहचान देर से हो, तो हाँ किडनी कैंसर की बीमारी एक गंभीर और जानलेवा बीमारी हो सकती है।

प्रश्न 3. क्या किडनी कैंसर का इलाज संभव हो सकता है? 

हालांकि, अगर किडनी कैंसर जैसी समस्या की पहचान इसके शुरुआती चरणों में हो जाये, तो हाँ किडनी कैंसर का इलाज संभव हो सकता है। 

प्रश्न 4. किन चीजों का सेवन करने से किडनी कैंसर हो सकता है? 

आम तौर पर, किडनी कैंसर ज्यादातर, प्रोसेस्ड और रेड मीट, तेज़ तापमान पर पका हुआ मीट, ज्यादा नमक वाला भोजन, मीठे ड्रिंक्स और सोडा, तंबाकू, शराब और स्मोकिंग का सेवन करने से होता है।

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किडनी में पथरी होने पर किन चीजों का सेवन करना हो सकता है बेहद नुकसानदायक? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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दुनिया में आधे से ज्यादा लोग किडनी से जुड़ी तरह-तरह की समस्याओं से पीड़ित हैं। फिर चाहे वो किडनी डैमेज होने की समस्या हो या फिर किडनी में पथरी की समस्या हो। आज के समय में, लोगों को ज्यादातर किडनी में पथरी की समस्या परेशान करती है। यह समस्या आम है, पर उतनी ही ज्यादा दर्दनाक भी है। इस समस्या के कारण लोगों के सभी काम बुरी तरीके से प्रभावित हो जाते हैं। दरअसल, इस गंभीर समस्या को ठीक करने के लिए लोगों के पास न जाने कितने ही घरेलू उपाय उपलब्ध है। जिसमें बीयर पीने से पथरी का ठीक होना और पत्थरचट्टा के पत्ते को चबाने से किडनी में मौजूद पथरी मल के माध्यम से बाहर आना शामिल है। इसी तरह हम में से कुछ लोगों का मानना है, कि पथरी के दौरान टमाटर, पालक और चाय का सेवन करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। 

असल में, यह सच है, या फिर नहीं इस मामले में डॉक्टर का कहना है, कि ज्यादातर इंटरनेट पर आधी-अधूरी जानकारी उपलब्ध है, जिसने व्यावहारिक रूप से इन पौष्टिक चीजों को किडनी का दुश्मन करार दे दिया है। दरअसल, डॉक्टर के अनुसार, सिमित मात्रा में इन का सेवन किडनी के लिए नुकसानदायक नहीं होता है और अगर इन का सेवन काफी ज्यादा मात्रा में किया जाये, तो यह किडनी में पथरी के दौरान नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। क्योंकि, इन में काफी मात्रा में ऑक्सालेट पाया जाता है, जो किडनी में पथरी का कारण बनता है। इसलिए अधिक मात्रा में इन का सेवन नुकसानदायक साबित हो सकता है। किडनी की गंभीर समस्या होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

किडनी में पथरी होने पर किन चीजों का सेवन करना हो सकता है बेहद नुकसानदायक? 

  1. पालक का सेवन करना 

दरअसल, पालक में ऑक्सलेट की मात्रा काफी होती है। अगर आपका किडनी की पथरी का इतिहास है, तो आपको इसका सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। हालांकि, सेहतमंद लोगों के लिए पालक आयरन और विटामिन एक अच्छा स्रोत माना जाता है। ऐसे में अगर आप पालक को कच्चा खाने की बजाए, इसको उबालकर खाते हैं, तो यह सेहत के लिए बेहतर हो सकता है। ऐसा करने पर ऑक्सलेट का स्तर कम हो जाता है। 

किडनी में पथरी बनने के कारण

डॉक्टर के अनुसार केवल पालक या फिर टमाटर का सेवन करने से पथरी नहीं होती है, बल्कि लाइफस्टाइल से जुड़ी कुछ गलत आदतों से भी पथरी हो सकती है, जैसे 

  1. निर्जलीकरण होना। 
  2. अत्यधिक नमक का सेवन करना। 
  3. प्रोटीन का अधिकता सेवन करना। 

निष्कर्ष: आज किडनी की पथरी से लाखों लोग पीड़ित हैं और यह समस्या ज्यादातर लोगों के गलत खान पान और गैर सेहतमंद जीवनशैली के कारण ही होती है। किडनी में पथरी काफी दर्दनाक हो सकती है, यदि इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या आगे चलकर एक गंभीर रूप भी ले सकती है, जो एक व्यक्ति की सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक संकेत नहीं होता है। इस समस्या में ज्यादातर पालक, टमाटर और चाय के सेवन को जिम्मेदार माना जाता है, क्योंकि इन में ऑक्सालेट की काफी मात्रा पाई जाती है, जो किडनी में पथरी का कारण बनती है। इसलिए, किडनी में पथरी होने पर पालक, टमाटर और चाय के सेवन को काफी नुकसानदायक माना  जाता है। इसके अलावा, अगर इन का सेवन सामान्य मात्रा में किया जाये, तो यह जहरीले नहीं होते हैं, क्योंकि यह आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। ऐसे में, सवाल उठता है, कि आप क्या खा रहे हैं, पर साथ में सवाल यह भी उठता है, कि आप अपने शरीर को कितना हाइड्रेट रखते हैं, कि आप दिन में कितना पानी पी रहे हैं और कितना नमक का सेवन कर रहे हैं। बेहतर होगा, कि आप अपने शरीर को ज्यादा से ज्यादा हाइड्रेट रखें और नमक का सेवन कम करें। इससे किडनी की पथरी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अगर आप पहले से ही किडनी की किसी समस्या से पीड़ित हैं, तो ऐसे में अपने डॉक्टर से संपर्क करना न भूलें। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और किडनी से जुड़ी किसी भी समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. कैसे बनती है किडनी की पथरी?

