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पित्त की थैली में इन्फेक्शन के क्या है कारण, लक्षण और इलाज ?

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पित्त की थैली में इन्फेक्शन के क्या है कारण, लक्षण और इलाज ?

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पित्त या पित्ताशय की थैली छोटे से आकार की होती है जोकि यकृत के नीचे पाई जाती है और इसका मुख्य कार्य यकृत द्वारा छोड़े गए पित्त को इकट्ठा करना है, पर सोचे अगर किसी कारणवश इसमें सूजन आ जाए तो कैसे हम इसकी पहचान करेंगे, और इसमें सूजन के कारण क्या हो सकते है साथ ही कैसे इसका इलाज करवा के हम इस समस्या से खुद का बचाव कर सकते है इसके बारे में हम आज के लेख में बात करेंगे, इसलिए पित्त की थैली में इन्फेक्शन के बारे में जानने के लिए आर्टिकल को अंत तक जरूर से पढ़े ;

पित्त की थैली में इन्फेक्शन के कारण क्या है ?

  • पित्त की नली का सिकुड़ना। 
  • पित्ताशय की थैली में ट्यूमर का होना। 
  • बिलुरुबिन और कैल्शियम साल्ट्स की ठोस जमावट को पित्ताशय की पथरी कहते हैं। यह पित्त की थैली में इन्फेक्शन का सबसे आम कारण है। 
  • ब्लड वेसल्स का नुकसान होना। 

लुधियाना में बेस्ट यूरोलॉजिस्ट की मदद से आप पित्ताशय में इन्फेक्शन की समस्या क्यों होती है के बारे में जान सकते हो।

क्या है पित्ताशय की थैली ?

  • पित्ताशय की थैली एक छोटे, नाशपाती के आकार का अंग है जो पेट के दाहिनी ओर यकृत (लिवर) के ठीक नीचे स्थित होती है। पित्ताशय की थैली पित्त को संग्रहीत करती है। पित्त पथरी रेत के दाने जितनी छोटी या गोल्फ की गेंद जितनी बड़ी हो सकती है।
  • पित्ताशय की थैली के वजन की बात करें तो वयस्कों में, पित्ताशय की थैली लगभग 7 से 10 सेंटीमीटर (2.8 से 3.9 इंच) लंबाई में और 4 सेंटीमीटर (1.6 इंच) व्यास में पूरी तरह से फैला हुआ होता है। 

पित्ताशय की थैली में इन्फेक्शन के क्या लक्षण है ?

  • बुखार की समस्या का सामना करना।
  • जी मिचलाना। 
  • पेट में दर्द । 
  • उल्टी का आना।
  • सूजन की समस्या।
  • आँखों में पीलेपन का आना।
  • मल का ढीला होना। 

यदि व्यक्ति द्वारा भोजन खाया जाता है तो ये समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। इसके अलावा अगर ये समस्या ज्यादा बढ़ रही है तो इससे निजात पाने के लिए लुधियाना में पित्ताशय की पथरी की जाँच एक बार जरूर से करवाए।

पित्त की थैली में इन्फेक्शन का क्या इलाज है ?  

  • पित्ताशय की थैली के संक्रमण का इलाज दवा या शल्य प्रक्रिया के माध्यम से किया जा सकता है। इन्फेक्शन को दूर करने के लिए एंटीबायोटिक के साथ दर्द निवारक देते हैं। पथरी के कारण अगर संक्रमण है तो सर्जरी की जा सकती है। 
  • वही ERCP यानि (एंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलेजनोपैंक्रेटोग्राफी) का उपयोग डॉक्टरों द्वारा अग्न्याशय और पित्त नलिकाओं में समस्याओं के निदान और उपचार के लिए किया जाता है। मतलब की ऐसे समझे कि यदि आपके डॉक्टर को अग्न्याशय या यकृत रोग, या पित्त नलिकाओं में समस्या का संदेह है, तो आप ईआरसीपी (ERCP) से गुजर सकते हैं।
  • इसके इलाज से पहले आपको व्रत रखना पड़ सकता है, क्युकि भोजन से आपकी पित्त की थैली सूज जाती है। 
  • अगर आपकी पित्त की थैली में इन्फेक्शन की समस्या है तो इसके इलाज ले लिए डॉक्टर आपको गॉलस्टोन सर्जरी करवाने की सलाह दे सकते है। और इसमें इलाज दवाइयों के माद्यम से किया जाता है। 

पित्त की थैली में इन्फेक्शन के लक्षणों को जानने के बाद इससे निजात पाने के लिए आरजी स्टोन यूरोलॉजी एन्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल का चयन करें। 

निष्कर्ष :

पित्त की थैली में इन्फेक्शन की समस्या काफी खतरनाक है इसलिए समय रहते किसी अच्छे डॉक्टर का चयन करें इसके इलाज के लिए।

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बड़ी से बड़ी पथरी को कौन-से तरीके से गलाकर बाहर निकाला जा सकता है ?

