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इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC) या दर्दनाक मूत्राशय सिंड्रोम के क्या है – लक्षण, कारण और उपचार के तरीके?

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इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC), जिसे दर्दनाक मूत्राशय सिंड्रोम के रूप में भी जाना जाता है, जोकि एक पुरानी मूत्र संबंधी स्थिति है जो मूत्राशय की दीवारों को प्रभावित करके व्यक्ति के लिए काफी समस्या खड़ी कर देते है। जिससे सूजन और असुविधा की समस्या उत्पन्न होती है। वहीं यह स्थिति कई प्रकार के लक्षण पैदा कर सकती है जो दैनिक जीवन को काफी हद्द तक प्रभावित करते है। तो आइए इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस के प्रकार, लक्षण और इससे बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से जानते है ;

इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस (IC) क्या है ?

  • इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस (IC) को आमतौर पर आपके मूत्राशय में उत्पन्न होने वाली समस्या के रूप में जाना जाता है, वहीं मूत्राशय की बात करें तो ये गुर्दे द्वारा फ़िल्टर किए जाने के बाद मूत्र को संग्रहीत करता है। और इसका विस्तार तब तक होता रहता है जब तक कि यह पूर्ण न हो जाए। यह एक पुरानी, ​​लंबे समय तक चलने वाली मूत्र स्थिति है जो मुख्य रूप से दर्दनाक पेशाब की विशेषता है। 
  • इसे दर्दनाक मूत्राशय सिंड्रोम के रूप में भी जाना जाता है। और इसमें दर्द हल्के से मध्यम से गंभीर तक भिन्न हो सकते है। 
  • वहीं यह स्थिति पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक प्रभावित करती है और किसी की जीवन शैली पर दीर्घकालिक प्रभाव डालती है। 

इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC) के क्या कारण है ?

  • मूत्राशय में जलन के एक स्रोत का उत्पन्न होना।
  • शरीर में सूजन जिसके कारण कुछ अन्य पदार्थों की रिहाई होती है, जो लक्षणों का एक प्रमुख कारण बनती है।
  • मूत्राशय की आपूर्ति करने वाली नसों में समस्या दर्द का कारण बन सकती है।
  • तनाव, चिंता या कोई भावनात्मक विकार का सामने करने के कारण ये समस्या उत्पन्न होती है। 
  • मासिक धर्म होने के कारण भी ये समस्या उत्पन्न हो सकती है। 
  • मूत्र पथ के संक्रमण से अगर आपके परिवार में कोई सामना कर रहा है तो, घर का दूसरा व्यक्ति जरूर इस समस्या से ग्रस्त होगा।  
  • लंबे समय तक मूत्र को पकड़े रहना या लगातार मूत्र आने के कारण। 
  • कुछ एलर्जी भी इसके कारण में शामिल हो सकते है। 
  • मौसम में बार-बार बदलाव के कारण भी आप इस तरह की समस्या का सामना कर सकते है। 
  • लंबे समय तक लगातार खड़े होने के कारण भी आपको इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
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मूत्र पथ में किसी भी तरह की समस्या अगर नज़र आए तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट यूरोलॉजिस्ट के पास आना चाहिए।

इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC) के प्रकार क्या है ?

इसके प्रकार को चार भागों में बाटा गया है, जैसे –

  • सबसे पहले अल्सरेटिव आईसी, की बात करें तो इसमें मूत्राशय की दीवारों पर अल्सर (छाले) होते है, जिससे दर्द और असुविधा होती है।
  • फिर गैर-अल्सरेटिव आईसी, में व्यक्तियों को अल्सर के बिना मूत्राशय में सूजन का अनुभव होता है।
  • हनर अल्सर के साथ इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस, में मूत्राशय की दीवार पर सूजन और क्षति के विशिष्ट क्षेत्र है, जो अक्सर गंभीर दर्द का कारण बनते है।
  • मूत्राशय दर्द सिंड्रोम (बीपीएस), शब्द कभी-कभी आईसी के साथ परस्पर उपयोग किया जाता है और क्रोनिक मूत्राशय दर्द और असुविधा को संदर्भित करते है।
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इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC) के दौरान व्यक्ति किस तरह के लक्षण का अनुभव करते है ?