डॉक्टर के अनुसार किडनी में पथरी विशेष तौर पर शरीर में कैल्शियम ऑक्सालेट के जमा होने के कारण बनती है। पालक, टमाटर और चाय में काफी मात्रा में ऑक्सालेट मौजूद होता है, इसलिए किडनी में पथरी बनने का सबसे बड़ा कारण इन्हीं चीजों को माना जाता है। 

प्रश्न 2. किन समस्याओं के कारण किडनी डैमेज होने का खतरा बना रहता है? 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि बेकाबू शुगर और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं के कारण किडनी डैमेज होने का खतरा काफी ज्यादा बना रहता है। ऐसे में, विशेष देखभाल की काफी ज्यादा जरूरत होती है। 

प्रश्न 3. किस स्थिति में किडनी की पथरी हानिकारक साबित हो सकती है? 

आज किडनी में मौजूद पथरी मूत्र मार्ग में रुकावट पैदा कर देती है, जिसके कारण पेशाब का प्रवाह रुक जाता है और इसकी वजह से संक्रमण पूरी किडनी तक फैल जाता है। तो इस तरह की स्थिति में किडनी की पथरी एक व्यक्ति के लिए काफी हानिकारक हो जाती है। 

प्रश्न 4. किस आकार की पथरी में जीवन सुरक्षित होता है? 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि अगर किडनी की पथरी की बात की जाए, तो 4 से 5 मिलीमीटर या फिर इससे छोटी पथरी को सुरक्षित माना जाता है। इसमें दर्द तो होता है, पर यह बिना किसी सर्जरी के केवल रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने से और कुछ दवाओं का सेवन करने पर ही अपने आप पेशाब के माध्यम से बाहर निकल जाती हैं।

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आखिर किन मेडिकल कंडीशन्स की वजह से पेशाब पर कंट्रोल न रहना और लीक होने की समस्या हो सकती है? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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दरअसल, शरीर में होने वाली कमजोरी का अहसास लगभग सभी लोगों को उम्र बढ़ने पर हो ही जाता है। मतलब कि जैसे -जैसे हमारी उम्र में बढ़ोतरी होती है, वैसे-वैसे ही हमारे शरीर में कमजोरी आने लग जाती है। उम्र बढ़ने के कारण न केवल हमारा शरीर कमजोर होता है, बल्कि इसकी वजह से त्वचा में झुर्रियां आना, बालों का सफेद होना और हड्डियों का कमजोर हो जाना जैसी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उम्र बढ़ने के कारण लोगों से ठीक से चला भी नहीं जाता है, जिसकी वजह से उनके रोजाना के काम क़ाफी ज्यादा प्रभावित हो जाते हैं। इसके अलावा, उम्र बढ़ने के कारण शरीर के ऑर्गन भी ठीक तरीके से काम करना बंद कर देते हैं और शरीर को काफी ज्यादा कमजोर बना देते हैं, जिसकी वजह से एक व्यक्ति चलने, उठने, बैठने और खड़े होने में भी काफी ज्यादा दिक्क्त महसूस करने लग जाता है। बढ़ती उम्र के कारण लोगों को तरह- तरह कि समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसमें किसी भी तरह का कोई भी शक नहीं है। इस दौरान अक्सर लोगों को पेशाब रोकने में काफी ज्यादा दिक्कत होने लग जाती है। दरअसल, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग की रिपोर्ट के अनुसार, लोगों में बढ़ती उम्र के कारण पेशाब को कंट्रोल करने की शक्ति काफी ज्यादा कम या फिर कमजोर हो जाती है, जिसकी वजह से इस उम्र में आकर एक व्यक्ति को काफी ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

आम तौर पर, इस सब के बावजूद क्या आप जानते हैं, कि बहुत सी ऐसी मेडिकल कंडीशन की वजह से लोगों को अपने पेशाब को कंट्रोल न कर पाने और साथ में, पेशाब लीक होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, इन मेडिकल कंडीशन्स की वजह से लोगों को पेशाब लीक होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें पेल्विक फ्लोर मसल्स का काफी ज्यादा कमजोर हो जाना, नर्व से जुड़ी कोई समस्या होना, पुरानी बीमारियां होना और मोटापा आदि होना जैसी कई तरह की मेडिकल कंडीशन्स शामिल हो सकती हैं। दरअसल, इस तरह की समस्या को कंट्रोल में रखने के लिए इन मेडिकल कंडीशन पर ध्यान देना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। वक्त रहते इनका इलाज और गंभीर समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

किन मेडिकल कंडीशन्स में पेशाब पर कंट्रोल न रहने और पेशाब लीक होने की समस्या हो सकती है?