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पथरी की समस्या काफी गंभीर है और ये समस्या कई बार व्यक्ति को अंदर से बहुत खोखला कर देती है। इसलिए इससे बचाव करना बहुत जरूरी है और साथ ही ऐसे कौन से उपाय है जिसको अपना कर हम पथरी को गलाकर आसानी से बाहर निकालने में सक्षम हो पाते है, जैसे प्रश्नो के बारे में और इस समस्या से हम कैसे निजात पा सकते है इसके बारे में भी बात करेंगे

किडनी में पथरी की समस्या क्यों होती है ?

  • पथरी बनने के जोखिम कारको की बात करें तो इसमें कुछ बीमारियों, दवाओं, गलत आहार की आदतों से पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है जैसे- मूत्र में कैल्शियम या ऑक्सालेट की अत्यधिक मात्रा। आहार में कम कैल्शियम, उच्च मात्रा में ऑक्सालेट्स वाले आहार, पशु प्रोटीन ज्यादा मात्रा में या आहार में ज्यादा मात्रा में सोडियम का सेवन।
  • वही शरीर में पानी की कमी से गुर्दे की पथरी यानी किडनी स्टोन बन सकती हैं। इसके अलावा ये पत्थर या तो मटर के आकार के हो सकते हैं या गोल्फ की गेंद जितने बड़े हो सकते हैं। पथरी आमतौर पर कैल्शियम ऑक्सालेट और कुछ अन्य यौगिकों से बने होते हैं और इनकी बनावट क्रिस्टल जैसी होती है।

अगर आपको भी गुर्दे में पथरी की समस्या है तो इससे निजात पाने के लिए गुर्दे की पथरी विशेषज्ञ पंजाब का चयन करें।

किडनी की पथरी के लक्षण क्या हैं ? 

  • गुर्दे की पथरी बनने से वजन का कम होना शामिल है। 
  • बुखार, मतली, रक्तमेह और पेट के निचले हिस्से में गंभीर दर्द के साथ पेशाब करने में परेशानी हो सकती है।
  • पेशाब में गंध का आना या इसमें ब्लड की समस्या का उत्पन होना। 

यदि पथरी की समस्या होने पर आपमें भी ऐसे कुछ लक्षण दिखाई दे रहे है तो इससे बचाव के लिए यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करें।

किडनी की पथरी को सही करने के कौन से उपाय है मददगार ?

  • जिन लोगों को गुर्दे की पथरी ने अपने वश में ले रखा है उन्हें इन पत्थरों को पेशाब के माध्यम से बाहर निकालने के लिए दिन में 7-8 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है।
  • नींबू के रस और जैतून के तेल का मिश्रण भी काफी प्रभावी है पथरी को तोड़ने के लिए, बस करना इसमें ये है कि इन दोनों को रोजाना पीना है, जबतक आपकी पथरी निकल न जाए। 
  • अनार का रस सबसे अच्छे प्राकृतिक पेय में से एक है जो शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है। यह गुर्दे की पथरी को प्राकृतिक रूप से दूर करने में भी काफी सहायक है। 
  • मक्के के बाल भी पथरी को तोड़ने में काफी मददगार है। इसको बनाने के लिए आप पानी में मक्की के बालों को उबाल ले बाद में छानकर सेवन किया जा सकता है। यह नए पत्थरों के निर्माण को भी रोकता है और एक मूत्रवर्धक है जो मूत्र के प्रवाह को बढ़ाता है। 
  • दो बड़े चम्मच सेब का सिरका रोजाना गर्म पानी के साथ तब तक ले, जब तक कि किडनी से पथरी पूरी तरह से निकल न जाए।

अगर किडनी की पथरी ज्यादा गंभीर है तो कोई भी उपाय अपनाने से पहले आरजी हॉस्पिटल के डॉक्टर से जरूर सलाह ले। क्युकि डॉक्टर ही सही बात बता पाएंगे आपके चेकअप के बाद। 

निष्कर्ष :

पथरी की समस्या काफी गंभीर है, इसलिए इससे निजात पाने के लिए उपरोक्त बातों का खास ध्यान रखे और डॉक्टर के संपर्क में जरूर से रहे।

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