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हर्निया रोगियों के पेट पर पड़ने वाले दबाव और दर्द को कम करने के लिए किन योगासन को अपनाना हो सकता है फायदेमंद? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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आज के समय में गलत खानपान और जीवनशैली की गलत आदतों को अपनाने के कारण लोगों को शरीर से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। आम तौर पर, इन्ही कारणों की वजह से लोग बीमार पड़ते हैं और फिर भी लोग इन आदतों को छोड़ने के लिए त्यार नहीं होते हैं। आम तौर पर, जब वह गंभीर रूप से किसी समस्या से पीड़ित हो जाते हैं, तो फिर इन आदतों को छोड़ने के इलावा कोई रहता नहीं बचता है। आम तौर पर यह इस बात का सबूत है, कि लोगों को इन गलत आदतों के कारण एक नहीं, बल्कि कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसमें हर्निया जैसी समस्या भी शामिल है। यह समस्या लोगों को आसानी से प्रभावित कर देती है। यह समस्या आम है, जिसमें लाखों लोग शामिल हैं। 

जैसे कि आपको पहले ही बताया है, कि खराब खान-पान और जीवनशैली में गलत आदतों को अपनाने से शारीरिक समस्याएं बढ़ती हैं और आपको लंबे समय तक प्रभावित कर सकती हैं। इसके कारण हर्निया रोग के मामले भी काफी ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। यह समस्या काफी गंभीर हो सकती है। आम तौर पर, इस समस्या का निर्माण तब होता है, जब किसी व्यक्ति के शरीर के अंदर का कोई अंग या फिर आपको बता दें, कि यह समस्या तब होती है, जब शरीर के अंदर की मांसपेशियों या फिर ऊतकों की दीवार काफी ज्यादा कमजोर हो जाती है और अंदर का कोई अंग या फिर ऊतक उस कमजोर दीवार के किसी छेद से बाहर निकल आता है। जिसके कारण ही त्वचा के नीचे एक उभार यानी कि एक गांठ की तरह बन जाता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि वैसे तो हर्निया जैसी समस्या के ज्यादातर मामलों में सर्जरी की ही आवश्यकता पड़ती है, पर अगर आप इस समस्या के दर्द से आराम पाना चाहते हैं, तो इसके लिए आप कुछ योगासनों का भी सहारा ले सकते हैं। आम तौर पर, यह योगासन इस समस्या में काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इसलिए, आप इन का सहारा ले सकते हैं। ऐसे में, किसी भी तरह की समस्या होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

हर्निया रोगियों के पेट पर पड़ने वाले दबाव और दर्द को कम करने वाले योगासन!

आम तौर पर, डॉक्टर के अनुसार, हर्निया रोगियों के पेट पर पड़ने वाले दबाव और दर्द को कम करने के लिए आप निम्नलिखित कुछ योगासनों का सहारा ले सकते हैं, जैसे कि 

  1. उत्तानपादासन

आम तौर पर, उत्तानपादासन एक इस तरह का योगासन है, जो हर्निया की समस्या में काफी ज्यादा लाभदायक साबित होता है। ऐसे में, अगर आपको हर्निया की समस्या है, तो इसके लिए आप उत्तानपादासन का अभ्यास कर सकते हैं। अगर आप इस तरह की स्थिति में, उत्तानपादासन का सहारा लेते हैं, तो इससे न केवल पेट का निचला हिस्सा मजबूत बनता है, बल्कि इस आसन को करने से पेट की मांसपेशियां भी काफी ज्यादा मजबूत बनती है। इससे पाचन तंत्र में काफी ज्यादा सुधार देखने को मिलता है और इसके साथ- साथ पेट के निचले हिस्से में बनने वाला अतिरिक्त दबाव भी काफी हद तक कम हो जाता है। आम तौर पर, हर्निया के लिए इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले आप पीठ के बल एक दम सीधे लेट जाएं। इसके बाद अपने दोनों पैरों को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाएं और इस के साथ ही अपने दोनों हाथों को जमीन पर रखें और कुछ सेकंड तक के लिए इसी स्थिति में बने रहें। आम तौर पर, इसके बाद अपने दोनों पैरों को आराम से धीरे-धीरे नीचे की तरफ लेकर आएं। रोजाना इस आसन को करने से हर्निया के कारण पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द को काफी आराम प्राप्त होता है। 