आम तौर पर, निम्नलिखित मेडिकल कंडीशन्स की वजह से लोगों को पेशाब लीक होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। 

  • पेल्विक फ्लोर मसल्स का काफी कमजोर हो जाना 

अक्सर ही महिलाओं को गर्भावस्था, मेनोपॉज और डिलीवरी जैसी स्थिति के बाद पेल्विक फ्लोर कमजोर होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। दरअसल, इस तरह की स्थिति में, ज्यादातर खांसने और छींकने जैसी समस्या के दौरान महिलाओं का पेशाब पर कंट्रोल नहीं रहता है और वह लीक हो जाता है। ऐसे में, ज्यादातर महिलाओं को अपना पेशाब रोकने में काफी ज्यादा दिक्कत महसूस होती है। 

  • नर्व से जुड़ी कोई समस्या होना 

दरअसल, एक व्यक्ति बहुत सी ऐसी बीमारियों से पीड़ित होता है, जिसकी वजह से शरीर की नसें काफी ज्यादा खराब हो जाती हैं। आम तौर पर, इसमें पार्किंसन डिजीज, मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी समस्या शामिल होती है। इसके अलावा, रीढ़ की हड्डी में चोट लगने पर भी आपको नसों के खराब होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सककत है। इसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के नाम से जाना जा सकता है। आम तौर पर, जब शरीर की नसें खराब या फिर डैमेज हो जाती हैं, तो इसकी वजह से आपको पेशाब रोकने में काफी ज्यादा दिक्कत महसूस हो सकती है। 

  • कोई पुरानी बीमारी (क्रॉनिक डिजीज) होना 

क्रॉनिक डिजीज के कारण भी आपको पेशाब को रोकने में काफी दिक्कत महसूस हो सकती है। दरअसल, काफी लंबे वक्त तक चलने वाली बीमारियों में हाई ब्लड शुगर यानी कि डायबिटीज जैसी समस्या शामिल हो सकती है। ऐसी बीमारियों के कारण नसें डैमेज हो जाती हैं और इस दौरान ज्यादा देर तक पेशाब को रोकने की क्षमता काफी ज्यादा कमजोर हो जाती है। ऐसे में, पेशाब फिर अपने आप ही बहने लग जाता है। डायबिटीज जैसी समस्या के दौरान पीड़ित व्यक्तियों को बार-बार पेशाब आने की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है। 

  • पेशाब लीक होने जैसी समस्या के दौरान क्या किया जा सकता है?

दरअसल, पेशाब लीक होने जैसी समस्या के दौरान आप निम्नलिखित सुझावों का

पालन कर सकते हैं, इन से समस्या को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है, जैसे कि 

  1. ऐसी समस्या महसूस होने पर लाइफस्टाइल में महत्वपूर्ण बदलाव जरूर करें। 
  2. रात की जींद लेने से पहले तरल पदार्थों का सेवन कम मात्रा में ही करें। 
  3. वजन को नियंत्रण में रखें।
  4. पेल्विक की मजबूती के लिए रोजाना कसरत करें। 

निष्कर्ष: पेल्विक फ्लोर मसल्स का कमजोर होना, नर्व से जुड़ी कोई समस्या होना, पुरानी बीमारियां होना और मोटापा होना जैसी कई समस्याओं के कारण आपको पेशाब लीक होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अगर आपको भी ऐसी कोई समस्या होती है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है, इस दौरान आप समस्या के कारणों की पहचान करके सीधे अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। अगर आपके बढ़ते वजन के कारण आपको पेशाब लीक होने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो इसको नजरअंदाज करने की बजाए आपको तुरंत इसका इलाज करवाना चाहिए। इस दौरान हमको यह नहीं भूलना चाहिए, कि मोटापा के कारण हमें कई बिमारियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, अपने वजन को संतुलन में बनाए रखना जरूरी होता है। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और पेशाब लीक होने जैसी किसी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल के विशेषज्ञों से सम्पर्क कर सकते हैं।

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क्या वाकई शरीर में बढ़ती हुई शुगर चुपचाप पहुंचा रही है किडनी को नुकसान? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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डायबिटीज एक आम समस्या है, जो बहुत से लोगों को प्रभावित कर देती है। इसके कारण लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे कि उनके सारे काम बुरी तरीके से प्रभावित हो जाते हैं। यह समस्या कभी भी और किसी को भी हो सकती है। दरअसल, डायबिटीज केवल शरीर में ब्लड शुगर बढ़ने का नाम नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ यह एक व्यक्ति के बहुत से अंगों को धीरे-धीरे प्रभावित करने वाली एक खतरनाक बीमारी है, जिस पर ध्यान देना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, डायबिटीज एक पुरानी बीमारी है, जिसमें एक व्यक्ति के शरीर में गुलूकोज़ कि मात्रा काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इस तरह की समस्या के दौरान आपको बार-बार पेशाब लगना, काफी ज्यादा प्यास लगना, भूख लगना, काफी ज्यादा थकान महसूस होना, वजन कम हो जाना और धुंधली नजर होना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। इन लक्षणों पर ध्यान देकर इस समस्या का समय पर इलाज होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसके लक्षणों को नजरअंदाज की बजाए, इनपर महत्वपूर्ण ध्यान देना अति आवश्यक होता है।