  • जल्दी पेशाब का आना। 
  • आग्रह या पेशाब करने की अचानक और तीव्र इच्छा का अनुभव होना जिसे नियंत्रित करना कठिन हो सकता है।
  • मूत्र त्याग करने में असहनीय दर्द का सामना करना। 
  • महिलाओं को योनि और गुदा के बीच दर्द का अनुभव होना और पुरुषों में अंडकोश और गुदा के बीच दर्द का अनुभव होना।  
  • लगातार पेशाब करने की इच्छा का होना। 
  • लगातार पेशाब का आना। 
  • मूत्राशय भर जाने पर दर्द का होना। 
  • संभोग के दौरान तेज दर्द का अनुभव होना। 

अगर आपको मूत्राशय में गंभीर जलन के कारण पथरी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो इससे बचाव के लिए आपको पित्त पथरी की सर्जरी का चयन करना चाहिए।

इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC) के मरीज को किन खाने की चीजों का खास ध्यान रखना चाहिए !

  • अगर आप इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC) रोग से पीड़ित है, तो ऐसे में आपको अपने सेहत के साथ-साथ अपने खान-पान का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, क्युकि इस समस्या में अगर आप कुछ खाने की चीजों से परहेज नहीं करते तो ये आपके लक्षण को और बढ़ा सकते है। 
  • वहीं खाने की चीजों की बात करें तो IC के मरीज को कॉफी, सोडा, शराब, टमाटर, गर्म और मसालेदार भोजन, चॉकलेट, कैफीनयुक्त पेय पदार्थ, खट्टे रस और पेय, एमएसजी, और उच्च एसिड खाद्य पदार्थ से दुरी बनाकर रखना चाहिए, नहीं तो ये चंद खाने की चीजे आपकी जान की दुश्मन बन सकती है।
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इंटरस्टिशियल सिस्टिटिस (IC) का इलाज कैसे किया जाता है?

  • जीवन शैली में परिवर्तन लाकर आप इस तरह की समस्या से खुद का बचाव कर सकते है। 
  • आहार में परिवर्तन लाकर भी आप इस तरह की समस्या से खुद का बचाव कर सकते है।
  • मूत्राशय का प्रशिक्षण करवाते रहना समय-समय पर।  
  • ढीले-ढाले कपड़े पहने ताकि आपको परेशानी न हो। 
  • तनाव से बचे। 
  • धूम्रपान को छोड़ने की कोशिश करें। 
  • रोजाना व्यायाम करें। 
  • वहीं डॉक्टर इसका इलाज मौखिक दवाएं देकर भी करते है अगर लक्षण ज्यादा गंभीर न हो तो। 
  • दवाइयों में आपको गैर-स्टेरायडल विरोधी भड़काऊ दवाएं (NSAIDS)।
  • ट्राईसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट दवाई। 
  • एंटीथिस्टेमाइंस। 
  • पेंटोसन पॉलीसल्फेट सोडियम। 
  • वहीं अगर दवाई से कुछ फ़ायदा न हो तो सर्जिकल विकल्प का सहारा लिया जाता है, जैसे –
  • पूर्णता और इसमें व्यक्ति की समस्या का पूर्ण रूप से खात्मा किया जाता है।  
  • मूत्राशय वृद्धि को रोकने के लिए सर्जरी का चयन करना।  

आप इस सर्जरी को चाहे तो वाजिफ दाम में आरजी स्टोन यूरोलॉजी और लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल से भी करवा सकते है, वहीं इस हॉस्पिटल में डॉक्टर पहले मरीज के लक्षणों को जानने के बाद उसके उपचार की शुरुआत करते है, और कई बार तो इस समस्या को जानने के लिए डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट करवाने को भी कह सकते है।

 

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