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डायबिटीज एक आम समस्या है, जो बहुत से लोगों को प्रभावित कर देती है। इसके कारण लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे कि उनके सारे काम बुरी तरीके से प्रभावित हो जाते हैं। यह समस्या कभी भी और किसी को भी हो सकती है। दरअसल, डायबिटीज केवल शरीर में ब्लड शुगर बढ़ने का नाम नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ यह एक व्यक्ति के बहुत से अंगों को धीरे-धीरे प्रभावित करने वाली एक खतरनाक बीमारी है, जिस पर ध्यान देना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, डायबिटीज एक पुरानी बीमारी है, जिसमें एक व्यक्ति के शरीर में गुलूकोज़ कि मात्रा काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इस तरह की समस्या के दौरान आपको बार-बार पेशाब लगना, काफी ज्यादा प्यास लगना, भूख लगना, काफी ज्यादा थकान महसूस होना, वजन कम हो जाना और धुंधली नजर होना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। इन लक्षणों पर ध्यान देकर इस समस्या का समय पर इलाज होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसके लक्षणों को नजरअंदाज की बजाए, इनपर महत्वपूर्ण ध्यान देना अति आवश्यक होता है।
शायद हम में से बहुत ही कम लोग इसके बारे में जानते होंगे, कि अगर कोई व्यक्ति डायबिटीज जैसी समस्या से काफी लंबे वक्त से परेशान है और वह ठीक से कंट्रोल नहीं हो पा रही है, तो इस दौरान इस समस्या का प्रभाव शरीर के कई अंदरूनी अंगों पर देखने को मिल सकता है और शरीर के इन्हीं अंगों में से एक है किडनी जो इस तरह की समस्या से काफी ज्यादा प्रभावित हो जाती हैं। दरअसल, इस पर डॉक्टर का भी यही कहना है, कि अगर किसी व्यक्ति में डायबिटीज की समस्या काफी लंबे वक्त से चली आ रही है, तो इस समस्या का प्रभाव शरीर के महत्त्वपूर्ण अंग जैसे किडनी पर भी पड़ सकता है। ऐसे में यह भी सच है, कि एक व्यक्ति के शरीर में बढ़ती हुई शुगर चुपचाप किडनी को नुक्सान पहुँचती है। दरअसल, डायबिटीज जैसी समस्या से पीड़ित मरीजों में होने वाली ऐसी ही एक किडनी की बीमारी है, जिसको डायबिटिक नेफ्रोपैथी के नाम से जाना जाता है। अगर आम भाषा में आपको इसके बारे में समझाया जाए, तो यह मधुमेह की समस्या की वजह से होने वाली एक किडनी की बीमारी है, आम तौर पर, जिसका विकास किडनी में धीरे-धीरे होता है और अगर वक़्त रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए और लगातार इस समस्या को नजरअंदाज किया जाए, तो यह किडनी से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है, किडनी फेलियर का कारण भी बन सकती है। इसलिए, वक्त रहते समस्या का समाधान करना जरूरी होता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
ब्लड शुगर का किडनी फंक्शन पर प्रभाव!
दरअसल, हमारे शरीर में किडनी एक सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण अंग होता है, जिसका काम शरीर से फालतू पदार्थों को बाहर निकालना होता है, जिसमें खून से बेकार चीजों को फ़िल्टर करना और शरीर से ज्यादा पानी को बाहर निकालना शामिल होता है। आम तौर पर, किडनी में लाखों छोटी-छोटी सरंचनाएं होती हैं, जिन को नेफ्रॉन और ग्लोमेरुली के नाम से जाना जाता है। दरअसल, यह फिल्टर खून में से गंदगी और पानी को अलग करने का काम करते हैं और पेशाब के माध्यम से उनको बाहर निकाल देते हैं। जब हमारे शरीर में ब्लड शुगर काफी लंबे वक्त तक उच्च स्तर पर रहता है, तो इसकी वजह से हमारी किडनी में मौजूद इन छोटी-छोटी संरचनाओं की काफी ज्यादा हानि होती है।
आपको बता दें, कि अगर वक्त रहते डायबिटीज का इलाज न किया जाए, तो यह इतनी ज्यादा खतरनाक हो जाती है, कि इसके कारण ग्लोमेरुली की झिल्ली कमजोर होकर लीक होने लगती है, जिसकी वजह से शरीर में से एल्ब्यूमिन जैसे महत्वपूर्ण ब्लड प्रोटीन गलती से फिल्टर होकर पेशाब के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं। आम तौर पर, एक मात्र यही डायबिटिक नेफ्रोपैथी का शुरुआती संकेत होता है, जिस पर ध्यान न देने पर किडनी के फिल्टर करने की शक्ति कम होने लगती है।
आखिर ब्लड शुगर किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
ब्लड शुगर किडनी को निम्नलिखित तरीकों से नुकसान पहुंचाता है, जैसे कि
- छोटी ब्लड वेसल को नुकसान होना
आम तौर पर, किडनी की नाजुक रक्त-नलिकाएं और अन्य संरचनाएं हाई ब्लड शुगर की वजह से वक्त के साथ-साथ काफी ज्यादा सख्त और कठोर बन जाती हैं। जिसके इसके कारण वह पहले की तरह प्रभावित रूप से काम नहीं कर पाती हैं।
- ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन होना
दरअसल, एक व्यक्ति के शरीर में बढ़ा हुआ शुगर लेवल किडनी में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन का निर्माण कर सकता है, जिसकी वजह से किडनी के टिशू और फ़िल्टरिंग सिस्टम को काफी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है।
- डायबिटिक नेफ्रोपैथी के शुरुआती संकेत!
- पेशाब करते वक्त झाग बनना।
- त्वचा में खुजली का अहसास होना।
- पैरों और टखनों में सूजन आना।
- बार-बार पेशाब आना।
निष्कर्ष: किडनी से जुड़ी कुछ समस्याओं का खतरा डायबिटीज के मरीजों को भी होता है, इनमें से ही एक बीमारी है डायबिटिक नेफ्रोपैथी। दरअसल, हाई ब्लड शुगर के मरीजों के लिए डायबिटिक नेफ्रोपैथी एक बहुत ही ज्यादा गंभीर बीमारी हो सकती है। समस्या की समय पर पहचान और सही मैनेजमेंट से स्थिति को काफी हद तक कंट्रोल में किया जा सकता है। इस तरह की समस्या से बचने के लिए नियमित जांच, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर पर कंट्रोल काफी ज्यादा जरूरी होता है। इसके अलावा, अगर किसी भी डायबिटीज के मरीज में इस लेख में बताए गए लक्षण नजर आते हैं, तो यह किडनी की सेहत के लिए एक अच्छा संकेत नहीं होता है, इसलिए लक्षण नजर आते ही आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और पेशाब में प्रोटीन की जांच और खून की ईजीएफआर रिपोर्ट करवानी चाहिए। इसके बारे में ज़्यादा जानने के लिए और किडनी से जुड़ी किसी भी समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आरजी स्टोन यूरोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपी अस्पताल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।