शायद हम में से बहुत ही कम लोग इसके बारे में जानते होंगे, कि अगर कोई व्यक्ति डायबिटीज जैसी समस्या से काफी लंबे वक्त से परेशान है और वह ठीक से कंट्रोल नहीं हो पा रही है, तो इस दौरान इस समस्या का प्रभाव शरीर के कई अंदरूनी अंगों पर देखने को मिल सकता है और शरीर के इन्हीं अंगों में से एक है किडनी जो इस तरह की समस्या से काफी ज्यादा प्रभावित हो जाती हैं। दरअसल, इस पर डॉक्टर का भी यही कहना है, कि अगर किसी व्यक्ति में डायबिटीज की समस्या काफी लंबे वक्त से चली आ रही है, तो इस समस्या का प्रभाव शरीर के महत्त्वपूर्ण अंग जैसे किडनी पर भी पड़ सकता है। ऐसे में यह भी सच है, कि एक व्यक्ति के शरीर में बढ़ती हुई शुगर चुपचाप किडनी को नुक्सान पहुँचती है। दरअसल, डायबिटीज जैसी समस्या से पीड़ित मरीजों में होने वाली ऐसी ही एक किडनी की बीमारी है, जिसको डायबिटिक नेफ्रोपैथी के नाम से जाना जाता है। अगर आम भाषा में आपको इसके बारे में समझाया जाए, तो यह मधुमेह की समस्या की वजह से होने वाली एक किडनी की बीमारी है, आम तौर पर, जिसका विकास किडनी में धीरे-धीरे होता है और अगर वक़्त रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए और लगातार इस समस्या को नजरअंदाज किया जाए, तो यह किडनी से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है, किडनी फेलियर का कारण भी बन सकती है। इसलिए, वक्त रहते समस्या का समाधान करना जरूरी होता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

ब्लड शुगर का किडनी फंक्शन पर प्रभाव!

दरअसल, हमारे शरीर में किडनी एक सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण अंग होता है, जिसका काम शरीर से फालतू पदार्थों को बाहर निकालना होता है, जिसमें खून से बेकार चीजों को फ़िल्टर करना और शरीर से ज्यादा पानी को बाहर निकालना शामिल होता है। आम तौर पर, किडनी में लाखों छोटी-छोटी सरंचनाएं होती हैं, जिन को नेफ्रॉन और ग्लोमेरुली के नाम से जाना जाता है। दरअसल, यह फिल्टर खून में से गंदगी और पानी को अलग करने का काम करते हैं और पेशाब के माध्यम से उनको बाहर निकाल देते हैं। जब हमारे शरीर में ब्लड शुगर काफी लंबे वक्त तक उच्च स्तर पर रहता है, तो इसकी वजह से हमारी किडनी में मौजूद इन छोटी-छोटी संरचनाओं की काफी ज्यादा हानि होती है। 

आपको बता दें, कि अगर वक्त रहते डायबिटीज का इलाज न किया जाए, तो यह इतनी ज्यादा खतरनाक हो जाती है, कि इसके कारण ग्लोमेरुली की झिल्ली कमजोर होकर लीक होने लगती है, जिसकी वजह से शरीर में से एल्ब्यूमिन जैसे महत्वपूर्ण ब्लड प्रोटीन गलती से फिल्टर होकर पेशाब के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं। आम तौर पर, एक मात्र यही डायबिटिक नेफ्रोपैथी का शुरुआती संकेत होता है, जिस पर ध्यान न देने पर किडनी के फिल्टर करने की शक्ति कम होने लगती है। 

आखिर ब्लड शुगर किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाता है?

ब्लड शुगर किडनी को निम्नलिखित तरीकों से नुकसान पहुंचाता है, जैसे कि 

  • छोटी ब्लड वेसल को नुकसान होना 

आम तौर पर, किडनी की नाजुक रक्त-नलिकाएं और अन्य संरचनाएं हाई ब्लड शुगर की वजह से वक्त के साथ-साथ काफी ज्यादा सख्त और कठोर बन जाती हैं। जिसके इसके कारण वह पहले की तरह प्रभावित रूप से काम नहीं कर पाती हैं। 

  • ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन होना

दरअसल, एक व्यक्ति के शरीर में बढ़ा हुआ शुगर लेवल किडनी में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन का निर्माण कर सकता है, जिसकी वजह से किडनी के टिशू और फ़िल्टरिंग सिस्टम को काफी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। 

  • डायबिटिक नेफ्रोपैथी के शुरुआती संकेत!
  1. पेशाब करते वक्त झाग बनना। 
  2. त्वचा में खुजली का अहसास होना। 
  3. पैरों और टखनों में सूजन आना। 
  4. बार-बार पेशाब आना। 