  1. वज्रासन

आम तौर पर, हर्निया की समस्या के दौरान वज्रासन करना काफी ज्यादा फायदेमंद और बहुत ही ज्यादा सुरक्षित भी साबित होता है। दरअसल, यह एक इस प्रकार का ध्यानात्मक आसन है, जो हर्निया की समस्या के दौरान पेट की मांसपेशियों पर दबाव को बिना डाले न केवल पाचन में सुधार करने में मदद करता है, बल्कि पेट में बनने वाली गैस-एसिडिटी से भी छुटकारा दिलवाने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करता है। इसलिए, हर्निया की समस्या के दौरान होने वाले दर्द को कम करने के लिए आप वज्रासन का सहारा ले सकते हैं, जो बहुत ही ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। आम तौर पर, अगर आप हर्निया की समस्या से पीड़ित हैं और इस दौरान होने वाले दर्द को कम करने के लिए इस योगासन को करना चाहते हैं, तो इसके लिए सबसे पहले आप एक आरामदायक योग मैट पर अपने घुटनों के बल उस मैट पर बैठ जाएं। इसके बाद आप अपने दोनों पैरों के पंजों को पीछे की तरफ आपस में मिलाएं और एड़ियों पर अपने हिप्स को अच्छे तरीके से टिका लें। इसके बाद अपने दोनों हाथों को अपने घुटनों पर बिल्कुल सीधा रखें। ध्यान रहे इस दौरान आपकी कमर, गर्दन और पीठ बिल्कुल सीधी होनी चाहिए। मतलब कि आगे की तरफ झुक कर न बैठें। इसके बाद अपनी सांस को अंदर की तरह लें और फिर बाद में छोड़ दें। आपको इसे कम से कम 5 से 10 मिनट तक जारी रखना है। इसका नियमित अभ्यास समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद प्रदान कर सकता है। 

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ऐसे में किन बातों का ध्यान रखने की जरूरत होती है? 

आम तौर पर, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि हर्निया की समस्या के दौरान अगर किसी भी योगासन को करने से दर्द या फिर असहजता का अभाव होता है, तो आपको ऐसे में इस को तुरंत बंद कर देना चाहिए। दरअसल, ऐसे में आपको कई बातों का ध्यान रखने की काफी ज्यादा जरूरत होती है, जैसे 

  1. अधिक तनाव या फिर दबाव वाले आसन करने से बचें। 
  2. अधिक समय तक एक ही मुद्रा में बैठने से बचें। 
  3. प्रातःकाल मतलब कि सुबह के समय खाली पेट योग करना काफी फायदेमंद माना जाता है। 
  4. शुरू -शुरू में योगासन का अभ्यास कम से कम 5 से 10 मिनट तक करें। इसके बाद धीरे-धीरे योग के समय को बढ़ा दें। 

निष्कर्ष: खराब खान-पान और जीवनशैली में गलत आदतों को अपनाने से हर्निया रोग के मामले भी काफी ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। यह समस्या आम है, पर अगर वक्त रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह सेहत के लिए हानिकारक भी साबित हो सकती है। हर्निया की समस्या के दौरान होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए आप कुछ योगासनों का भी सहारा ले सकते हैं। इन योगासनों से पाचन में काफी सुधार होता है और मसल्स टोन होती हैं। इससे हर्निया रोगियों को काफी ज्यादा लाभ प्राप्त होता है। पर, एक बात का ध्यान रहे इस से हर्निया पूरी तरह ठीक नहीं होती, बल्कि इस समस्या के दौरान होने वाले दर्द से आपको काफी राहत प्राप्त होती है। इससे मांसपेशियों को काफी ज्यादा मजबूती प्राप्त होती है, पर अगर आप अभी इन योगासनों के अभ्यास की शुरुआत कर रहे हैं, तो इससे पूर्व पहले अपने डॉक्टर से एक बार जरूर सलाह मशवरा कर लें। ऐसे में, किसी भी तरह की समस्या होने पर आप अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क कर सकते हैं। इसके बारे में और ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और हर्निया जैसी समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिये आप आज ही आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. हर्निया रोग किस को अधिक प्रभावित करता है? 

आम तौर पर, हर्निया की समस्या विशेष तौर पर पुरुषों, बुजुर्गों और जो लोग सबसे ज्यादा मोटापे की समस्या से पीड़ित होते हैं, उनको काफी ज्यादा प्रभावित करती है। आम तौर पर, हर्निया के प्रकार और शारीरिक स्थिति पर ही इस समस्या के जोखिम कारक निर्भर करते हैं। 

प्रश्न 2. हर्निया रोग किस स्थिति में अधिक प्रभावित माना जाता है? 

आम तौर पर, बाहर निकला हुआ ऊतक या फिर आंत का अपनी जगह पर फंस जाने या फिर उसमें खून का प्रवाह रुक जाने जैसी स्थिति में हर्निया सबसे गंभीर और प्रभावित मानी जाती है। 

प्रश्न 3. क्या इससे व्यक्ति की मौत हो सकती है? 

दरअसल, हाँ अगर हर्निया की समस्या का सही समय पर इलाज न किया जाए, तो यह स्थिति व्यक्ति के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है। 

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