निष्कर्ष: किडनी से जुड़ी कुछ समस्याओं का खतरा डायबिटीज के मरीजों को भी होता है, इनमें से ही एक बीमारी है डायबिटिक नेफ्रोपैथी। दरअसल, हाई ब्लड शुगर के मरीजों के लिए डायबिटिक नेफ्रोपैथी एक बहुत ही ज्यादा गंभीर बीमारी हो सकती है। समस्या की समय पर पहचान और सही मैनेजमेंट से स्थिति को काफी हद तक कंट्रोल में किया जा सकता है। इस तरह की समस्या से बचने के लिए नियमित जांच, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर पर कंट्रोल काफी ज्यादा जरूरी होता है। इसके अलावा, अगर किसी भी डायबिटीज के मरीज में इस लेख में बताए गए लक्षण नजर आते हैं, तो यह किडनी की सेहत के लिए एक अच्छा संकेत नहीं होता है, इसलिए लक्षण नजर आते ही आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और पेशाब में प्रोटीन की जांच और खून की ईजीएफआर रिपोर्ट करवानी चाहिए। इसके बारे में ज़्यादा जानने के लिए और किडनी से जुड़ी किसी भी समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।

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किडनी स्टोन के अलावा वो कौन से 8 कारण हैं, जो किडनी में दर्द का कारण बन सकते हैं? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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दरअसल, इसके बारे में लगभग सभी जानते हैं, कि किडनी हमारे शरीर के लिए कितनी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। यह शरीर में एक अहम भूमिका निभाती है, जो हमारे शरीर में जमा गंदगी को निकालने में हमारी काफी ज्यादा सहायता करती है। हालांकि, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि हमारे शरीर में किडनी पेशाब के जरिये शरीर की गंदगी को बाहर निकालने का काम करती है और साथ में शरीर के केमिकल को बनाए रखने का काम करती है। पर, जब हमारी किडनी में किसी भी तरह की कोई भी परेशानी आती है, तो इस दौरान हमारा शरीर बहुत से संकेतों को प्रदान करता है। कई बार किडनी का दर्द असहनीय हो सकता है, जो एक व्यक्ति की जीवन शैली को काफी ज्यादा प्रभावित कर सकता है। किडनी में दर्द किडनी स्टोन के अलावा और भी बहुत से कारणों की वजह से हो सकता है, जिसमें किडनी में कैंसर, चोट, पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज, किडनी इन्फेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट में रुकावट, यूरेटेरो पेल्विक जंक्शन ऑब्स्ट्रक्शन, वेसिको-यूरेथ्रल रिफ्लक्स और यूरिनरी रिटेंशन जैसे कारण शामिल हो सकते हैं। ऐसे में, जब भी आपको अपनी किडनी में दर्द महसूस होता है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

गुर्दे में दर्द का मुख्य कारण क्या हो सकता है?

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि हमारी किडनी यानी कि गुर्दे ब्लैडर और यूट्रस से भी जुड़े हुए होते हैं। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति के दौरान जब किडनी में किसी भी तरह की कोई भी समस्या हो जाती है, तो किडनी के साथ- साथ यह सभी हिस्से भी काफी ज्यादा प्रभावित होते हैं। किडनी में होने वाले दर्द के कुछ संभावित कारणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. किडनी स्टोन

यह सभी जानते हैं, कि शरीर में जमा होने वाले मिनरल्स की वजह से किडनी में पथरी की समस्या उत्पन्न होती है। दरअसल, इस पथरी के यूरिनरी ट्रैक्ट में फंसने पर आपको काफी ज्यादा तेज दर्द महसूस हो सकता है। 

  1. यूरिनरी रिटेंशन

यूरिनरी रिटेंशन यानी कि पेशाब में रुकावट। इस तरह की स्थिति के दौरान एक व्यक्ति अपना ब्लैडर अच्छे तरीके से खाली नहीं कर पाता है, जिससे दर्द महसूस हो सकता है। यह समस्या अचानक से या फिर उम्र के साथ धीरे-धीरे हो सकती है। 

  1. वेसिकोरेट्रल रिफ्लक्स

दरअसल, यूरिन रिफ्लक्स के दौरान पेशाब आपके ब्लैडर से पीछे की ओर आपके यूरेटर्स या फिर किडनी की तरफ बहने लग जाता है। हालांकि, वेसिको-यूरेथ्रल रिफ्लक्स की समस्या किसी को भी प्रभावित कर सकती है। पर, यह समस्या ज्यादातर शिशुओं और छोटे बच्चों में काफी ज्यादा देखने को मिल सकती है। जिससे किडनी में दर्द हो सकता है। 

  1. यूरेटेरोपेल्विक जंक्शन ओबस्ट्रुक्शन

आम तौर पर, इस तरह की स्थिति के दौरान ब्लॉकेज की समस्या तब होती है, जब आपकी मूत्रवाहिनी आपकी किडनी से जुड़ी हुई होती है। इसके कारण एक व्यक्ति को पीठ में दर्द हो सकता है, जिसका फैलाव पेट या फिर पीठ के निचले हिस्से तक हो सकता है। 

  1. पेशाब की नली में रुकावट

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि असल में यूरेटर वो ट्यूब होते हैं, जो आम तौर पर, पेशाब को आपकी किडनी से आपके ब्लैडर तक ले जाते हैं। इस तरह की स्थिति उत्पन्न होने पर, यूरेटर एक या फिर दोनों तरफ सिकुड़ सकता है, जो किडनी में दर्द का कारण बन सकता है। 

  1. गुर्दे का संक्रमण

दरअसल, गुर्दे में संक्रमण जैसी स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब बैक्टीरिया आपकी किडनी यानी कि गुर्दे को पूरी तरीके से संक्रमित कर देते हैं। इस तरह की स्थिति में आपको बुखार, ठंड लगना, पीठ में दर्द और उल्टी होना जैसे लक्षण नज़र आ सकते हैं। इससे किडनी में काफी ज्यादा दर्द महसूस हो सकता है। 

  1. पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज

इस तरह की समस्या के दौरान जैसे-जैसे सिस्ट फैलता है, वैसे -वैसे किडनी का आकार बड़ा होता जाता है और इस दौरान काफी ज्यादा दर्द महसूस हो सकता है। ऐसे में, नतीजा यह निकलता है, की किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती है। 

  1. चोट

दरअसल, बहुत सी चोटों की वजह से किडनी को काफी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। आम तौर पर, इसकी वजह से पेशाब में या फिर किडनी के आसपास ब्लीडिंग होने की वजह से पेशाब के साथ-साथ खून का लीकेज भी हो सकता है। जिससे किडनी में काफी ज्यादा दर्द हो सकता है। 

निष्कर्ष: किडनी हमारे शरीर में एक अहम भूमिका निभाती है, जो शरीर से जमा गंदगी को निकालने में हमारी बहुत मदद करती है। हमारी किडनी ब्लैडर और यूट्रस से भी जुड़ी हुई होती है, तो ऐसे में जब किडनी में कोई दिक्कत-परेशानी आती है, तो किडनी के साथ यह हिस्से भी प्रभावित होते हैं। किडनी में पथरी के अलावा, किडनी में कैंसर, चोट, पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज, किडनी इन्फेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट में रुकावट, यूरेटेरो पेल्विक जंक्शन ऑब्स्ट्रक्शन, वेसिको-यूरेथ्रल रिफ्लक्स और यूरिनरी रिटेंशन जैसे कारणों की वजह से भी किडनी में दर्द की समस्या हो सकती है। किडनी में होने वाले इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए समय पर इन समस्याओं का इलाज और जांच बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं। किडनी में गंभीर समस्या होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और किडनी से जुड़ी किसी भी तरह की आम से गंभीर समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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क्या वाकई गुर्दे की पथरी को तोड़कर बाहर निकाल सकता है यह हर्बल वॉटर? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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दरअसल आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि गोक्षुर या फिर गोखरू एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है, जिस को ट्रिबुलस टेरेस्ट्रिस के नाम से भी जाना जाता है। आम तौर पर, यह एक छोटी पत्तेदार आयुर्वेदिक औषधि की तरह होती है। जो कई तरह की समस्याओं को ठीक करने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करती है। दरअसल, जो व्यक्ति पेशाब से जुड़ी बीमारियों, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, प्रोस्टेट ग्रंथि की बीमारियों, दिल से जुड़ी बीमारियों और साथ में गुर्दे की समस्याओं से पीड़ित होते हैं, यह औषधि, विशेष तौर पर इन मरीजों को ठीक करने के लिए ही इस्तेमाल की जाती है। इसके अलावा, यह औषधि एक व्यक्ति की मसल्स को बढ़ाने, व्यक्ति की मेमोरी को पूरी तरीके से शार्प करने और साथ में पुरुषों और महिलाओं दोनों में ही कामेच्छा को बढ़ाने में भी काफी ज्यादा सहायक साबित होती है। यह सेहत के लिए कई तरीकों से फायदेमंद होती है, इसलिए किसी भी समस्या के दौरान इसका इस्तेमाल अक्सर डॉक्टर की सलाह पर किया जाना चाहिए। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि आयुर्वेदिक डॉक्टर ज्यादातर गोक्षुर या फिर गोखरू का इस्तेमाल गुर्दे की पथरी को ठीक करने के लिए ही करते हैं। ऐसे में, यह भी सच है, कि गोक्षुर या फिर गोखरू गुर्दे की पथरी को तोड़ने और शरीर से बाहर निकालने में काफी ज्यादा प्रभावी मानी जाती है। इसके लिए गोक्षुर का हर्बल वाटर का सेवन करना काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। दरअसल, यह सेहत के साथ- साथ गुर्दे की पथरी में भी काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। इसलिए, ज्यादातर डॉक्टर गुर्दे की पथरी का इलाज करने के लिए इस पानी का इस्तेमाल करते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इसके आयुर्वेदिक डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

क्या वाकई गुर्दे की पथरी को खत्म करने में फायदेमंद होता है गोक्षुर का हर्बल वाटर?

दरअसल, आयुर्वेदिक डॉक्टर का इस पर कहना है, कि गोक्षुर का हर्बल वाटर यूरिनरी कैलकुली में काफी ज्यादा लाभदायक साबित होता है। आम तौर पर , गोक्षुर के हर्बल वाटर में लिथोट्रिप्टिक एक्टिविटी मौजूद होती है, जो गुर्दे में मौजूद पथरी को तोड़ने का बल रखती है। दरअसल, इसका इस्तेमाल करने के लिए आप सबसे पहले कम से कम दो चम्मच गोक्षुरा पाउडर को लें और उसको पानी में मिलाकर अच्छे से उबाल लें या फिर इसके अलावा, एक गोक्षुरा के फल को अच्छे तरीके से सुखा लें और उसको अच्छे से क्रश कर लें और कम से कम दो लीटर पानी में मिलाकर इसे 15 मिनट तक अच्छे तरीके से उबाल लें। इसके बाद इसको अच्छे तरीके से छान लें और पी लें। इसका सेवन आप रोजाना पानी की जगह पर कर सकते हैं। 

गुर्दे की पथरी के लिए क्यों कारगर माना जाता है गोक्षुर का वाटर?

आम तौर पर, गोक्षुर का वाटर निम्नलिखित कारणों की वजह से कारगर साबित हो सकता है, जैसे कि 

  1. दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि पारंपरिक गोक्षुर चूर्ण का सेवन न केवल शरीर से ज्यादा यूरिक एसिड को खत्म करने में मदद करता है, बल्कि यह किडनी में यूरिक एसिड के लेवल को मैनेज करने में भी बहुत मददगार साबित होता है। यह किडनी की सेहत को बेहतर बनाता है और गाउट को भी रोक सकता है या ठीक कर सकता है।
  2. आम तौर पर, गोक्षुर चूर्ण में मौजूद एंटी-लिथियासिस गुण न केवल गुर्दे में बनने वाली पथरी को रोकने का काम करते हैं, बल्कि यह गुर्दे में पहले से बनी पथरी को भी तोड़ने या फिर उस पथरी के आकर को पहले से काफी ज्यादा कम करने में काफी ज्यादा सहायक होते हैं। 
  3. दरअसल, इस तरह से यह पॉलीसिस्टिक गुर्दे की बीमारियों, गुर्दे की पथरी और साथ में मूत्राशय में सिस्टिटिस जैसी स्थिति को रोकने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करता है। 
  4. हालांकि, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि गोक्षुर का वाटर डायबिटीज जैसी समस्या को मैनेज करने में काफी ज्यादा सहायता करता है और इसी वजह से गोक्षुर का वाटर बार-बार पेशाब आने जैसे लक्षणों से लड़ता है। 

यह मधुमेह के प्रबंधन में सहायता करता है और इसलिए बार-बार पेशाब आने जैसे लक्षणों का मुकाबला करता है।

निष्कर्ष: गोक्षुर या फिर गोखरू एक आयुर्वेदिक औषधि है, जिसे ट्रिबुलस टेरेस्ट्रिस के नाम से भी जाना जाता है। यह एक छोटी पत्तेदार आयुर्वेदिक जड़ी बूटी की तरह होती है, जो शरीर से जुड़ी कई तरह की समस्याओं को दूर करने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करती है। इसके अलावा, यह एक व्यक्ति की सेहत के लिए कई तरीकों से फायदेमंद हो सकती है। ऐसे में, गोक्षुर या फिर गोखरू गुर्दे की पथरी को तोड़ कर शरीर से बाहर निकालने में काफी ज्यादा प्रभावी मानी जाती है। गोक्षुर का हर्बल वाटर यूरिनरी कैलकुली में काफी ज्यादा लाभदायक साबित होता है। हालांकि, यह सेहत के लिए कई तरीकों से फायदेमंद होती है, पर किसी भी समस्या के दौरान इसका इस्तेमाल अक्सर डॉक्टर की सलाह पर किया जाना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और गुर्दे की पथरी जैसी किसी भी समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों को अपनी समस्या बताकर उसका समाधान और उसके बारे में महत्वपूर्ण जानकरी प्राप्त कर सकते हैं।

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क्या मतली का बार-बार होना हो सकता है किडनी की बीमारी का संकेत? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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लोगों में मतली की समस्या होना एक आम बात होती है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि पेट खराब होने की वजह से या फिर कोई संक्रमण होने की वजह से आपको इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, बहुत सी महिलाओं को

गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में भी मतली जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही, हम में बहुत से लोगों को बसों और गाड़ियों में ट्रेवल करने या फिर एसिड रिफ्लक्स की वजह से मतली जैसी समस्या होने लग जाती है। यह समस्या कभी और किसी को भी हो सकती है। हम में से बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जो इस समस्या को स्थिति के हिसाब से जज करते हैं और ऐसे ही नाजज़रांदाज कर देते हैं। यह समस्या आम होती है, पर क्या फिर भी आप इसके बारे में जानते हैं, कि मतली की समस्या को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। क्योंकि कभी कभार ये समस्या शरीर से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। जो एक व्यक्ति की सेहत को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकती है। 

डॉक्टर के अनुसार, मतली की समस्या का किडनी से जुड़ी समस्या के साथ एक बहुत ही गहरा संबंध होता है। जो किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। किडनी की समस्या में एक व्यक्ति के पैरों और चेहरे पर सूजन की समस्या होने लग जाती है, जिसमें कई बार पेट दर्द भी हो सकता है। ऐसे में बहुत से लोग जानना चाहते हैं, कि क्या इस तरह की स्थिति में किडनी से जुड़ी समस्याओं को गैस और मतली से भी जोड़कर देखा जा सकता है? क्या वाकई मतली का बार-बार होना किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है? दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि हाँ बार-बार होने वाली मतली या फिर उल्टी किडनी से जुड़ी बीमारी या फिर किडनी फ़ैल होने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। इसलिए, इस तरह की समस्या को नज़रअंदाज करने की बजाए आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

किडनी की बीमारी के लक्षण क्या हो सकते हैं?

किडनी की बीमारी के लक्षण तभी नजर आते हैं, जब किसी व्यक्ति में किडनी की समस्या काफी ज्यादा गंभीर हो जाती है और बीमारी एक एडवांस स्टेज तक पहुंच जाती है। किडनी की बीमारी के लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. पीड़ित व्यक्ति के चेहरे और पैरों में सूजन की समस्या होना। 
  2. काफी ज्यादा जी मिचलाना या फिर उल्टी जैसा महसूस होना। 
  3. पीड़ित व्यक्ति का धीरे-धीरे वजन कम हो जाना। 
  4. सांस लेते वक्त काफी ज्यादा तकलीफ महसूस होना। 

मतली और किडनी की बीमारी के बीच संबंध!

इस पर डॉक्टर का कहना है, कि किडनी की बीमारी होने पर आपको इसकी शुरुआत में ही जी मिचलाना या फिर उल्टी होने जैसे लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। अगर इस तरह की समस्या कभी कभार किसी को हो जाती है, तो इस को बिल्कुल भी किडनी की बीमारी से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। कभी कभार होने वाली मतली को आप एक आम समस्या जैसे एसिडिटी और गैस भी समझ सकते हैं, जो किसी को भी प्रभावित कर सकती है। आम तौर पर, ऐसा इसलिए भी हो सकता है, क्योंकि कई बार हम सेहतमंद खाने की जगह, गलत डाइट को भी अपना लेते हैं। डॉक्टर के अनुसार, कभी कभी होने वाले मतली की समस्या किडनी की बीमारी का संस्कृत नहीं हो सकता, पर अगर यह मतली की समस्या किसी व्यक्ति को बार-बार होती है और वह इस समस्या से जहर बार परेशान रहता है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि यह किडनी की बीमारी या फिर किडनी फ़ैल होने का एक बहुत बड़ा संकेत हो सकता है। इसके अलावा, इस तरह की समस्या को लेकर ज्यादा परेशान भी नहीं होना चाहिए। अपने मन में कोई भी धारणा बनाने से पहले बेहतर होगा, कि आप किसी अच्छे डॉक्टर या फिर किसी नेफ्रोलॉजिस्ट के पास जाकर किडनी की अच्छे तरीके से जांच करवानी चाहिए। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि समस्या की पहचान करने के लिए किडनी फंक्शन टेस्ट भी किया जा सकता है, जिस में यह पता लगता है, कि व्यक्ति में मतली की समस्या किडनी की बीमारी से जुड़ी हुई है, या फिर नहीं। NCBI की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के सालों में किडनी के मरीजों की संख्या बढ़ी है। क्रोनिक किडनी की बीमारी में हीमोडायलिसिस की जरूरत होती है। इस समस्या से पीड़ित लोगों को उल्टी या जी मिचलाने की समस्या हो सकती है।

मतली के अन्य कारण क्या हो सकते हैं?

मतली के अन्य कारण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं:

  1. काफी लंबे समय तक पेन किलर लेना।
  2. ज्यादा मात्रा में स्ट्रीट फूड का सेवन करना 
  3. फास्ट फूड भी मतली का कारण हो सकता है।
  4. फास्ट फूड से भी मतली की समस्या हो सकती है। 

निष्कर्ष: मतली की समस्या एक आम समस्या है, जो किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। किडनी की बीमारी होने पर एक व्यक्ति को कई तरह के लक्षण नज़र आ सकते हैं, जिसमें से एक जी मिचलाना भी शामिल हो सकता है। उल्टी आना जैसे लक्षण अक्सर आपको सिर्फ किडनी की बीमारी के एडवांस स्टेज में देखने को मिल सकते हैं। जिसमें किडनी की बीमारी और किडनी फेलियर का होना शामिल हो सकता है। इसलिए, बार बार होने वाली मतली को आप किडनी की बीमारी से जोड़कर देख सकते हैं। ऐसा होने पर अपनी किडनी की तुरंत जांच कराएं। इससे समस्या का पता चल सकता है और वक्त रहते इलाज हो सकता है। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और किडनी से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल के विशेषज्ञों से सम्पर्क कर सकते हैं।

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